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केजरीवाल सरकार के मोहल्ला क्लीनिक को लगी सरकारी बीमारी

सरकार अपने इस फ्लैगशिप प्रोजेक्ट पर चिट्ठियों के जवाब दाखिल करने में उलझी हुई है.

Updated On: Jan 05, 2017 09:03 AM IST

Kangkan Acharyya

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केजरीवाल सरकार के मोहल्ला क्लीनिक को लगी सरकारी बीमारी

दिल्ली सरकार के 31 मार्च तक 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने की समय सीमा नजदीक आ रही है. लेकिन, सरकार अपने इस फ्लैगशिप प्रोजेक्ट पर चिट्ठियों के जवाब दाखिल करने में उलझी हुई है. अलग-अलग दफ्तरों की ओर से उठाई गई आपत्तियों के चलते यह प्रोजेक्ट लटक गया है.

एमसीडी और एलजी दोनों ने उठाई आपत्ति

मोहल्ला क्लीनिक प्रोजेक्ट का एलान 2015 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किया था. दिल्ली नगर निगम ने इन क्लीनिकों को सड़कों और फुटपाथ पर खोलने पर आपत्ति उठाई. इसके बाद से यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया. तब के उपराज्यपाल नजीब जंग के दफ्तर ने भी 300 स्कूलों में प्राइमरी हेल्थ केयर क्लीनिक पर आपत्ति जताई थी.

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स्वास्थ्य विभाग के एक सूत्र ने बताया, ‘मोहल्ला क्लीनिक प्रोजेक्ट पर आपत्तियां इतनी अधिक हैं कि स्वास्थ मंत्री के क्षेत्र भी कोई काम नहीं हो पाया है.’

सूत्र ने यह भी बताया कि दिल्ली में 105 मोहल्ला क्लीनिक अब तक खुल चुके हैं. टारगेट पूरा करने के लिए ऐसे 895 क्लीनिक और खोले जाने हैं.

एलजी ऑफिस ने दिया कानूनों का हवाला

उपराज्यपाल के दफ्तर ने सरकारी स्कूलों में डिस्पेंसरी खोलने के प्रस्ताव को कानूनी वजहें गिनाते हुए खारिज कर दिया. इसमें कहा गया कि दिल्ली स्कूल एजूकेशन एक्ट इस तरह के प्रावधानों की इजाजत नहीं देता है.

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Image: Solaris

उपराज्यपाल के दफ्तर के एक सूत्र ने बताया कि अगर मोहल्ला क्लीनकों को सरकारी स्कूलों के अंदर चलाने की इजाजत दी जाती है, तो निजी स्कूल भी ऐसा ही कर सकते हैं. सूत्र ने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भी उपराज्यपाल ने स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक खोलने को मंजूरी देने से इनकार कर दिया.

हाईकोर्ट का आदेश भी खिलाफ

एक्टिविस्ट और वकील अशोक अग्रवाल ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट का एक साफ आदेश है जिसमें कहा गया है कि स्कूलों में डिस्पेंसरी नहीं खोली जा सकती हैं.

उन्होंने कहा, ‘2002 में दिल्ली हाईकोर्ट ने बवाना में एक स्कूल में चल रही डिस्पेंसरी बंद करने के लिए आदेश दिया था. यह पाया गया था कि डिस्पेंसरी के कर्मचारी इस्तेमाल की गई सिरिंज समेत दूसरे मेडिकल कचरे को खेल के मैदान में फेंक देते थे.’

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ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री कार्यालय में एक याचिका दायर कर उनसे स्कूलों में डिस्पेंसरी न खोलने का अनुरोध किया था.

एमसीडी का आरोपः फुटपाथ पर बन रहे क्लीनिक

चालू मोहल्ला क्लीनिकों पर भी आपत्तियां उठाई गई हैं. दिल्ली नगर निगम ने फुटपाथ पर मोहल्ला क्लीनिक खोलने को कानून का उल्लंघन बताया और दिल्ली सरकार को नोटिस थमा दिए.

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर डॉक्टर संजीव नैयर ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा, ‘मोहल्ला क्लीनिकों के नाम पर फुटपाथों के बीचोंबीच स्ट्रक्चर बना दिए गए हैं. ये क्या साबित करना चाहते हैं?’ उन्होंने यह भी कहा कि मोहल्ला क्लीनिक ऐसी जगहों पर भी बना दिए गए हैं जहां इनकी कोई जरूरत नहीं है.

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उन्होंने कहा, ‘पश्चिम विहार में एक मोहल्ला क्लीनिक खोलने का प्रस्ताव किया गया था. वहां आधे किलोमीटर के दायरे में पहले से ही तीन डिस्पेंसरी चल रही हैं. इनमें से एक एमसीडी की, एक केंद्र सरकार की और एक दिल्ली सरकार की डिस्पेंसरी है.’ उन्होंने कहा, ‘क्या दिल्ली सरकार मोहल्ला क्लीनिक चलाने के लिए अपनी ही डिस्पेंसरी बंद करना चाहती है.’

रायशुमारी से खुलते हैं क्लीनिक

आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि कोई भी मोहल्ला क्लीनिक उस इलाके के लोगों से राय-मशविरा करने के बाद ही खोला जाता है.

कुमार ने पूछा, ‘लोग हमें निर्देश देते हैं कि कहां मोहल्ला क्लीनिक खोला जाना चाहिए. क्या आपको लगता है कि लोगों को सड़क को अवरुद्ध करके बनने वाले मोहल्ला क्लीनिक पसंद आएंगे?’ उन्होंने सड़कों को घेर कर बनाए गए किसी भी मोहल्ला क्लीनिक के अस्तिस्व से इनकार कर दिया.

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इस सबके बावजूद दिल्ली सरकार मोहल्ला क्लीनिक खोलने के लिए एमसीडी से मंजूरी लेने पर अड़ी हुई है.

डॉक्टर संजीव नैयर ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि एमसीडी को मोहल्ला क्लीनिकों से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन, अगर ये बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के संबंध में कानूनों का उल्लंघन करते हैं तो उन पर आपत्ति उठाया जाना जायज है.

डीडीए भी कूदा जंग में

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में मौजूद एक सूत्र ने बताया कि एमसीडी के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने भी अपनी जमीनों पर मोहल्ला क्लीनिक बनाने को लेकर आपत्ति उठाई है.

डीडीए ने कहा है कि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग उसकी मंजूरी लिए बगैर इस प्रोजेक्ट पर आगे नहीं बढ़ सकता है.

Source: Getty Images

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सूत्र ने कहा, ‘हम उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.’

आप विधायक अजय दत्ता ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि मोहल्ला क्लीनिक मौजूदा वक्त के कम लागत वाले डिस्पेंसरी हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली के नए उपराज्यपाल इन जरूरतों को समझेंगे. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार जल्द ही इन क्लीनिकों के लिए मंजूरी हासिल करने की पहल करेगी.

एमसीडी चुनावों पर है आप की नजर

जून 2015 को दिल्ली के मुख्यमंत्री ने 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का एलान किया था. मोहल्ला क्लीनिक दिल्ली सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है जिसका मकसद लोगों को मुफ्त में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना है.

मंजूरी मिलने में आ रही अड़चनों को देखते हुए दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री ने 1000 मोहल्ला क्लीनिकों को खोले जाने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2017 कर दी.

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आप का मकसद मई में होने वाले एमसीडी चुनावों में मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मुख्य मुद्दा बनाने का है. लेकिन, सवाल यह है कि क्या पार्टी अपने इस वादे को पूरा कर पाएगी?

 

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