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घरेलू हिंसा से प्रभावित हो रही महिलाएं, सर्वे पर सरकार को देना होगा ध्यान: अरुणा राय

सरकार को रिपोर्ट खारिज करने की बजाय समाज में महिलाओं की बिगड़ती हालत पर ध्यान देना चाहिए

Updated On: Jul 01, 2018 05:16 PM IST

Bhasha

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घरेलू हिंसा से प्रभावित हो रही महिलाएं, सर्वे पर सरकार को देना होगा ध्यान: अरुणा राय
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दुनिया में भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश बताने वाले सर्वे पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि सरकार को रिपोर्ट खारिज करने की बजाय समाज में महिलाओं की बिगड़ती हालत पर ध्यान देना चाहिए.

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर 550 विशेषज्ञों के सर्वे के बाद थॉमसन रॉयटर फाउंडेशन ने भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश करार दिया था. यौन हिंसा के लिए सबसे अधिक खतरनाक के देश के तौर पर इस सूची में अफगानिस्तान दूसरे नंबर पर और सीरिया तीसरे नंबर पर है.

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कहा कि असहिष्णुता के चलते भारत में हिंसा की बढ़ती घटनाओं की वजह से सबसे ज्यादा महिलाएं प्रभावित हो रही हैं. अरूणा ने कहा, 'यह हमेशा एक तथ्य रहेगा कि भारतीय समाज में पितृसत्ता गहराई से जड़ें जमाए हुए है. यह लंबे समय से ऐसा है और रहेगा.

यह सर्वे एक चेतावनी है कि लैंगिक असहिष्णुता की धारणाओं को भारत में गंभीरता से लेना चाहिए. आलम यह है कि हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनी सामूहिक सुरक्षा को ले कर चिंता करने लगते हैं.'

 सूची में भारत के स्थान पर नहीं होनी चाहिए चर्चा 

उन्होंने कहा, मुद्दा यह नहीं है कि भारत पहले, तीसरे या चौथे स्थान पर है, मुद्दा यह है कि अपने घर को दुरूस्त करने के लिए इस धारणा को गंभीरता से लेना चाहिए. सामाजिक कार्यकर्ता और एपवा की सचिव कविता कृष्णन ने राय के साथ सहमति जताते हुए कहा कि चर्चा इस बात पर नहीं होनी चाहिए की सूची में भारत का क्या स्थान है.

कविता ने कहा, हम खराब स्थिति में हैं और चर्चा इस बात पर की जानी चाहिए की इसमें सुधार कैसे लाया जाए, इस बात पर नहीं कि हम किस नंबर पर हैं. महिलाओं को देश में स्वतंत्र होने के सरकार के दावे पर उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आज भी कुछ राज्यों में 40 प्रतिशत महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों तक अकेली नहीं जा पाती हैं.

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि, 'हाल ही में, हमने देखा है कि लोग बच्चियों के बलात्कारियों के समर्थन में खुल कर आ रहे हैं. ऐसा देश में पहले कभी नहीं देखा गया.' मामले में तत्कालीन राज्य सरकार के दो मंत्रियों पर आरोपियों के समर्थन का आरोप लगा है.

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सर्वे को स्पष्ट रूप से गलत करार देते हुए इसे खारिज कर दिया कि यह अज्ञात लोगों की आत्मगत धारणाओं पर आधारित है और नतीजों तक पहुंचने के लिए दोषपूर्ण पद्धति का इस्तेमाल किया गया है.

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