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मानहानि मामला: जब जेठमलानी ने जेटली पर सवालों की बौछार कर दी...

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केजरीवाल पर मानहानि का 10 करोड़ का मुकदमा कर रखा है

Updated On: Mar 07, 2017 11:49 AM IST

FP Staff

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मानहानि मामला: जब जेठमलानी ने जेटली पर सवालों की बौछार कर दी...

दिल्ली हाईकोर्ट में ये सबसे हाईवोल्टेज जिरह का मामला था. एक तरफ थे देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली तो दूसरी तरफ देश के नामी वकील और बीजेपी से निकाले गए नेता रामजेठमलानी. रामजेठमलानी के सवालों की बौछार और उन पेंचीदे सवालों के फंदे से बचते हुए अरुण जेटली के जवाब ने हाईकोर्ट के माहौल को सरगर्म कर दिया.

अरुण जेटली ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का 10 करोड़ का मुकदमा ठोक रखा है. दिल्ली हाईकोर्ट में उसी मामले की सुनवाई चल रही थी, जिसमें केजरीवाल की तरफ से पैरवी करने रामजेठमलानी मौजूद थे. जेठमलानी ने जेटली से जिरह में उनकी अंग्रेजी से लेकर मान और सम्मान की सामाजिक समझ पर सवालों की बौछार कर दी.

जिरह की शुरुआत में अरुण जेटली ने जैसे ही ये कहना शुरू किया कि वो 1977 से वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं और उन्हें सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के केसेज़ हैंडल करने का अनुभव है. इस पर जेठमलानी ने छूटते ही कहा कि उन्हें सिविल लॉ में जेटली के ज्ञान में जरा भी दिलचस्पी नहीं है.

इसके बाद सवाल और जवाब तल्ख होते गए.

जेठमलानी: आप बताएं कि आप कैसे कह सकते हैं कि आपकी जो मानहानि हुई है उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है और उसे मापा नहीं जा सकता है?

अरुण जेटली:  मेरी नजर में मेरी प्रतिष्ठा मेरे दोस्तों, शुभचिंतकों और दूसरे करीबी लोगों से जुड़ी हुई है. मेरी मानहानि की भरपाई आर्थिक आधार पर मुश्किल है. अपने महत्व और साख को देखते हुए मैंने 10 करोड़ का दावा किया है.

इसके बाद जेठमलानी ने अरुण जेटली पर जबरदस्त तंज कसे. जेठमलानी ने कहा कि अगर ऐसा है तो इसका मतलब है कि मानहानि का ये मुकदमा पैसों का नहीं है बल्कि आपके खुद को महान मानने के अहसास से जुड़ा है जिसे किसी भी तौर से मापा नहीं जा सकता है.

एक वक्त ऐसा आया कि जेठमलानी ने कोर्ट में डिक्शनरी निकाल. उन्होंने जेटली से पूछा कि 'गुडविल' और 'रेप्युटेशन' में क्या फर्क होता है? इस सवाल के बाद कोर्ट ने जेठमलानी को इसके आगे कुछ भी पूछने से रोक दिया.

दिल्ली के सीएम केजरीवाल के पीए राजेंद्र कुमार के दफ्तर में सीबीआई छापे को लेकर भी जेठमलानी ने तल्ख सवाल पूछे.

जेठमलानी: क्या राजेंद्र कुमार के दफ्तर में छापेमारी की जानकारी आपको थी? अरुण: छापेमारी की जानकारी नहीं थी. इस बारे में मीडिया से पता चला.

जेठमलानी: क्या आपको इस बात की जानकारी थी कि डीडीसीए से जुड़े दस्तावेज उनके दफ्तर में हो सकते हैं ? अरुण जेटली: मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

सवाल: क्या आपने डीडीसीए की जांच की रिपोर्ट पढ़ी है? अरुण जेटली:  हां, मैंने रिपोर्ट पढ़ी है.

जेठमलानी: ये रिपोर्ट आपको किसने दी थी? अरुण जेटली: मुझे ध्यान नहीं कि ये रिपोर्ट किसने दी थी.

इसके बाद जेठमलानी कि जिरह बढ़ती गई. उन्होंने अरुण जेटली से पूछा कि क्या आपको डीडीसीए की रिपोर्ट सांघी ने दी है. सांघी ही वो ब्यूरोक्रेट हैं जिनकी अगुवाई में डीडीसीए की रिपोर्ट तैयार की गई थी. इसके जवाब में अरुण जेटली ने कहा कि उन्हें याद नहीं है कि ये रिपोर्ट उन्हें किसने दी थी. उन्होंने सांघी से मिलने से भी इनकार किया.

जेटली ने बार-बार ये कहा कि उन्होंने अपने ऊपर राजनीतिक आलोचनाओं की परवाह नहीं की है. लेकिन केजरीवान ने उनके व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सम्मान पर हमले किए. जिसके बाद उन्हें मजबूरन 10 करोड़ का दावा ठोकना पड़ा.

क्या है पूरा मामला ?

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली जिला एवं क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में पैसों की गड़बड़ी का आरोप लगाया था. उन्होंने इस मामले में अरुण जेटली का नाम घसीटा था. अरुण जेटली 2013 तक डीडीसीए के अध्यक्ष थे. वो 13 साल तक इस पद पर बने रहे थे. केजरीवाल ने इसी दौरान डीडीसीए में वित्तीय अनयमितता किए जाने के आरोप लगाए थे.

इन आरोपों पर दिसंबर 2015 में अरुण जेटली ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पांच नेताओं पर मानहानि का 10 करोड़ का दावा ठोका था.

अब इस मामले में क्या होगा?

सोमवार को इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में करीब तीन घंटे तक जिरह चली. इस दौरान जेठमलानी ने जेटली से कुल 52 सवाल पूछे. हालांकि इनमें से 11 सवालों को कोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रा ने गैरजरूरी बताया. इस मामले में बहस मंगलवार को भी जारी रहेगी.

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