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आयुध फैक्ट्री बोर्ड की नाकामी पर सेना चिंतित

विस्फोटक लीक होने से 19,325 से अधिक खराब एंटी टैंक माइंस में विस्फोट हो गया था

Bhasha Updated On: Jul 30, 2017 04:39 PM IST

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आयुध फैक्ट्री बोर्ड की नाकामी पर सेना चिंतित

आयुध फैक्ट्री बोर्ड की नाकामी को लेकर सेना ने रक्षा मंत्रालय से अपनी गंभीर चिंता जाहिर की है. पिछले साल महाराष्ट्र के एक गोलाबारूद डिपो में भीषण विस्फोट के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सजा में देरी को लेकर भी सेना ने चिंता जाहिर की है. इस विस्फोट में सेना के 19 जवानों की मौत हो गई थी.

पुलगांव के केंद्रीय आयुध भंडार में रखे कुछ माइंस से विस्फोटकों के लीक हो जाने के चलते मुख्यत: 19,325 से अधिक खराब एंटी टैंक माइंस में विस्फोट हो गया था.

रक्षा उत्पादन सचिव अशोक कुमार गुप्ता को लिखे पत्र में सैन्य मुख्यालय ने 31 मई 2016 को आयुध भंडार में आग लगने के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना ने अलग से रक्षा सचिव संजय मित्रा के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया है.

आयुध भंडार में आग लगने की घटना में सेना के दो अधिकारी, चार रक्षा सुरक्षा कोर कर्मी और 13 रक्षा दमकल सुरक्षा कर्मी मारे गए थे. यह आयुध भंडार देश का सबसे बड़ा गोलाबारूद एवं शस्त्र भंडार है और इसे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा आयुध भंडार बताया जाता है.

पत्र में सेना ने बताया कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में घटना के लिए कुछ खराब टैंक-रोधी नॉन डिटेक्टेबल माइंस से अत्यधिक विस्फोटक ट्राइनाइट्रोटॉल्विन (टीएनटी) के रिसाव को जिम्मेदार ठहराया गया था. पीटीआई को इस पत्र की जानकारी है.

बहरहाल, इस संबंध में आयुध फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

सेना ने आयुध फैक्ट्री बोर्ड द्वारा जवाबदेही तय करने और अधिकारियों की ओर से बरती गई ‘लापरवाही’ का पता लगाने की मांग की है.

ओएफबी समूचे देश में 41 आयुध फैक्ट्रियों का संचालन करता है और रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पाद विभाग के तहत कार्य करता है. इन माइंस का निर्माण आयुध फैक्ट्री चांदा ने किया था.

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