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एनिमल किंगडम किसी की संपत्ति नहीं, इन्हें भी इनसानों की तरह जीने का हक है

पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा 'संविधान का अनुच्छेद 21 मनुष्यों के अधिकारों की रक्षा करते समय, 'जीवन' की रक्षा की बात करता है

Updated On: Jul 04, 2018 10:11 PM IST

FP Staff

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एनिमल किंगडम किसी की संपत्ति नहीं, इन्हें भी इनसानों की तरह जीने का हक है

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पूरे एनिमल किंगडम को एक कानूनी ईकाई या जीवित व्यक्ति के रूप में घोषित किया है. इसका मतलब है कि अब जानवरों को भी एक जीवित व्यक्ति की तरह जीने के लिए तमाम अधिकार मिलेंगे. इस पशु साम्राज्य में पक्षी और समुद्री जीव भी शामिल हैं. इससे पहले भी साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी को ऐसे ही अधिकार दिए थे.

जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस लोकपाल सिंह की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में भी कई अदालतों ने ऐसा किया है. उन्होंने कहा कि पहले भी अदालतें हिंदू देवताओं, पवित्र शास्त्रों और नदियों को जीवित व्यक्तियों के तमाम हक दे चुकी हैं. ताकि उनकी सुरक्षा और बेहतरी को सुनिश्चित किया जा सके.

पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा 'संविधान का अनुच्छेद 21 मनुष्यों के अधिकारों की रक्षा करते समय, 'जीवन' की रक्षा की बात करता है. और 'जीवन' की रक्षा का यह हक पशु पर भी लागू होता है.'

घोड़ा गाड़ी के मालिकों द्वारा बूढ़े हो चुके घोड़ों को छोड़ देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यह फैसला लिया. अदालत ने राज्य के हर जिले में पशु कल्याण समिति बनाने सहित जानवरों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को कई दिशा निर्देश जारी किए. इसी के साथ उन्होंने स्थानीय लोगों से कहा कि जानवरों की उनके माता-पिता की तरह रक्षा करें.

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