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तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी को बर्खास्त करने के पीछे CM चंद्रबाबू नायडू का हाथ है?

रमन्ना दीक्षितुलु ने मंदिर में आर्थिक गड़बड़ियों का हवाला देकर सीबीआई जांच की मांग की है. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखा है

Updated On: May 22, 2018 10:17 AM IST

FP Staff

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तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी को बर्खास्त करने के पीछे CM चंद्रबाबू नायडू का हाथ है?

दुनिया के सबसे अमीर तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी रमन्ना दीक्षितुलु के हटाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. बीते गुरुवार को रमन्ना दीक्षितुलु को मंदिर के मुख्य पुजारी के पद से हटा दिया गया था.

द संडे गार्डियन अखबार में छपी खबर के अनुसार राज्य सरकार ने दलील दी कि मुख्य पुजारी की उम्र 65 वर्ष से अधिक हो चुकी है इसलिए उन्हें रिटायरमेंट दी गई है. तिरुपति तिरुमला देवास्थनम (टीटीडी) ट्र्स्ट बोर्ड ने भी आनन-फानन में उसी दिन अपनी नई नीति बनाते हुए मंदिर के मुख्य पुजारी की रिटायरमेंट उम्र 65 वर्ष तय कर दी. ट्रस्ट के बोर्ड ने उनकी जगह (रमन्ना दीक्षितुलु) 4 नए मुख्य पुजारियों को नियुक्ति किया है.

इससे 2 दिन पहले, रमन्ना दीक्षितुलु ने चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि नवगठित टीटीडी बोर्ड और सरकार के अधिकारी मंदिर से जुड़े मुद्दों और रोजमर्रा के कामकाज में दखल देते हैं. उन्होंने मंदिर को 16वीं शताब्दी के विजयनगर के राजा श्रीकृष्ण देवार्य से दान में मिले सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात के गहनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए.

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चंद्रबाबू नायडू (फोटो: फेसबुक से साभार)

मंदिर के ट्रस्ट पर शासकीय नीतियों में खामियों और आर्थिक गड़बड़ी का आरोप

रमन्ना ने नवगठित ट्रस्ट की शासकीय नीतियों में कई तरह की खामियों के भी संकेत दिए. इस ट्रस्ट के मुखिया टीडीपी नेता पुत्ता सुधाकर यादव आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री के यनामाला रामकृष्णाडु के करीबी रिश्तेदार हैं. सुधाकर यादव के ईसाई चर्च संगठनों से सांठगांठ को लेकर उनके ट्रस्ट के मुखिया के रूप में  नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष ने सूर्योदय से पहले मंदिर में होने वाले कुछ महत्वपूर्ण पूजा-पाठ बंद करने को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ वीवीआईपी को बिना किसी रूकावट और देरी के 'दर्शन' के लिए किया गया. उन्होंने कहा कि वैदिक काल से चले आ रहे मंदिर के रीति-रिवाजों और नियमों को ट्रस्ट बोर्ड के नए सदस्यों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर बदला जा रहा है.

रमन्ना दीक्षितुलु ने ऐसे कई उदाहरण दिए जिसमें टीटीडी ट्रस्ट बोर्ड और सरकार ने मंदिर को भक्तों से दान में मिले करोड़ों रुपए को अपने काम के लिए उपयोग में लाया. उन्होंने कहा कि हाल ही में सरकार ने मंदिर पर टीडीपी विधायक टिप्पेस्वामी के मैरिज हॉल निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए देने का दबाव बनाया.

रमन्ना ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आर्थिक गड़बड़ियों का हवाला देकर सीबीआई जांच की मांग की है. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखा है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की परिसंपत्तियों का वर्ष 1996 से ठीक से ऑडिट नहीं कराया गया है.

मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी के आरोपों पर सत्ताधारी टीडीपी ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा कर वो मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. राज्य के उप-मुख्यमंत्री के ई कृष्णामूर्ति ने कहा, रमन्ना दीक्षितुलु ने अपनी 'लक्ष्मण रेखा' पार कर दी थी इसलिए उन्हें हटाया गया.

कृष्णामूर्ति ने कहा कि सरकार ने रमन्ना दीक्षितुलु के मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में उनके दो दशक से ज्यादा के कार्यकाल की जांच कराने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि उनपर लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है. अगर वो दोषी गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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