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आनंदपाल एनकाउंटर : सीबीआई ने क्यों बढ़ा दी है जांच की रफ्तार

सीबीआई ने राजस्थान के चर्चित आनंदपाल एनकाउंटर मामले की जांच तेज कर दी है. एनकाउंटर की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक लगभग 200 लोगों के बयान दर्ज किए हैं.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 17, 2018 10:47 PM IST

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आनंदपाल एनकाउंटर : सीबीआई ने क्यों बढ़ा दी है जांच की रफ्तार

सीबीआई ने राजस्थान के चर्चित आनंदपाल एनकाउंटर मामले की जांच तेज कर दी है. एनकाउंटर की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक लगभग 200 लोगों के बयान दर्ज किए हैं. बीते सोमवार को भी सीबीआई की टीम ने इस मामले में अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद आनंदपाल के भाई रूपेश उर्फ विक्की और देवेन्द्र उर्फ गुट्टु से 6 घंटे तक पूछताछ की. पिछले साल जुलाई में रूपेश उर्फ विक्की और देवेन्द्र उर्फ गुट्टु की गिरफ्तारी के बाद ही आनंदपाल का एनकाउंटर हुआ था.

कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह की मौत के बाद राजस्थान में काफी हंगामा हुआ था. आनंदपाल एनकाउंटर के बाद आनंदपाल के गांव सांवराद में सभा के दौरान उपद्रव भी हुआ था. उसमें एक युवक की मौत हो गई थी. एनकाउंटर के बाद राजपूत व रावणा राजपूत समाज की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच के लिए दो बार सिफारिश करनी पड़ी थी.

गौरतलब है कि सीबीआई ने इसी साल 6 जनवरी को इस मामले में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे. इनमें एक मामला चूरू के रतनगढ़ इलाके में मालासर गांव में हुए एनकाउंटर का है. दूसरा नागौर के सांवराद में हुए उपद्रव का व तीसरा उपद्रव में हुई युवक सुरेन्द्र सिंह की मौत का मामला दर्ज किया गया था. एनकाउंटर का मामला रतनगढ़ थाने में और उपद्रव व युवक की मौत का मामला नागौर के डीडवाना में दर्ज किया गया था.

आनंदपाल एनकाउंटर की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने अब तक आनंदपाल की एक AK-47 और 22 राइफल समेत मुठभेड़ा शामिल 27 पुलिसकर्मियों के हथियार, कारतूस जब्त कर चुकी है. सीबीआई ने सभी हथियारों को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया है.

सीबीआई टीम ने इस मामले में अब तक लगभग 200 लोगों से पूछताछ कर चुकी है. इनमें राजस्थान व हरियाणा पुलिस के जवान भी शामिल हैं. मालासर में जिस मकान में आनंदपाल का एनकाउंटर हुआ था उसके मालिक श्रवण सिंह, उसकी पत्नी, बेटा और बेटी, राजपूत सभा जयपुर के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा, करणी सेना के चूरू जिलाध्यक्ष मुरजाद सिंह समेत राजपूत समाज के 15 विभिन्न संगठनों से संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं.

आनंदपाल सिंह के राज्य सरकार के मंत्रियों से संबंध बताए जा रहे हैं

पिछले साल काफी जद्दोजहद के बाद केंद्र सरकार ने राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह एनकाउंटर की जांच सीबीआई को सौंपी थी. राज्य की वसुंधरा सरकार ने राजपूत समाज के भारी विरोध के बाद यह मामला सीबीआई को भेज दिया था. वसुंधरा सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने के पीछे राजपूत समाज की नाराजगी को मुख्य वजह बताया था. इस मुठभेड़ के बाद से ही राजस्थान में राजपूत समाज का एक वर्ग प्रदेश की वसुंधरा सरकार से खफा चल रहा था.

दूसरी तरफ राज्य सरकार लगातार यह प्रयास करने में लगी हुई थी कि किसी तरह यह वर्ग मान जाए. लेकिन, राजपूत समाज के इस वर्ग का लगातार विरोध के बाद आखिरकार पिछले साल नवंबर महीने में राज्य सरकार ने दोबारा से केंद्र को सीबीआई जांच करने का पत्र लिखा. राजस्थान सरकार ने केंद्र को लिखे दोबारा पत्र में मांग की थी कि जांच नहीं कराने पर राजपूत और रावणा राजपूत समाज में असंतोष पनप रहा है, जिसका असर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है.

राज्य सरकार के सीबीआई जांच की सिफारिश के बावजूद सीबीआई ने इस मामले को जांच योग्य नहीं माना था. जिसके बाद यह मामला राजस्थान के निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था. वसुंधरा सरकार ने बेशक किसी झमेले में पड़ने से बचने के लिए इस एनकाउंटर की जांच की सिफारिश सीबीआई के पास भेज दी थी, लेकिन काफी दिनों तक जब सीबीआई जांच नहीं शुरू हुई तो आनंदपाल की पत्नी ने चारू जिला सत्र न्यायालय में सीबीआई जांच की याचिका दायर की थी. लेकिन, जिला सत्र न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद आनंदपाल की पत्नी ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया. सीबीआई जांच के मुद्दे पर राजस्थान हाईकोर्ट ने भी आनंदपाल की पत्नी याचिका को खारिज कर दिया था.

आनंदपाल एनकाउंटर मामले में राजस्थान पुलिस ने लगभग 17 हजार लोगों के खिलाफ हिंसा फैलाने का मामला दर्ज किया था. कई राजपूत नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया था. आनंदपाल राजपूत बिरादरी से आता था. राजपूतों में आनंदपाल की छवि रॉबिन-हुड वाली थी. राजपूत समाज के कुछ लोग और आनंदपाल के परिवार वालों ने एनकाउंटर के कई दिनों तक शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया था.

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