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आम्रपाली को 'सुप्रीम' झटका, जब्त होंगे 5 स्टार होटल, FMCG कंपनी और मॉल

आम्रपाली बिल्डर्स ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार किया कि कंपनी ने फ्लैट देने के एवज में ली गई 2996 करोड़ की एडवांस रकम और मार्केट से उठाए गए पैसे का कुछ हिस्सा कारोबार के विस्तार में इस्तेमाल किया था

Updated On: Dec 05, 2018 05:07 PM IST

FP Staff

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आम्रपाली को 'सुप्रीम' झटका, जब्त होंगे 5 स्टार होटल, FMCG कंपनी और मॉल

सुप्रीम कोर्ट से आम्रपाली ग्रुप को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने बुधवार को अपने अंतरिम आदेश में आम्रपाली के फाइव स्टार होटल, एफएमसीजी कंपनी, कॉर्पोरेट ऑफिस और मॉल को अटैच (जब्त) करने का निर्दिश दिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार आम्रपाली बिल्डर्स ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा ने यह स्वीकार किया था कि कंपनी ने फ्लैट देने के एवज में ली गई एडवांस रकम और मार्केट से उठाए गए पैसे का कुछ हिस्सा कारोबार के विस्तार में इस्तेमाल किया था.

आम्रपाली ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह रकम 2,996 करोड़ रुपए के आस-पास है. ग्रुप ने यह भी बताया है कि इस रकम को व्यापार विस्तार के लिए उपयोग में लाया गया था, लेकिन इसके नतीजे उम्मीदों के मुताबिक नहीं आए जिससे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का काम अधर में अटक गया.

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बॉयर्स के 2996 करोड़ रुपए दूसरी जगह इन्वेस्ट किए

दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य जगहों पर कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के कंस्ट्रक्शन में शामिल आम्रपाली ग्रुप ने मार्च, 2015 तक 2996 करोड़ रुपए दूसरी कंपनियों में जमा कराए और इसके बाद से ही कंपनियों की बैलेंस शीट्स भी अपडेट नहीं हुई. आम्रपाली ग्रुप ने कहा कि घर खरीदारों से 15 कंपनियों को 11,573 करोड़ मिले और साथ ही वित्तीय संस्थानों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से 4040 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिले हैं. ग्रुप का कहना है कि उसने 10,300 करोड़ रुपए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में निवेश किए हैं.

आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा ने कोर्ट के सामने ग्रुप की सभी 46 कंपनियों के मॉनेटरी ट्रांजेक्शन (मौद्रिक लेनदेन) कोर्ट के सामने रखे. उन्होंने कहा कि 5,980 करोड़ रुपए मॉल, रिजॉर्ट, जमीन के लिए पैसे देने, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन, बैंक और घर खरीदारों को रिफंड में खर्च हुए हैं. शर्मा ने इन आरोपों को खारिज किया कि ग्रुप के बाहर की कंपनियों में पैसा घुमाया गया.

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने फंड के डाइवर्जन के लिए फोरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि घर खरीदारों के पैसे को दूसरे काम में लेना आपराधिक दुरूपयोग है और इसके चलते कंपनी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

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