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अमेरिका से अपाचे जंगी हेलिकॉप्टर खरीदेगा भारत, जानिए क्या होगी इसकी खासियत?

भारत इस एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टर के साथ अमेरिका से संबद्ध उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण एवं गोला-बारूद भी लेगा

FP Staff Updated On: Jun 13, 2018 11:40 AM IST

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अमेरिका से अपाचे जंगी हेलिकॉप्टर खरीदेगा भारत, जानिए क्या होगी इसकी खासियत?

अमेरिका ने भारत को छह अपाचे जंगी हेलिकॉप्टर बेचने की डील को मंजूरी दे दी है. ये सौदा 930 मिलियन डॉलर में किया गया है. पिछले साल अगस्त में भारत सरकार ने इसे खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.

समझौते को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है, अगर कोई अमेरिकी सांसद आपत्ति नहीं उठाता है तो कॉन्ट्रेक्ट को सीधे हरी झंडी मिल जाएगी.

बोइंग और भारतीय साझेदार टाटा ने भारत में अपाचे हेलिकॉप्टर की बॉडी (fuselages) बनानी शुरू कर दी है. लेकिन मंगलवार को जिस सौदे को मंजूरी दी गई है उसके तहत भारत को पूरी तरह तैयार हेलिकॉप्टर बेचा जाएगा. ऐसे में इस सौदे को लेकर टाटा और बोइंग को परेशानी हो सकती है. अमेरिका में अपाचे जंगी हेलिकॉप्टर के बड़े कॉन्ट्रैक्टर है- लॉकहीड मार्टिन, जनरल इलेक्ट्रिक और रेथियॉन.

भारत इस एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टर के साथ अमेरिका से संबद्ध उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण एवं गोला-बारूद भी लेगा.

क्या है अपाचे जंगी हेलिकॉप्टर की खूबियां?

- एएच-64-ई’ हेलिकॉप्टर अत्याधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टरों में गिने जाते हैं जिनमें आधुनिक शस्त्र प्रणाली और रात में भी लड़ने की क्षमता होती है.

- बेहद कम उंचाई पर उड़कर हवाई हमले के साथ ही जमीनी हमले करने में भी ये सक्षम है.

- ये हेलिकॉप्टर अमेरिकी सेना के सबसे शक्तिशाली हेलिकॉप्टर हैं. जो हेलफायर मिसाइलों से लैस होते हैं.

- अपाचे हेलिकॉप्टर में टर्बोसाफ्ट इंजन लगे हैं. इसका वजन 5,165 किलो है.

- अपाचे हेलिकॉप्टर में एजीएम-114 हेलिफायर मिसाइल और हाइड्रा 70 रॉकेट पॉड्स भी लगे हैं.

- इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल तमाम युद्धों में हो चुका है. अमेरिकी सेना इसे गल्फ वॉर के समय और फॉल्कन वार के दौरान इस्तेमाल कर चुकी है.

- ये हेलिकॉप्टर ब्रिटेन, अमेरिका सहित 19 देशों के पास है.

- इसमें बाहर की तरफ तीन हुक हैं जिनसे भारी सामान टांगकर भी ये उड़ान भर सकता है.

- अपाचे हेलिकॉप्टरों की मदद से भारतीय सेना न सिर्फ पश्चिमी सीमा पर दुश्मनों के परखच्चे उड़ाने में सफल होगी, बल्कि वर्मा की सीमा में घुसकर किए काम्बैट ऑपरेशन की तरह वो और भी ऑपरेशन करने में सक्षम होगी.

(न्यूज 18 से साभार)

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