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अलवर लिंचिग: गोरक्षकों और पुलिस को रकबर के आने का पहले से पता था!

घटना के दो प्रत्यक्षदर्शियों ने जिस तरीके का विवरण दिया है, उससे लगता है कि गौरक्षकों को रकबर के आने का पहले से पता था

Rangoli Agrawal Updated On: Aug 09, 2018 01:31 PM IST

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अलवर लिंचिग: गोरक्षकों और पुलिस को रकबर के आने का पहले से पता था!

शनिवार की तड़के सुबह रकबर खान ने अपनी आखिरी सांसें लीं. अप्रैल 2017 से अब तक रकबर खान को मिलाकर 7 लोग राजस्थान में भीड़ की हिंसा का शिकार हो चुके हैं. ताजा मामले में राजस्थान के अलवर जिले में रकबर की कथित रुप से भीड़ ने शुक्रवार की रात को पिटाई कर दी थी. भीड़ को संदेह था कि रकबर गो-तस्करी में शामिल रहता है.

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी नवल किशोर शर्मा का कहना है कि रकबर की पिटाई के बाद रामगढ़ पुलिस के साथ वो सबसे पहले पास के गोशाला में गाय को पहुंचाने गए और उसके बाद रकबर को नजदीक के चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया. शर्मा का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्हें लगा कि रकबर की हालत ज्यादा गंभीर नहीं है.

शर्मा का कहना है कि, 'पुलिस थाने में रकबर से लगभग एक घंटे तक लागातार पूछताछ हुई और वहां पर भी उसको मारा गया. थाने में मौजूद एक सब इंस्पेक्टर ने मुझसे कहा कि वो गोशाला तक उनके साथ चले और गायों को वहां तक छोड़ने में उनकी मदद करें. उस समय तक रकबर बिल्कुल ठीक था और वो हमलोगों के साथ सामान्य रूप से बातचीत कर रहा था.' शर्मा विश्व हिंदू परिषद से जुड़े नेता हैं. शर्मा का दावा है कि थाने में रकबर ने पूछताछ में स्वीकार किया था वो कि गायों की तस्करी में शामिल रहा है.

गोशाला पुलिस स्टेशन से 9 किलोमीटर दूर है

शर्मा का कहना है कि उसके बाद एक टैंपो को किराए पर लिया गया और गायों को उनपर रखकर गोशाला पहुंचाया गया. इस दौरान वो लोग टैंपो के पीछे-पीछे चल रहे थे. शर्मा के कहना है कि 'गोशाला पुलिस थाने से लगभग 9 किलोमीटर दूर था ऐसे में हमें केवल एक तरफ से जाने में आधे घंटे का वक्त लग गया. लगभग एक घंटे के बाद हम पुलिस स्टेशन वापस पहुंचे और उसके बाद रकबर को अस्पताल पहुंचाया गया जहां पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अस्पताल थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर है.'

शर्मा के अनुसार रकबर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि शरीर के अंदर कई जगहों पर फ्रैक्चर था जिसकी वजह से उसके शरीर में आंतरिक रक्त स्राव काफी ज्यादा हुआ था. हालांकि रकबर के शरीर के बाहरी हिस्से पर खरोंच तक नहीं थी. इसका मतलब साफ है कि रकबर को तत्काल मेडिकल अटेंशन की जरूरत थी.

इधर रकबर के पड़ोसी शेखावत खान का दावा दूसरा है. शेखावत का कहना है कि 'मैंने रकबर को दफनाने से पहले उसके शरीर को धोया था और उसके शरीर का शायद ही कोई अंग होगा जहां से खून नही बह रहा था. उसका पैर चार जगहों से टूटा पड़ा था और कुल मिलाकर उसकी आठ जगहों पर हड्डियां टूटी हुई थीं. यहां तक कि उसके रिब्स भी टूटे हुए थे.'

राजस्थान इन दिनों लिचिंग को लेकर बदनाम हो गया है. रकबर का मामला सातवां है. राजस्थान में मॉब लिंचिंग की पहली घटना अप्रैल 2017 में हुई थी जब अलवर के ही एक डेयरी व्यवसायी पहलू खान की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. पहलू पर भी कैटल स्मगलिंग का आरोप लगाया गया था.

अलवर की ताजी घटना में रकबर के साथ असलम खान भी मौजूद था लेकिन वो उस रात अपनी जान बचाकर भागने में कामयाब रहा. असलम का कहना है कि उसने और रकबर ने गायों को राजस्थान के खानपुर गांव से अपने हरियाणा स्थित घर लाने का फैसला किया था. दिन के ट्रैफिक की वजह से गायों को लाने में समस्या होती इसलिए गायों को रात में ले जाने का फैसला किया गया था.

असलम का कहना है कि उन्होंने प्रति गाय के लिए 30 हजार रुपए चुकाए थे. उनकी मंशा थी कि वो अपने घर के बच्चों को इन गायों का दूध दही खिला पिला सकें. रकबर अपने घर का इकलौता कमाने वाला था और उसके सात बच्चे हैं. असलम का कहना है कि उसे नहीं मालूम कि रकबर को गांववालों ने मारा है. वो इससे डर गया था और अपनी जान बचाने के लिए वो वहां से भाग गया था.

घटना के दो घटनाक्रम

इस घटना का दो प्रत्यक्षदर्शियों ने अलग-अलग तरीके से विवरण दिया है. ऐसे में हमारे पास अलवर मामले के दो घटनाक्रम हैं जिन्हें हम सिलसिलेवार तरीके से सामने रख रहे हैं

टाइमलाइन 1: नवल किशोर शर्मा (प्रत्यक्षदर्शी)

12.15 रात: शर्मा के फोन की घंटी बजी, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया.

12.25 रात: उसके भतीजे ने उसको उठाया. इसके बाद उसने गांववालों से बात की. गांववाले पुलिस की मदद चाह रहे थे क्योंकि गायें उनकी खेतों में घुस गई थीं.

12.41 रात: उसने पुलिस को फोन किया

1.15 रात: शर्मा और पुलिस घटनास्थल पर पहुंचे जहां उन्होंने देखा कि रकबर कीचड़ में पड़ा हुआ था.

1.45 रात: पुलिस ने रकबर को साफ किया और उसे साथ में लेकर पुलिस थाने की ओर लौटने लगे.

1.55 रात: रास्ते में वो लोग एक चाय की दुकान पर रुके

2.10 रात: वो लोग थाने पहुंचे. जहां पर पुलिसकर्मियों ने रकबर से पूछताछ की और पूछताछ के दौरान उसके साथ मारपीट भी की.

3 रात: उन्होंने गोशाला चलने का फैसला लिया.

3.26 रात: गोशाला पहुंचे और वहां पर उन्होंने गायों को छोड़ दिया.

4 बजे सुबह: वापस पुलिस स्टेशन पहुंचे.

4.05 सुबह: वो लोग रकबर को लेकर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुंचे जहां रकबर को मृत घोषित कर दिया गया.

टाइमलाइन 2: असलम खान (विक्टिम का सहयोगी)

11 रात: असलम और रकबर खानपुर से चले.

1.20 रात: लालावंडी गांव पहुंचे जो कि उनके रास्ते में था.

1.30 रात: उन्होंने फायरिंग की आवाज सुनी और कुछ गांववालों को अपनी तरफ आता देखा.

1.35 रात: असलम झाड़ियों के पीछे छिप गया और रकबर गायों के साथ खेतों की ओर भाग चला.

2 रात: पुलिस के जाने के बाद असलम झाड़ियों से निकला.

5 सुबह: अपने गांव पहुंचा जिसका रात में वो रास्ता भूल गया था.

दोनों घटनाक्रमों में विरोधाभास रात के 1.30 बजे पर है. असलम के कहे अनुसार रकबर गायों के साथ खेतों में रात 1.35 पर घुस गया था जबकि शर्मा के मुताबिक गायें रात 12.25 पर ही खेतों में घुस चुकी थीं. शर्मा के मुताबिक उसे तो फोन मध्य रात्रि 12.15 ही आ चुका था जिसे वो नहीं उठा पाया था. शर्मा के मुताबिक वो रात में सवा एक बजे पुलिस के साथ घटनास्थल तक पहुंच भी चुका था. जहां उन्हें खेतों में कीचड़ में पड़ा रकबर मिला था. क्या उनके लालावंडी गांव पहुंचने से पहले से ही वो जानता था कि रकबर और असलम गायों की तस्करी करते हैं?

शेखावत खान का कहना है कि गायों को लाना ले जाना एक सामान्य और अनौपचारिक व्यवस्था है जिसमें दस्तावेजी लेन-देन न के बराबर होता है. शेखावत खान के मुताबिक, '2014 में इसी तरह से रकबर कहीं से गायों को ला रहा था तब उस पर गायों की तस्करी का आरोप लगा था. हालांकि उस समय उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी और केवल एक जांच बैठायी गयी थी.'

इस मामलों को लेकर रामगढ़ पुलिस ने सोमवार को किसी भी तरफ टिप्पणी नहीं की. हालांकि उनकी तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी है जिसमें बताया गया है कि इस मामले को देखने के लिए एक कमिटी बनाई गयी है राजस्थान के डीजीपी ओपी गल्होत्रा ने एक जांच कमिटी गठन करने का आदेश जारी किया है जिसका काम रकबर की मौत से जुड़े कारणों का पता लगाना होगा.

इस कमिटी में राजस्थान के स्पेशल डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) एडीजी (सीआईडी-सीबी) पी के सिंह, जयपुर रेंज के आईजी हेमंत प्रियदर्शी और जयपुर के सीआईडी सीबी महेंद्र चौधरी रहेंगे. महेंद्र सिंह चौधरी गायों पर नजर रखने वाली नोडल एजेंसी से भी जुड़े हुए हैं. प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 'कमिटी को निर्देश दिया गया है कि वो इस मामले की विस्तार से जांच करे और ये पता लगाने की कोशिश करे कि विक्टिम को अस्पताल ले जाने में इतनी देरी क्यों हुई.'

पुलिस इस मामले में तीन लोगों को पकड़ चुकी है जिनपर भीड़ का हिस्सा बनकर रकबर की पिटाई करने का आरोप लगा है. इसके अलावा, कई रिपोर्टों के मुताबिक, रामगढ़ पुलिस स्टेशन के एएसआई मोहन सिंह को निलंबित कर दिया गया है. मोहन सिंह ही घटना वाले दिन थाने में तैनात थे.

केंद्र सरकार ने भी इस मामले पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. पीटीआई के मुताबिक गृह मंत्रालय ने राजस्थान सरकार को इस मामले की जानकारी देने और इस मामले में जितनी जल्दी हो सके कार्रवाई करने का आदेश दिया है. लोकसभा में भी इस मामले को विपक्ष के द्वारा उठाया गया है.

(विशाखा अग्निहोत्री से इनपुट के साथ)

(लेखिका जयपुर बेस्ड फ्रीलांस राइटर और जमीनी स्तर के संवाददाताओं के अखिल भारतीय नेटवर्क 101Reporters.com की सदस्य हैं.)

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