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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CBI के दूसरे 'नागेश्वर राव' बने आलोक वर्मा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये बहस उठ रही है कि क्या ये फैसला आलोक वर्मा की जीत और सरकार की हार है?

Updated On: Jan 08, 2019 12:05 PM IST

FP Staff

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CBI के दूसरे 'नागेश्वर राव' बने आलोक वर्मा

केंद्र सरकार की ओर से सेंट्रल ब्यूरो इन्वेस्टीगेशन के डायरेक्टर आलोक वर्मा को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेजने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने कहा है कि केंद्र को उन्हें छुट्टी पर नहीं भेजना चाहिए था. कोर्ट ने केंद्र को आदेश को रद्द कर दिया है और वापस वर्मा को उनकी ड्यूटी पर बहाल कर दिया है.

कोर्ट ने मंगलवार को ये फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने से पहले चयन समिति के साथ विचार-विमर्श नहीं किया, जो कि गलत है. सरकार को पहले समिति के साथ विचार करना चाहिए. कोर्ट ने ये तक कहा कि सरकार को वर्मा को छुट्टी पर नहीं भेजना चाहिए था.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये बहस उठ रही है कि क्या ये फैसला आलोक वर्मा की जीत और सरकार की हार है? हालांकि, स्पष्टीकरण दिए जा रहे हैं कि ये न तो आलोक वर्मा की हार है न ही सरकार की जीत क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला संवैधानिक संस्था सीबीआई के पक्ष में सुनाया है.

अगर कोर्ट सरकार के फैसले को सही साबित करती तो, इससे एक संवैधानिक संस्था के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की मान्यता कम होती और लोगों के सामने एक गलत उदाहरण जाएगा और सरकार आगे के वक्त में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का उदाहरण लेते हुए कई दूसरे फैसले भी ले सकती थी.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को उनके पद पर तो बहाल कर दिया है लेकिन उन्हें किसी तरह की ताकत नहीं दी गई है. वर्मा अपनी ड्यूटी पर तो होंगे लेकिन कोई भी नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे. वो कोई जांच भी शुरू नहीं करवा पाएंगे, न ही कोई तबादला या नियुक्ति ही करवा पाएंगे.

कोर्ट के फैसले को देखें तो अब आलोक वर्मा सीबीआई के दूसरे नागेश्वर राव बन गए हैं. नागेश्वर राव को आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को हटाने के बाद सरकार ने एजेंसी का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया था. लेकिन उन्हें किसी तरह का पॉवर नहीं दिया गया था. अब आलोक वर्मा की हालत भी वैसी ही होगी. आलोक वर्मा की भी बहाली तो हो रही है लेकिन उनके पास किसी भी तरह की ताकत नहीं होगी. वो देश की पॉवरफुल एजेंसी के पॉवरलेस डायरेक्टर होंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि डीपीसीई एक्ट के तहत बनी उच्चस्तरीय समिति एक हफ्ते के अंदर आलोक वर्मा के केस को देखेगी और एक्शन लेगी. बता दें कि इस चयन समिति में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और लीडर ऑफ अपोजिशन होते हैं.

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