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उन्नाव कांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश- विधायक को हिरासत में नहीं, गिरफ्तार करना चाहिए

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सीबीआई 20 जून को दर्ज हुई एफआईआर व अन्य प्राथमिक रिपोर्ट की भी विवेचना करे. हाई कोर्ट ने जमानत पर छूटे आरोपियों की जमानत निरस्त करने का आदेश दिया है

FP Staff Updated On: Apr 13, 2018 06:27 PM IST

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उन्नाव कांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश- विधायक को हिरासत में नहीं, गिरफ्तार करना चाहिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के पिता की मौत मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सीबीआई से 2 मई को 10 बजे सीबीआई से प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब की है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कुलदीप व अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार करने का सीबीआई को निर्देश दिया है.

उन्नाव रेप केस और पीड़िता के पिता की मौत मामले को लेकर दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस सुनीत कुमार की खंडपीठ ने यह दिया आदेश. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सीबीआई 20 जून को दर्ज हुई एफआईआर व अन्य प्राथमिक रिपोर्ट की भी विवेचना करे. हाई कोर्ट ने जमानत पर छूटे आरोपियों की जमानत निरस्त करने का आदेश दिया है. बता दें उन्नाव केस को लेकर दाखिल एक याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था.

चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस सुनीत कुमार की खंडपीठ ने यह भी आदेश दिया कि सीबीआई द्वारा विवेचना अपने हाथ में लेने तक एसआईटी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी करे. बेंच ने पूछा सीबीआई ने अभी तक आरोपी को गिरफ्तार किया की नहीं. इस पर सरकार के महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि सीबीआई ने कुलदीप को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है. जिस पर कोर्ट ने नाखुशी जाहिर करते हुए कहा इससे उद्देश्य पूरा नहीं होता. विवेचना अधिकारी चाहे सीबीआई का हो या एसआईटी आरोपियों की तत्काल गिरफ़्तारी की जाए.

इससे पहले उन्नाव रेप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि क्या वह हर मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सबूत का इंतजार करती है. इस मामले में हाईकोर्ट अब शुक्रवार दोपहर दो बजे फैसला सुनाएगा.

इस बहुचर्चित मामले में बहस के दौरान चीफ जस्टिस डीबी भोंसले ने राज्य सरकार के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यूपी की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. पीड़िता छह महीने तक इंसाफ की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उसके पिता की मौत के बाद पुलिस की नींद टूटी.

इस मामले की सुनवाई में राज्य सरकार के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि रेप मामले में विधायक के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. पर्याप्त सबूत मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार के इस जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया क्या पुलिस हर मामले में इसी तरह पहले साक्ष्य जुटाती है. चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता से पूछा कि आप सरकार की तरफ से हैं या आरोपी की तरफ से?

इसके बाद न्यायमित्र जीएस चतुर्वेदी कोर्ट ने भी अपना पक्ष रखा. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया. इससे पहले सुबह इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा कि मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी अभी तक क्यों नहीं हुई है. हाईकोर्ट ने सरकार के महाधिवक्ता को दो बजे तक की मोहलत दी और कहा कि बताएं विधायक को गिरफ्तार करेंगे या नहीं.

(साभार: न्यूज़18)

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