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देश के हर गांव तक पहुंची बिजली, सफल रही दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

एनडीए सरकार की डीडीयूजीजेवाई योजना जब शुरू की गई, तब देश के कुल 18,452 गांव बिजली से वंचित थे

Updated On: Apr 29, 2018 02:50 PM IST

FP Staff

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देश के हर गांव तक पहुंची बिजली, सफल रही दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना
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अब देश के हर गांव बिजली से जुड़ गए हैं. अब तक इससे वंचित रहा मणिपुर में सेनापति जिले का लिसांग गांव भी शनिवार को जुड़ गया. इसका श्रेय दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) को जाता है जिसने देश के कोने-कोने को रोशन करने में बड़ी भूमिका निभाई.

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना लागू कराने का जिम्मा सरकार की ओर से संचालित ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) को मिला था. बिजलीकरण में नोडल एजेंसी के तौर पर कार्यरत आरईसी ने शनिवार शाम 5.30 बजे अपना अंतिम लक्ष्य भी पूरा कर लिया.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल 597,464 गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है. एनडीए सरकार की डीडीयूजीजेवाई योजना जब शुरू की गई, तब देश के कुल 18,452 गांव बिजली से वंचित थे. 75,893 करोड़ की यह योजना चालू होते वक्त यह भी पता चला कि अतिरिक्त 1275 गांव भी बिना बिजली के हैं. इन गांवों में 28 अप्रैल तक नेशनल ग्रिड या ऑफ ग्रिड से बिजली पहुंचा दी गई. 1236 गांव ऐसे भी हैं जहां कोई रहता नहीं है और 35 गांवों को चारागाह रिजर्व के रूप में घोषित किया गया है.

आरईसी के चेयरमैन और कार्यकारी निदेशक पीवी रमेश ने मिंट को बताया, 'वाकई हमलोग काफी खुश हैं. देश के प्रधानमंत्री और सरकार ने जो हमें जिम्मा दिया उसे हमने पूरा किया. हमने अपना काम और वादा निभा दिया है.'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लाल किले की प्राचीर से यह वादा किया था कि अगले 1000 दिन में देश के हरेक गांवों को बिजली से जोड़ दिया जाएगा. आरईसी ने उसी डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए अपना काम किया.

इसी के साथ देश में पर कैपिटा बिजली खफत अब 1200 किलोवॉट पर पहुंच गई जो पहले दुनिया में सबसे कम थी. देश के हर घर को 24 घंटे बिजली सप्लाई और किसानों के लिए भी पर्याप्त बिजली की मांग को देखते हुए डीडीयूजीजेवाई फीडर को अलग करने, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क सुधारने, कनेक्शन से मीटर जोड़ने, गांवों में बिजलीकरण और माइक्रो-ऑफ ग्रिड नेटवर्क तैयार करने में लगा है.

किसी गांव को बिजली से जुड़ा घोषित करने के लिए वहां के लगभग 10 प्रतिशत घर, स्कूल, पंचायत, स्वास्थ्य केंद्र, डिसपेंसरी और सामुदायिक भवनों तक बिजली की सप्लाई पहुंचाना जरूरी है.

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