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सेक्युलर पॉलिटिक्स के विरोध में जाकिर मूसा ने की अलगाववादी नेता की हत्या

दो हफ्ते पहले दो अज्ञात बंदूकधारियों ने एक पूर्व उग्रवादी कमांडर और अलगाववादी नेता मोहम्मद युसूफ रेदर को गोली मार दी थी

Ishfaq Naseem Updated On: Feb 21, 2018 12:38 PM IST

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सेक्युलर पॉलिटिक्स के विरोध में जाकिर मूसा ने की अलगाववादी नेता की हत्या

दो हफ्ते पहले दो अज्ञात बंदूकधारियों ने एक पूर्व उग्रवादी कमांडर और अलगाववादी नेता मोहम्मद युसूफ रेदर को गोली मार दी. युसूफ रेदर हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी से जुड़ा हुआ था. रेदर को गोली एक सवारी गाड़ी के भीतर मारी गई थी. इस घटना के बाद पुलिस अलकायदा कश्मीर के अध्यक्ष जाकिर मूसा के एक दावे की जांच कर रही है. मूसा ने दावा किया था कि युसूफ को गोली अलकायदा कश्मीर के लोगों ने मारी ताकि हुर्रियत को खबरदार किया जा सके कि वह धर्मनिरपेक्षता की राह ना अपनाए.

मूसा अलकायदा से जुड़े गजवतुल हिंद का सरगना है. अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद मूसा ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान उग्रवादियों की पीठ में छूरा भोंक रहा है. आरोप मढ़ने के कुछ माह बाद उसका एक नया ऑडियो सामने आया है. अपने पिछले ऑडियो संदेश में उसने कहा था कि कश्मीर में विदेशी उग्रवादी जिस वक्त लड़ाई लड़ रहे थे उस घड़ी पाकिस्तान कश्मीरी उग्रवादियों की हत्या करवा रहा था और उसने प्रशिक्षण शिविर तक बंद करवा दिए.

रेदर की हत्या के विरोध में शनिवार के रोज कश्मीर बंद रहा. वह बीते 14 सालों से गिलानी से जुड़ा हुआ था. युसूफ रेदर बड़गाम जिले में बीरवाह से अपने घर के लिए सफर पर निकला था कि दो अज्ञात हथियारबंद व्यक्तियों ने उसे गोली मार दी. सफर के दौरान युसूफ रेदर जिस गाड़ी में बैठा था उसकी पिछले सीट पर दो पिस्टलधारी शख्स मौजूद थे. उन्होंने युसूफ के सिर में गोली मारी और मौका-ए-वारदात से फरार हो गए.

'हुर्रियत के बेईमान नेता समझ नहीं रहे'

कश्मीर में बंद की घटना के एक दिन बाद जाकिर मूसा ने ऑडियो जारी किया. ऑडियो में वह कह रहा है कि मैंने हुर्रियत के एक नेता की हत्या की है. अपने संदेश में उसने कहा है कि कश्मीर की लड़ाई राजनीतिक नहीं है, यह लड़ाई इस्लाम की हुकूमत कायम करने के लिए लड़ी जा रही है. 'लेकिन हुर्रियत के ये बेईमान नेता इस बात को समझ नहीं रहे. अगर इनको अपनी सियासत करनी है तो फिर हमारे रास्ते में टांग अड़ाना छोड़ दें वर्ना हम उनका सिर काटकर लाल चौक पर लटका देंगे. लेकिन हुर्रियत के ये बेईमान नेता समझ नहीं रहे और इसी कारण हमें युसूफ रेदर को मारना पड़ा.'

उसने यह भी कहा है कि, 'कश्मीर में हमारी लड़ाई इस्लाम का झंडा बुलंद करने के लिए है और हम शरिया की हुकूमत कायम करेंगे. मेरी अपील उन लोगों से है जो मजहब को लागू करना चाहते हैं कि इस पर पहले खुद अमल करना होता है. हम अल्लाह के अजीज हैं और हमारा रिश्ता एक सिर्फ उसी से है सो हम किसी और पर ईमान नहीं लाएंगे.'

सेंट्रल कश्मीर रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुलाम हुसैन भट का कहना है कि युसूफ रेदर की हत्या के बाद एक मामला दर्ज कर लिया गया है और ऑडियो की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि 'हम लोग मृतक के कॉल रिकार्डस् को भी खंगाल रहे हैं और उस ड्राइवर से भी पूछताछ की जा रही है जिसकी गाड़ी में सवार होकर रेदर अपने घर जा रहा था.'

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गाड़ी की पिछली सीट पर दो पिस्टलधारी शख्स बैठे थे और 13 फरवरी के दिन शाम के 4 बजकर 40 मिनट पर दोनों ने रेदर पर गोली चला दी. रेदर लहूलुहान होकर गिर पड़ा और दोनों भाग निकले. बाद में लोगों ने पुलिस को इत्तिला की और पुलिस ने मृत देह परिवारजन को सौंपी. इसके बाद मामला दर्ज किया गया.

सरकारी सुरक्षा एजेंसियों पर फोड़ा ठीकरा

अलगाववादी हुर्रियत (एम) का एक साझा मंच ज्वाइंट रेसिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) है. जेआरएल के दो सदस्य, हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुक तथा जेकेएलएफ के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन तथा गिलानी ने हत्या का जिम्मेवार सरकारी एजेंसियों को ठहराया है. गिलानी ने अपने बयान में कहा है कि, 'कातिलों को अपने रहनुमाओं का पूरा समर्थन हासिल है और एक ऐसी जगह जहां सात लाख की तादाद में सुरक्षाबलों का कब्जा है, कातिल हथियार लेकर छुट्टा घूम रहे हैं. ऐसी जगह रेदर जैसे लोगों के लिए कभी सुरक्षित नहीं हो सकती.'

हुर्रियत (जी) के प्रवक्ता गुलाम अहमद गुलजार का कहना है कि अलगाववादी धड़े तहरीक-ए-वहदती इस्लामी के महासचिव के रुप में रेदर गिलानी की अगुवाई वाली जमात से सन् 2004 से जुड़ा हुआ था. सन् 1990 के दशक के शुरुआती सालों में वह हिज्बुल मोमनीन नाम के उग्रवादी धड़े का चीफ कमांडर था. हिज्बुल मोमनीन अब वजूद में नहीं है. इसके बाद वह अलगाववादी जमात का हिस्सा बना. प्रवक्ता का कहना है कि युसूफ रेदर हुर्रियत (जी) का अहम नेता और इसकी कार्यकारिणी का सदस्य था.

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कश्मीर में सुरक्षा के हालात और बिगड़े

अलगाववादी नेता की हत्या से कश्मीर में सुरक्षा के हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं क्योंकि हुर्रियत हत्या का दोष भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मत्थे मढ़ रही है. गुलजार का कहना है कि सरकार सुरक्षा एजेंसियों की मदद से अलगाववादियों की हत्या करवा रही है ताकि कश्मीर की आजादी की लड़ाई की राह रोकी जा सके.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गुलजार पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में सेक्शन ऑफिसर के रुप में काम कर रहा था. हालांकि ऐसे में हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष के साथ उसके रिश्ते कायम थे. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गुलजार बडगाम स्थित अपने निवास स्थान से कुछ किलोमीटर दूर रहते हुए काम कर रहा था.

बहरहाल, हत्या की जिम्मेवारी मूसा ने ली है और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि रेदर को उसके भारत विरोधी प्रदर्शनों के कारण 2008 तथा 2010 में हिरासत में लिया गया था. ये विरोध-प्रदर्शन अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन देने तथा तीन आम नागरिकों की ‘फर्जी मुठभेड़’ मे हत्या के खिलाफ भड़के थे.

गुलजार का कहना है कि नये ऑडियो में भारतीय एजेंसियों के हाथों छेड़छाड़ की गई हो सकती है ताकि कश्मीरी समाज में दरार डाली जा सके.

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