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अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान ने किया 'बीफ बैन' का समर्थन

एक बार में तीन तलाक का तरीका आज के समय में अप्रासंगिक ही नहीं, खुद पवित्र कुरान की भावनाओं के विपरीत भी है

Updated On: Apr 03, 2017 07:26 PM IST

FP Staff

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अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान ने किया 'बीफ बैन' का समर्थन

सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के वंशज और वंशानुगत सज्जादानशीन और दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि बीफ को लेकर देश में दो समुदायों के बीच पनप रहे वैमनस्य पर विराम देने के लिए सरकार को देश में गोवंश की सभी प्रजातियों के वध और इनके मांस की बिक्री पर व्यापक प्रतिबंध कर देना चाहिए.

साथ ही मुसलमान को भी इनके वध से खुद को दूर रहकर इसके सेवन को त्यागने की पहल करनी चााहिए. साथ ही मुस्लिम धर्मगुरू का यह भी मत है कि एक समय मे तीन तलाक के उच्चारण को शरीयत ने नापसंद किया है. मुसलमान इस प्रक्रिया में शरीयत की नाफरमानी से बचें.

गंगा-जमुनी तहजीब को ठेस?

दरगाह दीवान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के 805 वें सालाना उर्स के समापन की पूर्व संध्या पर खानकाह शरीफ में पंरपरागत रूप से आयोजित होने वाली महफिल के बाद वार्षिक सभा में देश के विभिन्न दरगाहों के सज्जादगान, सूफियों और धर्म प्रमुखों को संबोधित करते हुए कहा कि गोवंश की प्रजातियों के मांस को सैकड़ों साल से स्थापित गंगा-जमुनी तहजीब को ठेस पहुंची है.

उन्होंने कहा कि इस विवाद की वजह से हिंदू और मुसलमानों के मध्य मोहब्बत और भाईचारे का जो माहौल परंपरागत रूप से स्थापित था उसे चोट पंहुची है.

उन्होंने कहा कि उसी सद्भावना की विरासत को फिर से स्थापित करने की जरूरत है. इसके लिए मुसलमानों को विवाद की जड़ को ही खत्म करने की पहल करते हुऐ गोवंश (बीफ) के मांस के सेवन को त्याग देना चाहिए.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उर्स के मौके पर दरगाह के लिए चादर भेजी थी (तस्वीर: पीटीआई)

गोवध पर लगे पाबंदी

उन्होंने सरकार से अपील की कि मुल्क के इत्तेहाद और दो प्रमुख समुदायों के बीच टकराव और वैमनस्य का कारण बन रहे बीफ और गोवंश की सभी प्रजातियों के वध और इनके मांस की बिक्री पर व्यापक प्रतिबंधित कर देना चाहिए. जिससे इस मुल्की मजहबी रवादारी, मोहब्बत और सद्भावना फिर से उसी तरह कायम हो सके जैसी सैंकड़ों सालों से रही है.

उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती ने इस देश की संस्कृति को इस्लाम के नियमों साथ अपना कर मुल्क में अमन, शांति और मानव सेवा के लिए जीवन समर्पित किया.

805 उर्स का मौका 

उसी तहजीब को बचाने के लिए गरीब नवाज के 805 उर्स के मौके पर मैं और मेरा परिवार, बीफ के सेवन की त्याग की घोषणा करता हूं.

उन्होंने यह भी कहा कि मैं हिंदुस्तान के मुसलमानों से यह अपील करता हूं कि देश में सद्भावना की फिर से स्थापना करने के लिए वह भी इसका त्यागकर मिसाल पेश करें.

दरगाह दीवान ने बीफ ले जाने पर गुजरात सरकार द्वारा उम्रकैद के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार को पूरे देश में गोवंश की सभी प्रजातियों के संरक्षण के लिए इनकी हत्या पर पाबंदी लगाकर गो हत्या करने वालों को उम्रकैद की सजा का प्रावधान करना चाहिए.

राष्ट्रीय पशु घोषित हो गाय

उन्होंने यह भी कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु की घोषित कर देना चाहिए. अगर उद्देश्य सिर्फ गाय और इसके वंश को बचाना है क्योंकि वो हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है तो ये सिर्फ सरकार का नहीं बल्कि हर धर्म को मानने वाले का कर्तव्य है कि वो अपने धर्म के बताऐ रास्ते पर चलकर इनकी रक्षा करे.

गुजरात विधानसभा में पशु सरंक्षण (संशोधन) अधिनियम 2011 को पास किया गया है इस कानून के मुताबिक, किसी भी आदमी को बीफ ले जाने पर उम्रकैद की सजा होगी.

उन्होंने नियम में समानता लाने की बात करते हुए कहा कि सिर्फ एक राज्य में नहीं बल्कि पूरे देश में ही जानवरों की हत्या पर रोक लगा देनी चाहिए. इस विरोध को खत्म किया जाए तकि वैमनस्य नहीं फैले.

dargah of sufi saint moinuddin chisti

मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह

क्या है अपील?

उन्होंने कहा कि मैं यह अपील करना चाहता हूं कि किसी भी तरह का जानवर नहीं काटा जाना चाहिए. देश के सभी राज्यों में तो ऐसा होना ही चाहिए क्योंकि हिंदुस्तान के कई राज्यों में गायों को कानून के मुताबिक काटा जाता है जो सरासर गलत है.

दरगाह दीवान ने इस्लामी शरीयत के हवाले से कहा कि इस्लाम में शादी दो व्यक्तियों के बीच एक सामाजिक करार माना गया है.

तीन तलाक कुरान की भावनाओं के खिलाफ

इस करार की साफ-साफ शर्तें निकाहनामा में दर्ज होनी चाहिए. कुरान में तलाक को अति अवांछनीय बताया गया है.

इस संवेदनशील मसले पर उनका तर्क है कि एक बार में तीन तलाक का तरीका आज के समय में अप्रासंगिक ही नहीं, खुद पवित्र कुरान की भावनाओं के विपरीत भी है. क्षणिक भावावेश से बचने के लिए तीन तलाक के बीच समय का थोड़ा-थोड़ा अंतराल जरूर होना चाहिए.

यह भी देखना होगा कि जब निकाह लड़के और लड़की दोनों की रजामंदी से होता है, तो तलाक मामले में कम से कम स्त्री के साथ विस्तृत संवाद भी निश्चित तौर पर शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि निकाह जब दोनों के परिवारों की उपस्थिति में होता है तो तलाक एकांत में क्यों?

तलाक नहीं बातचीत से सुलझाएं मुद्दे 

उन्होने कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद ने कहा था कि अल्लाह को तलाक सख्त नापसंद है. कुरान की आयतों में साफ दर्शाया गया है कि अगर तलाक होना ही हो तो उसका तरीका हमेशा न्यायिक और शरिया के अनुसार हो.

कुरान की आयतों में कहा गया है कि अगर पति-पत्नी में क्लेश हो तो उसे बातचीत के द्वारा सुलझाने की कोशिश करें. जरूरत पड़ने पर समाधान के लिए दोनों परिवारों से एक-एक मध्यस्थ भी नियुक्त करें. समाधान की यह कोशिश कम से कम 90 दिनों तक होनी चाहिए.

दरगाह दीवान ने कहा कि कुरान ने समाज में स्त्रियों की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत सारे प्रावधान किए हैं. तलाक के मामले में भी इतनी बंदिशें लगाईं गई हैं कि अपनी बीवी को तलाक देने के पहले मर्दों को सौ बार सोचना पड़े.

तीन तलाक

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की फेसबुक वाल से

एक बार में तीन तलाक करने की परंपरा जायज नहीं 

कुरान में तलाक को न करने लायक काम बताते हुए इसकी प्रक्रिया को कठिन बनाया गया है. जिसमें रिश्ते को बचाने की आखिरी दम तक कोशिश, पति-पत्नी के बीच संवाद, दोनों के परिवारों के बीच बातचीत और सुलह की कोशिशें और तलाक की इस पूरी प्रक्रिया को एक समय-सीमा में बांधना शामिल हैं.

उन्होने कहा कि इस विषय पर कुरान के शुरा में एक पूरे अध्याय का जिक्र है जिसे अल तलाक कहते हैं जिसमें 12 छंद हैं. इन छंदों में तलाक के लिए कुरान एक प्रक्रिया पालन करने की बात कहता है.

कुरान कहता है कि तीनों तलाक कहने के लिए एक एक महीने का वक्त लिया जाना चाहिए. कुरान एक बार में तीन तलाक कहने की परंपरा को जायज नहीं मानता है.

मुस्लिम महिलाओं को कुरान और संविधान सम्मत अधिकार मिले 

आज हर देशवासी की तरह आम मुसलमान भी शिक्षा, रोजगार, तरक्की और खुशहाली चाहता है. मुस्लिम लड़कियां पढ़ना और आगे बढ़ना चाहती हैं. मुस्लिम महिलाएं भी सिर उठाकर स्वाभिमान के साथ अपने घर और समाज में जीना चाहती हैं.

वे अपने कुरान और संविधान सम्मत दोनों ही अधिकार चाहती हैं. गैर शरिया तलाक प्रक्रिया महिलाओं के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली कुत है.

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