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आखिर क्यों बनाए गए अजित डोभाल एसपीजी के नए हेड

देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एक बार फिर से चर्चा में हैं. देश के स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप (एसपीजी) को कैबिनेट सचिव की जगह अब अजित डोभाल हेड करेंगे.

Updated On: Oct 09, 2018 05:53 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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आखिर क्यों बनाए गए अजित डोभाल एसपीजी के नए हेड

देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एक बार फिर से चर्चा में हैं. देश के स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप (एसपीजी) को कैबिनेट सचिव की जगह अब अजित डोभाल हेड करेंगे. पीएम मोदी ने नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप को एक बार फिर से नए सिरे से गठन करने का फैसला किया है. सरकार के इस फैसले के बाद अजित डोभाल देश के सबसे ताकतवर नौकरशाह बन गए हैं. इससे पहले एसपीजी की अध्यक्षता देश के कैबिनेट सेक्रेटरी किया करते थे. अभी तक कैबिनेट सचिव को देश का सबसे शक्तिशाली और वरिष्ठ नौकरशाह माना जाता था.

बता दें कि साल 1999 में करगिल युद्ध के बाद नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का गठन किया गया था. इस सिक्योरिटी काउंसिल में देश के आंतरिक, बाहरी और आर्थिक सुरक्षा मामलों को लेकर रणनीति बनाई जाती है. राष्ट्रीय सिक्योरिटी काउंसिल में अब से अजित डोभाल के अलावा तीनों सेनाओं के प्रमुख, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, कैबिनेट सचिव, आरबीआई के गवर्नर, गृह सचिव, विदेश सचिव, वित्त सचिव, रक्षा सचिव, डिफेंस प्रोडक्शन यूनिट के हेड, ऑटोमिक एनर्जी हेड, स्पेस डिपार्टमेंट, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव, रक्षा मंत्री के साइंटफिक एडवाइजर, कैबिनेट सेक्रेटरिएट के सेक्रेटरी और आईबी चीफ जैसे बड़े ब्यूरोक्रेट्स शामिल होंगे.

Ajit Doval

मोदी सरकार के इस कदम के बाद अजित डोभाल ही अब इस काउंसिल की बैठक बुलाएंगे. इस बैठक में लिए गए निर्णयों को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और राज्यों से कैबिनट सचिवों को सामंजस्य स्थापित करना पड़ेगा. केंद्र सरकार का कहना है कि इसमें कुछ नया नहीं है. यूपीए सरकार के कार्यकाल से ही ऐसी व्यवस्था चली आ रही है.

वहीं केंद्र सरकार के इस फैसले की आलोचना भी होने लगी है. सरकार के ही कुछ नौकरशाह मोदी सरकार के इस कदम को ठीक नहीं मान रहे हैं. इन नौकरशाहों का मानना है कि करगिल युद्द के दौरान इसे जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया था, सरकार के इस फैसले के बाद वह प्रभावित हो सकता है. वहीं कुछ नौकरशाह साल 2019 चुनाव से ठीक पहले इस पॉलिसी को लागू करने की नीति को सही नहीं मान रहे हैं.

देश के कई रिटायर्ड नौकरशाहों का मानना है कि एनएसए को देश में सबसे शक्तिशाली बनाना किसी भी नजरिए से सरकार का सही कदम नहीं है. सत्ता का एक ही जगह केंद्रित रहना लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ परंपरा नहीं है. इन नौकरशाहों का कहना है कि एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी का एसपीजी की अध्यक्षता करना आईएएस अधिकारियों को हजम नहीं होगा. ऐसे में सरकार के इस कदम के बाद एक बार फिर से आईएएस और आईपीएस एसोसिएशनों में लकीरें खिंच जाएंगी.

बता दें कि साल 1999 में एसपीजी के गठन के वक्त सरकार की तरफ से जो नोटिफिकेशन जारी किया गया था, उसमें कहा गया था कि कैबिनेट सेक्रेटरी इसकी अध्यक्षता करेंगे. अब मोदी सरकार ने बीते 11 सितंबर को नोटिफिकेशन और 8 अक्टूबर को जो गजट जारी किया है, उसके मुताबिक एनएसए को चेयरमैन घोषित किया गया है.

पहले एसपीजी में 16 सदस्य हुआ करते थे जो बढ़ कर अब 18 हो जाएंगे. योजना आयोग के उपाध्यक्ष और एनएसए को शामिल करने से इसकी संख्या 18 हो गई है. वहीं नई टीम ने काम करना भी शुरू कर दिया है. अजित डोभाल के नेतृत्व में नई टीम ने डिफेंस प्लानिंग कमेटी की घोषणा की है. यह टीम भविष्य में विदेशों से होने वाले रक्षा सौदों को लेकर भी एक रणनीति तैयार करेगी.

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मोदी सरकार में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के लिए जाने जाते हैं. पिछले महीने ही 2 प्लस 2 वार्ता में शामिल होने वह अमेरिका गए थे. इस बैठक के खत्म होने के बाद भी डोभाल एक सप्ताह तक वाशिंगटन में रुके थे, जहां वह ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी.

ऐसा माना जाता है कि ट्रंप प्रशासन में डोभाल को काफी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है. डोभाल ने विदेश विभाग के फॉगी बॉटम मुख्यालय में भी अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ से मिले थे. इसके अलावा वह अपने अमेरिकी समकक्ष जॉन बोल्टन से भी मिले थे. डोभाल ने अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों और थिंक टैंक समुदाय से भी लंबी मुलाकात की थी.

डोभाल ने अमेरिका में अपने बैठकों के दौरान अफगान-पाक क्षेत्र में द्विपक्षीय और सुरक्षा मुद्दों खासतौर पर चर्चा की थी. जानकारों का मानना है कि डोभाल की अमेरिका यात्रा भारत की सामरिक दृष्टि से काफी अहम साबित हुआ है. इस यात्रा के दौरान ही डोभाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे. डोभाल की यह यात्रा ट्रंप की भारत यात्रा की जमीन तैयार करने के लिए हुई थी.

AJIT DOVAL

पिछले महीने ही खबर आई थी कि डोभाल-ट्रंप मुलाकात के बाद ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत यात्रा का न्योता स्वीकार कर लिया है. ऐसा भी कहा जा रहा है कि 26 जनवरी 2019 को भारत के गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रंप को मुख्य अतिथि के रूप में भारत बुलाया जा रहा है.

कुलमिलाकर अजित डोभाल देश में ही नहीं देश से बाहर भी अपनी कार्यक्षमता के कारण पीएम मोदी को अपना मुरीद बना चुके हैं. बीते चार सालों में डोभाल ने कई मौकों पर मोदी सरकार में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं. डोकलाम विवाद हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक डोभाल की रणनीति काफी रंग लाई है.

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