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दिल्ली की फिजा जहरीली होनी शुरू, दिवाली के बाद हालत हो सकती है गंभीर

पिछले शनिवार को ही रावण दहन हुआ था लेकिन रावणों ने अपने पीछे छोड़ दिया है भारी जहर का गुब्बार

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Oct 03, 2017 04:26 PM IST

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दिल्ली की फिजा जहरीली होनी शुरू, दिवाली के बाद हालत हो सकती है गंभीर

दिल्ली-एनसीआर के लोगों को कुछ महीनों की राहत के बाद एक बार फिर से प्रदूषित वातावरण का डर सताने लगा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक 27 सितंबर के बाद दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में गिरावट आई है.

पिछले शनिवार को ही रावण दहन हुआ था, लेकिन रावणों ने अपने पीछे छोड़ दिया है भारी जहर का गुब्बार. अभी दीपावली पर होने वाली धूआंधार प्रदूषण का हमला होना बाकी है. दिवाली की धुआं से दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे देश की स्थिति और बिकराल हो सकती है.

अगर बात करें देश की राजधानी दिल्ली की तो यहां पर दिवाली को लेकर विशेष सतर्कता तो बरती जा रही है. इसके बावजूद पटाखों और रासायनिक तत्वों से दीयें जलाने से लेकर सजावटी समानों की खरीद शुरू हो गई है. दिवाली से पहले और बाद के कुछ दिनों तक लोग पटाखों का प्रयोग करना शुरू कर देते हैं.

इनसे उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को लेकर प्रशासन के अभी से ही हाथ-पांव फूल गए हैं. दूसरी तरफ सरकार और न्यायालय ने पटाखों पर किसी भी तरह का रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है.

Pollution In Delhi

सरकार की कोशिशें नाकाम

प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार द्वारा जारी कोशिशें भी दम तोड़ती नजर आ रही हैं. प्रदूषण को रोकने के लिए पर्यावरण विभाग ने कई तरह के नियम बना रखे हैं. ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगा रखे हैं, लेकिन, ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम भी संतोषजनक परिणाम नहीं दे पा रही है.

इस बीच देश की राजधानी दिल्ली में 6 अक्टूबर से 28 अक्टूबर के बीच अंडर 17 फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन होने वाला है. इस मौसम में दिल्ली का प्रदूषण स्तर अपने चरम पर रहता है. इसी दौरान पंजाब-हरियाणा में धान की कटाई का सीजन भी रहता है और इसी दौरान दिवाली का त्यौहार भी रहता है.

शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए फीफा आयोजकों ने दिल्ली में सिर्फ चार मैच ही कराने का फैसला किया है वह भी दिवाली से पहले. आयोजकों ने दिवाली से पहले इसलिए मैच कराने का फैसला किया है ताकि दिवाली के बाद होने वाले प्रदूषण से खिलाड़ियों को बचाया जा सके.

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कम से कम रहे इसके लिए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार से लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रित करने के निर्देश जारी किए हैं.

सीपीसीबी इस दिवाली में वायु और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए विशेष उपाय किए हैं. दिल्ली-एनसीआर में तीन-तीन शिफ्टों में हर घंटे निगरानी करने का निर्णय किया है.

सीपीसीबी का जागरूकता अभियान

सीपीसीबी ने लोगों में जागरूकता लाने के लिए अभियान चलाने का भी निर्णय किया है, जिसमें पटाखे न जलाने को लेकर लोगों से अपील की जाएगी. इसके लिए वीडियो और आकर्षक कार्टून के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा.

सीपीसीबी ने इसके साथ ही सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को एक अध्ययन रिपोर्ट भी भेजी है. इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य पर पटाखों के गंभीर असर का जिक्र किया गया है.

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार रावन दहन से करीब 20 प्रतिशत तक प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज हुई है. रावण दहन के बाद पीएम 10 की मात्रा 115 एमजी और पीएम 2.5 की मात्रा 70 एमजी तक हो गई है.

भारत में राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पीएम-2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि पीएम-10 के लिए यह स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए.

हम आपको बता दें कि एनवायरमेंट पोल्यूशन (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) अथॉरिटी ने सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) से मिलकर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए ग्रेड रिस्पांस एक्शन प्लान बनाया था.

दोनो अथॉरिटीज ने एक रिपोर्ट में बताया था कि दिल्ली-एनसीआर में तीन कारणों से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है. कंस्ट्रक्शन साइटों, खुले में कचरा जलाने और सड़कों पर वाहनों के धुआं और धूल उड़ने के कारण प्रदूषण फैल रहा है.

इसके अलावा अथॉरिटीज ने हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के बाद पराली जलाने के कारण भी प्रदूषण बढ़ने का कारण बताया था.

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प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एनजीटी सख्त

दूसरी तरफ एनजीटी ने भी सर्दी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई सख्त कदम उठा रखे हैं. खुले में कचरा जलाने पर पांच हजार रुपए तक जुर्माना लगाने तक प्रावधान कर रखा है. इसके बावजूद घड़ल्ले से कजरा जलाया जाता रहा है.

अगर सीपीसीबी के आंकड़ों की बात करें तो साल 2016 की तुलना में 2017 की गर्मी और मॉनसून में हवा की गुणवत्ता बेहतर थी. पिछले कुछ दिनों से इसमें तेजी देखी जा रही है.

सीपीसीबी रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित अथॉरिटीज अगर अगले तीन महीनों में वायु प्रदूषण रोकने में विफल रहती है तो इसमें और गिरावट दर्ज की जाएगी.

इस रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए सीपीसीबी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) आने वाले अगले कुछ दिनों में कई कड़े कदम फैसले ले सकती है. ट्रकों के शहर में घुसने से लेकर स्कूल-कॉलेजों को बंद करने जैसे फैसले शामिल हैं.

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दिवाली के बाद प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होने आशंका

हम आपको बता दें कि हवा में मौजूद पीएम यानी पार्टिकुलेट मीटर के अंश सांस लेने के दौरान शरीर में जाते हैं. पीएम-2.5 और पीएम-10 नामक कण फेफड़ों में पहुंच जाते हैं. ये हवा में मौजूद जहरीले कैमिकल्स को शरीर में पहुंचाते हैं, जिसकी वजह से फेफड़े और ह्रदय को नुकसान पहुंचता है.

दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) के डॉक्टर नरेश कुमार फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए साफ और सीधे शब्दों में कहें तो हवा में पीएम-10 का लेवल बढ़ने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है और पीएम- 2.5 का लेवल बढ़ने से दिमाग को नुकसान पहुंचता है. दोनों शरीर के लिए नुकसानदेह और जानलेवा हैं. प्रदूषण की वजह से आपको एलर्जी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और पैरालिसिस जैसे बीमारियों से हर रोज दो चार होना पड़ता है.’

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली की फिजा एक बार फिर से जहरीली होने जा रही है. दिवाली यानी 19 अक्टूबर तक दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. जिसका संकेत अभी से ही मिलना शुरू हो गया है.

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