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एयर इंडिया को UPA सरकार ने लूटा, अब इसका निजीकरण क्यों: स्वामी

स्वामी ने कहा, इसे (एयर इंडिया) खास मकसद से बर्बाद होने दिया गया. वित्त मंत्रालय का ऐसा कोई तुक नहीं है कि वह कंपनी को 10 हजार करोड़ रुपए न दे सके

FP Staff Updated On: Aug 11, 2018 01:53 PM IST

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एयर इंडिया को UPA सरकार ने लूटा, अब इसका निजीकरण क्यों: स्वामी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मणियम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे सरकारी उड्डयन कंपनी एयर इंडिया का निजीकरण होने से रोकें. उन्होंने पीएम मोदी से इस मामले में बीच-बचाव करने और केंद्रीय वित्त मंत्रालय को निजीकरण करने से रोकने का अनुरोध किया.

शुक्रवार को ऐसी खबरें आई थीं कि कर्ज के बोझ तले दबी एयर इंडिया के पास इतना भी पैसा नहीं कि वह अपने कर्मचारियों को सैलरी दे सके. पिछले पांच महीने से स्टाफ को तनख्वाह नहीं मिली है. कर्मचारियों को जुलाई से लेकर अबतक का बकाया दिया जाना है.

हालांकि एयर इंडिया ने सैलरी न मिलने की खबरों का खंडन किया है. शनिवार को कंपनी के निदेशक जफर इस्लाम ने कहा, एयर इंडिया बुरे दौर से गुजर रही है. हम इसमें सुधार लाने की कोशिश में लगे हैं. कर्मचारियों को सैलरी न मिलने की अफवाह बिल्कुल गलत है. सैलरी मिलने में देरी मौजूदा खराब हालत की वजह से हो सकती है लेकिन कर्मचारियों को हमेशा वक्त पर पैसा मिलता है और आगे भी मिलता रहेगा.

स्वामी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, इसे (एयर इंडिया) खास मकसद से बर्बाद होने दिया गया. वित्त मंत्रालय का ऐसा कोई तुक नहीं है कि वह कंपनी को 10 हजार करोड़ रुपए न दे सके. यह सरकारी एयरलाइन है, जिसके पास बहुत बड़ी प्रॉपर्टी है. सभी इसका निजीकरण करने में लगे हैं. प्रधानमंत्री को इस मामले में दखल देनी चाहिए और कंपनी की सभी मांगें मानने के आदेश देने चाहिए.

स्वामी ने आगे कहा, साल 2004 तक यह कंपनी नफा दे रही थी लेकिन उसके बाद यूपीए सरकार ने इसे लूटना शुरू किया. प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे वित्त मंत्रालय को निजीकरण कराने से रोकें.

31 मई को सरकार ने कहा था कि अपनी माली हालत से जूझती एयर इंडिया की खरीदारी के लिए एक भी कंपनी आगे नहीं आई है. उसके बाद कंपनी ने अपने कामकाज और पूंजी जुटान के लिए 1000 करोड़ के शॉर्ट-टर्म लोन की नीलामी आमंत्रित की थी. ऐसी खबरें आई थीं कि एयर इंडिया वापस अपनी पुरानी कंपनी टाटा संस के हाथ में चली जाएगी लेकिन बाद में इस मामले का कोई खास नतीजा निकलता नहीं दिखा.

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