S M L

एम्स के 'बोन बैंक' ने बांग्लादेश के डॉक्टर को दी नई जिंदगी, 6 साल से था मायूस

बांग्लादेश के मेडिकल स्टूडेंट सरीफुल आलम साल 1995 में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे, इस दुर्घटना में उनके दाएं पैर और दाएं कूल्हे में चोट लग गई थी

Updated On: Oct 07, 2018 11:41 AM IST

FP Staff

0
एम्स के 'बोन बैंक' ने बांग्लादेश के डॉक्टर को दी नई जिंदगी, 6 साल से था मायूस

हड्डियों में दर्द एक ऐसी समस्या है जो एक बार किसी को पकड़ ले तो उसका पीछा नहीं छोड़ती है. खासकर अगर आपके कुल्हे में चोट लगी हो तो आपका चलना-फिरना भी बंद हो सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक 15 साल पहले एक ऐसी ही चोट का शिकार हुए बांग्लादेश के एक युवा डॉक्टर को दिल्ली के एम्स ने आखिरकार इससे निजात दिलाया. बांग्लादेश के मेडिकल स्टूडेंट सरीफुल आलम साल 1995 में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे. इस दुर्घटना में उनके दाएं पैर और दाएं कूल्हे में चोट लग गई थी. उनकी दो प्रमुख हड्डियों में फ्रैक्चर था. इसके बाद उन्हें हिप रिप्लेसमेंट कराना पड़ा था क्योंकि उसके ठीक होने की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी. इसके बाद उनकी जिंदगी पटरी पर तो आ गई लेकिन 6 साल पहले उनके दाएं पैर में फिर से दर्द होना शुरू हो गया.

पिछले 6 साल से चल नहीं पा रहा था सरीफुल आलम 

आपको बता दें कि आलम को पिछले 6 साल से चलने-फिरने में काफी तकलीफ हो रही थी. बांग्लादेश में उन्हें अपनी समस्या का कोई हल नहीं मिल रहा था. ठीक होने की उम्मीद में वह दिल्ली के एम्स पहुंचे थे. यहां डॉक्टरों ने बोन बैंक में दान की गई हड्डियों से उनकी दोबारा सर्जरी कराई. एम्स के ऑर्थोपेडिक सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. राजेश मल्होत्रा ने बताया कि एम्स का बोन बैंक देश का एकमात्र चालू बोन बैंक है. तकनीक के विकास के बावजूद दुनिया में ऐसा कोई हिप रिप्लेसमेंट नहीं है जो 2 दशक से ज्यादा चल सके. समय के साथ हिप रिप्लेसमेंट इंप्लांट के सॉकेट का प्लास्टिक धीरे-धीरे खराब हो जाता है. इससे आसपास की हड्डियों को भी इससे नुकसान होने लगता है.

आलम का ऑपरेशन 2 घंटे तक चला

उन्होंने बताया कि आलम के मामले में पूरा सॉकेट ही गायब हो गया था. जांघ की ऊपरी हड्डी भी खराब होने लगी थी. उसके पास अपने पैरों पर चलने के लिए दोबारा ऑपरेशन करने के अलावा और कोई चारा नहीं था. आलम का ऑपरेशन 2 घंटे तक चला जिसके बद 12 घंटे उसे ऑबजरवेशन में रखा गया. अगले ही दिन वह सपॉर्ट के साथ आराम से चल रहे थे. डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि वैसे तो इस तरह के रोगियों को सर्जरी के एक सप्ताह बाद घर भेज दिया जाता है और फिर एक सप्ताह बाद उन्हें फुल चेक अप के लिए एम्स बुलाया जाता है. हालांकि उनका कहना है कि आलम बांग्लादेश से ए हैं तो उन्हें इतनी जल्दी घर बेज देना सही नहीं होगा क्योंकि उनका दोबारा आना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में उनको 2 सप्ताह तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा और फिर उन्हें घर भेज दिया जाएगा.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi