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अब इंजीनियरिंग के छात्र पढ़ेंगे 'क्या प्राचीन भारत के पास हेलिकॉप्टर था!'

तकनीकी छात्रों को भारतीय विज्ञान और दर्शन के इतिहास के बारे में जागरूक करने के लिए इस मॉडल पाठ्यक्रम को देश में 3,000 से अधिक तकनीकी कॉलेजों में अपनाया जाएगा

Updated On: Oct 03, 2018 10:13 AM IST

FP Staff

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अब इंजीनियरिंग के छात्र पढ़ेंगे 'क्या प्राचीन भारत के पास हेलिकॉप्टर था!'

क्या प्राचीन भारत के पास हेलिकॉप्टर और इलेक्ट्रो वोल्टाइक सेल्स थीं? मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय 'द ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन' चाहती है कि नए इंजीनियर्स इस सच्चाई का पता लगाएं.

न्यूज18 के मुताबिक काउंसिल का कहना है कि इंजीनियरिंग के छात्रों से यह आशा की जाती है कि किसी भी दावे को अस्वीकार करने से पहले वह ऋषि अगस्त और ऋषि कणाद के वैज्ञानिक कार्यों के बारे में पढ़ें और रिसर्च करें.

इसलिए, एआईसीटीई ने कहा है कि भारत विद्या भवन द्वारा प्रकाशित भारत विद्या सार को अगले शैक्षिक सत्र से मॉडल पाठ्यक्रम के तहत एक वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जाए.

तकनीकी छात्रों को भारतीय विज्ञान और दर्शन के इतिहास के बारे में जागरूक करने के लिए इस मॉडल पाठ्यक्रम को देश में 3,000 से अधिक तकनीकी कॉलेजों में अपनाया जाएगा.

इस बारे में एक ऑनलाइन याचिका भी दायर की गई जिसमें मुंबई निवासी वैज्ञानिक और होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन के फैकल्टी मेंबर अनिकेत सुले ने AICTE के चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे को संबोधित किया है.

सुले ने कहा, '1974 में आईआईएससी के एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग फैकल्टी, विमानिका शास्त्र किताब के सभी दावों को खारिज कर दिया था. AICTE द्वारा अनुमोदित पुस्तक को वैज्ञानिक समाज छात्रों के भविष्य को प्रभावी ढंग से नुकसान पहुंचाने के रूप में देख रहा है. ऐसे में यह जरूरी है कि AICTE इस पुस्तक से समर्थन वापस ले.'

वहीं सुले की याचिका के बाद भारत विद्या भवन और एक प्रकाशक शशिबाला ने ऑनलाइन याचिका शुरू की. भारत विद्या भवन ने 'भारतीय ज्ञान की व्यवस्था को जानने का अधिकार' शीर्षक वाली याचिका में कहा कि वह विज्ञान के छात्रों के लिए कोर्स शुरू करने जा रहा है जिससे वह भारतीय बुद्धिजीवियों और ऋषियों के लिखे भारतीय ज्ञान की व्यवस्था से रुबरु हो सकें.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे पश्चिमी और अन्य ओरिएंटल सिस्टम का विरोध नहीं करते हैं लेकिन विचारों की आजादी के तहत हर विचार को जगह मिलना चाहिए.

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