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'MSP में नहीं हुई पर्याप्त बढ़ोतरी, खरीद व्यवस्था सुधारने की जरूरत'

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि अपर्याप्त है. उन्होंने कहा कि यह लागत निर्धारण के उस फॉर्मूले पर आधारित नहीं है जिसकी सिफारिश की गई थी

Bhasha Updated On: Jul 08, 2018 01:41 PM IST

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'MSP में नहीं हुई पर्याप्त बढ़ोतरी, खरीद व्यवस्था सुधारने की जरूरत'

केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी उपज लागत का डेढ़ गुना अधिक मूल्य उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के इरादे से वर्ष 2018-19 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है. लेकिन जाने-माने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन इसे अपर्याप्त मानते हैं. उनका कहना है कि घोषित बढ़ोतरी अच्छी है लेकिन यह लागत निर्धारण के उस फॉर्मूले (सी 2 + 50) पर आधारित नहीं है जिसकी सरकार को सिफारिश की गई थी.

पीटीआई-भाषा ने इस मुद्दे पर एमएस स्वामीनाथन से उनसे खास बातचीत की है...

सवाल: सरकार दावा कर रही है कि उसने फसलों के एमएसपी को बढ़ाकर किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना देने का वादा पूरा किया है. आप इसे क्या मानते हैं?

एमएस स्वामीनाथन: निरपेक्ष रूप से देखा जाए तो निश्चित रूप से घोषित एमएसपी अधिक है और यह स्वागत योग्य है. लेकिन यह सिफारिश सी 2 लागत + 50 (उपज लागत का डेढ़ गुना) से कम है. उदाहरण के लिए, सामान्य धान के लिए एमएसपी 1550 रुपए से बढ़ाकर 1750 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है. पिछले साल 2017-18 के सी 2 लागत के साथ सीएसीपी द्वारा उपयोग किये जाने वाले कच्चा माल लागत सूचकांक के आधार पर लागत में 3.6 प्रतिशत वृद्धि को मानते हुए 2018-19 की यह लागत 1524 रुपए बैठती है. ऐसे में नया एमएसपी सी 2 + 15 प्रतिशत है न कि सी 2+ 50 प्रतिशत. इसी प्रकार, रागी के मामले में एमएसपी सी 2 + 20 प्रतिशत, मूंग के संदर्भ में सी 2 + 19 प्रतिशत है.

सवाल: सरकार एमएसपी की घोषणा तो करती है लेकिन कई फसलों के मामले में किसानों को वह भाव नहीं मिलता. इस पर आपका क्या कहना है?

एमएस स्वामीनाथन: यह बात सही है कि गेहूं और चावल को छोड़कर एमएसपी पर खरीद पर्याप्त नहीं है. यह किसानों के अनुभव से साफ है. जिन किसानों ने अच्छे मूल्य पर खरीद व्यवस्था की उम्मीद में अधिक दलहन की खेती की, बाजार भाव में गिरावट से उन्हें निराशा और परेशानी हुई. वास्तव में मॉनसून से पहले उड़द, तुअर, मक्का, मूंगफली, सोयाबीन, बाजारा और सरसों समेत कई फसलों का भारांश औसत मंडी भाव इन फसलों के समर्थन मूल्य से कम थे.

M S Swaminathan

कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन (फोटो: फेसबुक से साभार)

सवाल: इसका क्या समाधान है?

एमएस स्वामीनाथन: सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब वो विभिन्न फसलों के एमएसपी की घोषणा कर रही है, तो वह भाव किसानों को मिले. जब तक घोषित समर्थन मूल्य पर अनाज खरीद की व्यवस्था नहीं होती, तब तक अधिक एमएसपी की घोषणा का कोई मतलब नहीं है.

सवाल: क्या एमएसपी बढ़ाने मात्र से किसानों की स्थिति सुधर जाएगी?

एमएस स्वामीनाथन: देश में कृषि क्षेत्र में लाभ और आय की स्थिरता में मॉनसून और बाजार की बड़ी भूमिका है. विपणन (खरीद) के क्षेत्र में मदद के लिए नीति में 3 बातों को शामिल करना जरूरी है. पहला, किसानों को विपणन समर्थन के लिए सी2 + 50 प्रतिशत फार्मूले के साथ एमएसपी निर्धारित करने की जरूरत है.

दूसरा, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसानों को एमएसपी मिले, इसके लिए अनुकूल खरीद नीति की जरूरत है. तीसरा, खाद्य सुरक्षा कानून और स्कूलों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम (मिड डे मील) जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए खपत बढ़ायी जाए.

सवाल: खेती-बाड़ी की मौजूदा स्थिति के बारे में आप क्या कहेंगे?

एमएस स्वामीनाथन: कृषि की आर्थिक और पारिस्थितिकी सेहत अच्छी नहीं है. यह विभिन्न किसान संगठनों के बड़े पैमाने पर बार-बार हो रहे विरोध-प्रदर्शन और किसानों के आत्महत्या के मामले फिर से सामने आने से साफ है. उनकी 2 प्रमुख मांगें हैं- कृषि कर्ज माफी और लाभकारी मूल्य. खेती को लाभकारी बनाने के लिए जरूरी है कि किसानों को उनकी फसल का उपयुक्त मूल्य मिले इसके अलावा सरकार ने फसल बीमा में सुधार को लेकर कदम उठाया लेकिन उसका दायरा और प्रदर्शन में सुधार अब भी संतोषजनक नहीं है.

साथ ही क्षेत्र में अधिक जोखिम को देखते हुए उच्च कीमत और कर्ज के मामले में सुधार की मांग अब भी बरकरार है. इसके अलावा पारिस्थितिकी के स्तर पर भूमिगत जल के अधिक दोहन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है.

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