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आज अगर गांधी होते तो मोदी सरकार उनको भी गिरफ्तार कर चुकी होती: रामचंद्र गुहा

पुणे पुलिस ने पांच शहरों में नौ कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारे और पांच लोगों- वरावरा राव, वकील सुधा भारद्वाज और कार्यकर्ता अरुण फेरेरा, गौतम नवलाखा और वेनोन गोंसाल्वेस को गिरफ्तार किया

Updated On: Aug 28, 2018 09:16 PM IST

FP Staff

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आज अगर गांधी होते तो मोदी सरकार उनको भी गिरफ्तार कर चुकी होती: रामचंद्र गुहा

लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने देश भर में चल रहे छापे और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सरकार की आलोचना की. उन्होंने सरकार के इस कदम को 'क्रूर, सत्तावादी, दमनकारी, मनमाना और अवैध' कहा. पांच प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी के बाद गुहा ने इसके लिए 'सत्तारूढ़ सरकार के कॉर्पोरेट क्रोनियों' को दोषी ठहराया है. ये लोग आदिवासियों की भूमि, वन और खनिज संसाधनों को कब्जा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का सीधा सा मतलब है कि आदिवासियों के एकमात्र प्रतिनिधित्व को रास्ते से हटना.

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एनडीटीवी के मुताबिक पुणे पुलिस ने पांच शहरों में नौ कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारे और पांच लोगों- वरावरा राव, वकील सुधा भारद्वाज और कार्यकर्ता अरुण फेरेरा, गौतम नवलाखा और वेनोन गोंसाल्वेस को गिरफ्तार किया. पुलिस ने कहा कि ये गिरफ्तारियां पिछले साल भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़ी हुई हैं. इस हिंसा में दलित कार्यकर्ताओं की झड़प ऊपरी जाति के मराठों के साथ हुई थी. जून में सुधीर धावले, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन और शोमा सेन को जनवरी में भीमा कोरेगांव गांव में एक समारोह में 'उत्तेजक' भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया था. पुलिस का कहना है कि इसी भाषण के बाद हिंसा भड़की थी. और पूछताछ के दौरान उन्होंने जो कहा था, उसके आधार पर छापे मारे गए थे.

क्यों हैं गुहा गुस्सा:

गुहा ने कहा कि उनमें से कुछ लोगों को वो जानते हैं. हालांकि मैं हमेशा उनसे सहमत नहीं होता था लेकिन फिर भी मुझे पता है कि वो 'कभी भी ऐसा प्रचार नहीं करेंगे जिससे हिंसा भड़के'.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापे और गिरफ्तारी के खिलाफ गुहा ने ट्वीट कर लिखा-

'गांधी की जीवनी लिखने की वजह से मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि अगर आज महात्मा जिंदा होते तो उन्होंने अपनी वकालत की वर्दी को पहन लिया होता और सुधा भारद्वाज के पक्ष में कोर्ट में खड़े होते. ये मानते हुए कि मोदी सरकार ने अभी तक उनका न गिरफ्तार किया होता न ही हिरासत में लिया होता.'

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर इस तरह की कार्रवाही का अरूंधती रॉय और इंदिरा जयसिंह सहित कई बुद्धिजीवियों ने विरोध किया.

 

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