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खालिद के मारे जाने के बाद अब कश्मीर में बचे हैं ये टॉप 4 आतंकवादी

जम्मू-कश्मीर में सेना और सुरक्षाबल इस साल अब तक 150 से अधिक आतंकवादियों को मुठभेड़ में ढेर कर चुके हैं

Updated On: Oct 09, 2017 06:52 PM IST

FP Staff

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खालिद के मारे जाने के बाद अब कश्मीर में बचे हैं ये टॉप 4 आतंकवादी

पिछले कुछ महीनों में कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों ने कई आतंकवादियों को मार गिराया है. इनमें लश्कर-ए-तैयबा के कमांडरों बशीर अहमद वानी, अबू दुजाना, अबू इस्माइल और हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर सबजर भट्ट के नाम शामिल हैं. अब इस सूची में जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर खालिद का भी नाम जुड़ गया है. खालिद को सोमवार सुबह बारामूला में एक मुठभेड़ में मार गिराया गया.

खलिद के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, उसका नाम सबसे पहली बार अक्टूबर 2016 में सामने आया था. जैश ने श्रीनगर हवाई अड्डे के पास बीएसएफ कैंप पर हाल के हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया था. एक महीने पहले दक्षिण कश्मीर जिले के पुलवामा जिले में पुलिस पर हुए आत्मघाती हमले के पीछे भी खालिद का हाथ माना जाता है. इस हमले में सीआरपीएफ के चार और चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे.

बीते दिनों श्रीनगर के बाहरी इलाके में अमरनाथ यात्रा हमले के मास्टरमाइंड लश्कर कमांडर अबू इस्माइल और लश्कर के ही एक और आतंकवादी को एक ऑपरेशन में ढेर कर दिया गया था. इसके लगभग महीने भर बाद खालिद को भी मार गिराया गया है.

अबू इस्माल के मारे जाने के बाद कश्मीर पुलिस के आईजी मुनीर खान ने कहा था 'आतंकवाद के खात्मे के लिए अभी एक लंबा रास्ता तय करना है.' खालिद के मार गिराए जाने के बाद कश्मीर में अब ये चार मोस्ट वांटेड आतंकवादी हैं.

जाकिर मूसा, अल-कायदा

सुरक्षाबलों की सूची में यह टॉप पर है. हिज्बुल से अलग होने के बाद मूसा ने अंसार गजवत-उल हिंद- अल-कायदा नाम से एक कश्मीरी संगठन बनाया. बहुत कम समय में, मूसा घाटी के युवाओं और दूसरे आतंकवादी गुटों के बीच लोकप्रिय हो गया. कई आतंकवादी, जिसमें कश्मीर घाटी में लश्कर का प्रमुख अबू दुजाना भी उसके साथ अलग-अलग चरणों में शामिल हुआ था. अबू दुजाना ने शायद उसकी हथियारों और जमीनी नेटवर्क तैयार करने में मदद की थी.

सुरक्षाबल जाकिर मूसा को खत्म करना चाहते हैं क्योंकि वह कश्मीर और इसके बाहर कट्टरपंथी इस्लाम का झूठा प्रचार कर रहा है. उसके द्वारा फैलाया आंतक की विचारधारा घाटी के युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही है.

रियाज नाइकू, हिज्बुल मुजाहिदीन

हिज्बुल मुजाहिदीन का कश्मीर चीफ रियाज नाइकू ए++ कैटेगरी का आतंकवादी है. 29 साल का नाइकू, हिज्बुल के सबसे अनुभवी कमांडरों में से एक है. वर्तमान में वो कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को ऑपरेट कर रहा है. एक मुठभेड़ मार गिराए गए यासीन इटू के बाद उसने कश्मीर ऑपरेशन संभाल लिया है. अवंतीपोरी के दरबग का रहने वाला नायकू हाईटेक है और उसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की समझ है. हाल ही में वो मारे गए एक आतंकवादी के जनाजे में सार्वजनिक तौर पर नजर आया था.

उसके खिलाफ पुलिस में हत्या के कई मामले दर्ज है. इनमें से कुछ पुलिसकर्मियों की भी हत्या के मामले हैं. इससे पहले उसने अपनी उदारवादी छवि दर्शाने के लिए 11 मिनट का एक वीडियो जारी कर कश्मीरी पंडितों से घाटी में लौटने की अपील की थी. नाइकू हिज्बुल के लिए बड़े पैमाने पर ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) का समर्थन जुटाने का भी काम करता है. हिज्बुल कश्मीर घाटी का सबसे पुराना आतंकवादी संगठन है.

सद्दाम पद्दर, हिज्बुल मुजाहिदीन

मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी द्वारा साझा की गई तस्वीर को याद कीजिए? तस्वीर में दिख रहे 12 लोगों के समूह में पद्दर ही अब इकलौता सक्रिय आतंकवादी है. पद्दर के अलावा, फोटो में दिख रहा तारिक पंडित भी जिंदा है मगर वो अब आत्मसमर्पण कर चुका है.

पद्दर का ताल्लुक किसान परिवार से है. उसके बारे में बहुत जानकारी नहीं है, सिर्फ इतना भर कि हिज्बुल उसे काफी तवज्जो देता है. पद्दर ने बीच में ही स्कूल की पढ़ाई छोड़कर 4-5 साल पहले आतंकवाद की राह पकड़ ली थी. वो पहले लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य था लेकिन 2015 में वो हिज्बुल में शामिल हो गया. मूसा के हिज्बुल कमांडर के कश्मीर चीफ का पद छोड़ने के बाद उसका नाम अगले हिज्बुल चीफ के तौर पर लिया जा रहा था. मगर बाद में नाइकू को हिज्बुल के कश्मीर ऑपरेशन की जिम्मेदारी सौंप दी गई.

पद्दर ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है लेकिन उसे एक 'चालाक' आतंकवादी माना जाता है. वो उन चंद लोगों में शामिल था जिसपर बुरहान वानी भरोसा करता था.

जीनत-उल-इस्लाम, लश्कर-ए-तैयबा

घाटी में लश्कर लीडरशिप संभालने में जीनत-उल-स् का नाम सबसे प्रमुख तौर पर उभरकर सामने आया है. 28 साल का जीनत शोपियां के सुगन जानीपुरा का रहने वाला है. लश्कर में वो साल 2015 में भर्ती हुआ था. उसे फरवरी में हुए शोपियां हमले के मुख्य आरोपियों में से एक माना जाता है. इस हमले में तीन सैनिक शहीद हुए थे. उसकी पहचान आईईडी विशेषज्ञ के तौर पर है. लश्कर में शामिल होने से पहले वो अल-बदर आतंकवादी संगठन में था.

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