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पूर्ण शराबबंदी के बाद खैनी को बैन करने की तैयारी में बिहार सरकार

बिहार सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर खैनी को फूड प्रोडक्ट में शामिल करने के लिए कहा है, अगर ऐसा हो जाता है तो इसे बैन करना आसान हो जाएगा

FP Staff Updated On: Jun 08, 2018 06:07 PM IST

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पूर्ण शराबबंदी के बाद खैनी को बैन करने की तैयारी में बिहार सरकार

पूर्ण शराबबंदी के दो साल बाद बिहार सरकार अब खैनी पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है. राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिख कर खैनी को फूड प्रोडक्ट में शामिल करने के लिए कहा है. अगर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) खैनी को फूड प्रोडक्ट में शामिल कर लेता है, तो सरकार को स्वास्थ्य के आधार पर खैनी को बैन करने की शक्ति मिल जाएगी.

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, बिहार के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) संजय कुमार ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने इस बाबत केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि बिहार में हर पांचवां आदमी खैनी खाता है. हमारे पास नियम हैं जो सिगरेट के रूप में तंबाकू के उपयोग को नियंत्रित करते हैं, लेकिन खैनी की खपत को लेकर ध्यान देने की आवश्यकता है.

सरकार के फैसले पर अपनी बात रखते हुए कुमार ने कहा कि एफएसएसएआई एक्ट के मुताबिक किसी भी खाद्य उत्पाद (फूड प्रोडक्ट) पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जिसमें तंबाकू और निकोटिन की मात्रा उपलब्ध हो. कुमार ने कहा कि हालांकि, एफएसएसएआई के खाद्य उत्पादों की सूची में खैनी शामिल नहीं है. इसमें एक बार शामिल हो जाने के बाद, सरकार के लिए प्रतिबंध लगाना आसान होगा.

साथ ही साथ उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में तंबाकू की खपत में कुल मिलाकर कमी आई है. पिछले सात सालों में यह 53 प्रतिशत से कम होकर 25 प्रतिशत पर आ गया है. हालांकि, खैनी खाने वालों की संख्या अभी भी चिंताजनक है.

यह भी पाया गया है कि खैनी बिहार में मुंह के कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि तंबाकू का उपयोग कैंसर, लंग और कार्डियोवैस्कुलर जैसी तमाम बीमारियों के लिए मुख्य कारणों में से एक है.

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