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दिवाली के बाद प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर के लोगों में दिखा गुस्सा, रोष में कह दी ऐसी बातें

दिल्ली में गुरुवार सुबह इस साल की सबसे खराब वायु गुणवत्ता रही, वायु गुणवत्ता सूचकांक 574 रहा जो अत्यंत गंभीर आपात श्रेणी के अंतर्गत आता है, इसका तात्पर्य है कि ऐसी हवा में लंबे समय तक रहने से व्यक्ति को सांस संबंधी परेशानी हो सकती है

Updated On: Nov 08, 2018 04:16 PM IST

Bhasha

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दिवाली के बाद प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर के लोगों में दिखा गुस्सा, रोष में कह दी ऐसी बातें
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दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दीपावली के एक दिन बाद गुरुवार की सुबह आसमान में घना कोहरा रहा और कई लोगों ने पटाखे जलाने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा के उल्लंघन पर अपने आप को असहाय प्रकट किया. दिल्ली में गुरुवार सुबह इस साल की सबसे खराब वायु गुणवत्ता रही. वायु गुणवत्ता सूचकांक 574 रहा जो अत्यंत गंभीर आपात श्रेणी के अंतर्गत आता है. इसका तात्पर्य है कि ऐसी हवा में लंबे समय तक रहने से व्यक्ति को सांस संबंधी परेशानी हो सकती है.

मयूर विहार के वरिष्ठ नागरिक हसमुख राय ने कहा, दिल्ली मुझ जैसे टीबी मरीजों के लिए गैस चैंबर है. हम विकट स्थिति में फंस गए हैं. यदि हम टीबी से जान बचाते हैं तो हम प्रदूषण से मरेंगे. उन्होंने सवाल किया, इस सीजन में जब लोग विभिन्न मुद्दों पर अध्यादेश लाने की बात कर रहे हैं, क्यों नहीं नेता पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए अध्यादेश लाने के विषय पर साथ आते? दक्षिणी

दिल्ली की सागरिका शर्मा ने कहा कि पिछले साल वह अपनी मां को खतरनाक प्रदूषण के चलते ही गंवा बैठी थीं. उन्होंने कहा, मेरी मां बीड़ी-सिगरेट या शराब नहीं पीती थीं लेकिन हां, दिल्ली में रहना ही उनकी गलती थी. उन्होंने हैरानी प्रकट की कि कैसे लोग पटाखे जलाने के दुष्परिणाम को नहीं समझ पाते. उन्होंने कहा, मैं समझती हूं कि वे अपनी कब्र खोदने की कीमत पर खुशियां मनाना चाहते हैं. पुलिस ने कार्रवाई की, कई जगह गिरफ्तारियां भी कीं लेकिन कई लोग कहते हैं कि उनके लिए दीपावली का मतलब पटाखे जलाना है.

गुरुग्राम के निवासी हिमांशु भल्ला ने कहा, बचपन से ही, हम दीपावली पर पटाखे छोड़ते आ रहे हैं. हम हरित या लाल पटाखे नहीं समझते. हमें जो पता है, वह है हमारे लिए यह उत्सव का प्रतीक है और हम यह करते रहेंगे. लाजपत नगर की एक निवासी ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला देर से आया और वह इसके चलते त्योहार को यूं ही नहीं जाने दे सकतीं. प

र्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस पाबंदी को कड़ाई से लागू करने के लिए पुलिस को सरकारों द्वारा सहयोग किया जाना चाहिए था.‘केयर फोर एयर’ की सह संस्थापक ज्योति पांडे लावकरे ने कहा, न्यायपालिका ने हमारी कार्यपालिका को जरूरी अधिकार दिए हैं. हम नागरिकों की रक्षा के लिए अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपनी कार्यपालिका का सहयोग करने तथा लोकतंत्र के तीनों अंगों से मिलकर काम करने का अनुरोध करते हैं.

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