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नोटबंदी: जांच एजेंसियों के निशाने पर 1,761 राजनीतिक दल

फाइनेंसियल फ्रॉड को देखने वाली दो बड़ी जांच एजेंसियां ईडी और एफआईयू की विंग एक साथ सक्रिय हैं

Updated On: Dec 27, 2016 10:44 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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नोटबंदी: जांच एजेंसियों के निशाने पर 1,761 राजनीतिक दल

नोटबंदी के बाद से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के छापे लगातार डाले जा रहे हैं. इन छापों से रोज नए खुलासे हो रहे हैं.

फाइनेंसियल फ्रॉड को देखने वाली देश की दो बड़ी जांच एजेंसियां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट, इंडिया (एफआईयू,इंडिया) की कई विंग एक साथ सक्रिय हैं.

इन जांच एजेंसियों की कई यूनिट देश की राजनीतिक पार्टियों के बैंक खातों को खंगालने में लगी हैं. इस अभियान में इन लोगों को कामयाबी भी मिल रही है.

जांच एजेंसियों ने हाल ही में बीएसपी के एक बैंक खाते में जमा किए गए 104.36 करोड़ रुपए का पता लगाया है. ये रकम नोटबंदी के बाद जमा हुई है.

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आरटीजीएस के द्वारा जमा की गई रकम पर खास नजर

देश की जांच एजेंसियों को नोटबंदी के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए जमा होने की सूचना मिल रही थी. राजनीतिक पार्टियों के बैंक खातों में जमा की गई रकम में से अधिकांश रकम आरटीजीएस के द्वारा जमा की गई है.

ईडी और एफआईयू की नजर इस रकम पर है. कुछ बैंकों में राजनीतिक पार्टियों के खातों में करोड़ों रुपए जमा किए गए हैं.

सभी पार्टियां रडार पर

चुनाव आयोग के अनुसार सितंबर 2016 तक देश में 1761 पार्टियां रजिस्ट्रर्ड थीं. जिनमें 7 पार्टियों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है. 48 पार्टियों को राज्य पार्टी का दर्जा दिया गया है. 1706 पार्टियां ऐसी हैं जिनको चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिली है.

ईडी और आयकर विभाग की नजर इन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों के साथ-साथ देश के कुछ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों पर विशेष रूप से है.

सूत्र बताते हैं कि ईडी और एफआईयू की नजर दक्षिण भारत की तीन सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों पर है. इनके खातों में पिछले एक महीने में करोड़ों रुपए जमा हुए हैं. दक्षिण भारत की चार शहरों चैन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और विशाखापट्टनम पर खास तौर से नजर रखी जा रही है.

इन चारों जगहों पर ईडी और एफआईयू की कई टीमें एक साथ काम कर रही हैं. इन शहरों के 5 बैंकों की 14 शाखाओं पर ऑडिट का काम चल रहा है. इन्हीं 14 शाखाओं में दक्षिण भारत की लगभग सभी क्षेत्रीय पार्टियों के बैंक अकाउंट हैं.

Cash recovered in Delhi

दिसंबर के बाद जांच की रफ्तार तेज होगी

ईडी के एक अधिकारी कहते हैं कि दिसंबर के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी क्योंकि डाटा अभी भी पूरी तरह सौंपे नहीं गए हैं. इस बीच सरकार के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णय भी आ जाएंगे.

जांच एजेंसियों के लिए कानून में कुछ विशेष प्रावधान भी किए जा सकते हैं. इन विशेष प्रावधानों के बाद नोटबंदी से जुड़े मामले अदालत में कम जा पाएंगे. जिससे नतीजा जल्द निकलने की संभावना ज्यादा हो जाएगी.

फाइनेंसियल लेन-देन पर सरकार पैनी की नजर

ईडी के अधिकारी आगे कहते हैं कि सरकार कई स्तर पर काम कर रही है. कुछ अप्रत्याशित निर्णय लिए जा सकते हैं. इस पर वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आरबीआई और कानूनी विशेषज्ञ मिलकर काम कर रहे हैं.

सरकार के सूत्र बताते हैं कि फाइनेंसियल जांच से जुड़े कई विभागों के ईमानदार रिटायर्ड अफसरों की सेवा लेनी शुरू कर दी गई है. ऐसे पूर्व अफसरों की भी सेवा ली जा रही है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में बड़े आर्थिक घोटालों का खुलासा किया था. इन अफसरों का करियर बेदाग और इमेज साफ सुथरा रहा है.

इस समय देश में प्रवर्तन निदेशालय की आधी दर्जन टीम राजनीतिक पार्टियों की ऑडिट कर रही है. नोटबंदी के बाद प्रवर्तन निदेशालय देश की 100 से अधिक बैंक शाखाओं की ऑडिट करा रही है. ये वे बैंक शाखाएं हैं जहां पुराने नोट सबसे ज्यादा जमा कराए गए हैं.

आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद खोले गए सभी खातों की जांच शुरू कर दी है. आयकर विभाग ये पता लगा रही है कि खाता खोलते समय नियम का पालन किया गया है कि नहीं. जांच एजेंसियां खाता खोलते समय दिए गए सारे दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है.

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