S M L

मोदी की कैशलेस सोसायटी में साइबर फ्रॉड करने वालों की चांदी?

500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद होने से साइबर फ्रॉड करने वालों की चांदी हो गई है

Updated On: Dec 30, 2016 08:32 AM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

0
मोदी की कैशलेस सोसायटी में साइबर फ्रॉड करने वालों की चांदी?

साइबर क्राइम की चपेट में इस समय पूरा देश आ गया है. साइबर फ्रॉड के शिकार हुए लोगों की संख्या में देश के दूर-दराज गांव और शहर के लोग भी आने लगे हैं. आश्चर्यजनक रूप से साइबर क्राइम में बेतहाशा बढ़ोतरी नोटबंदी के फैसले के बाद हुई है.

जानकारों के अनुसार, 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद होने से साइबर फ्रॉड करने वालों की चांदी हो गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था. जहां प्रधानमंत्री कैशलेस सोसायटी के लिए डिजिटल पेमेंट को भले ही बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन ये भी सच है कि देश में कोई ठोस साइबर कानून नहीं है.

साइबर कानून के जानकारों के अनुसार, भारत में ई-वॉलेट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. सरकार के द्वारा डिजिटल पेमेंट को कानूनी मान्यता नहीं दी गई है. हैकर्स के निशाने पर आमतौर पर पहले कुछ मेट्रो शहर हुआ करते थे लेकिन अब वह देश के दूरदराज गांव-कस्बों तक पहुंच गए हैं.

नोटबंदी के बाद साइबर क्राइम के ग्राफ में तेजी

प्रधानमंत्री मोदी की नोटबंदी के फैसले के बाद से देश में साइबर क्राइम की संख्या में पहले की तुलना में काफी तेजी आई है. उदाहरण के तौर पर दिल्ली में इस वक्त अगर 10 मामले रोज आ रहे हैं तो 6 मामले साइबर क्राइम से जुड़े होते हैं. देश के कई राज्यों में साइबर फ्रॉड्स के रोज सैंकड़ों मामले आ रहे हैं.

मौजूदा कानून में दम नहीं

cyber

साइबर क्राइम के जानकार पवन दुग्गल बताते हैं कि देश के मौजूदा कानून साइबर फ्रॉड करने वालों के खिलाफ कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं है. जो भी धाराएं साइबर अपराध के लिए लगाई जा रही हैं वे धाराएं आईपीसी में मौजूद धोखाधड़ी की धाराओं से भी कमजोर हैं.

 

कैसे अपने जाल में फंसाते हैं साइबर क्रिमिनल

अक्सर साइबर फ्रॉड बैंक या डेबिट-क्रेडिट की समस्या को लेकर फोन करते हैं. जानकारी के अभाव में कुछ लोग सारी जानकारी शेयर हैकर्स के साथ साझा कर देते हैं.

बिहार की बरौनी की रहने वाली अनुपम कुमारी हाल ही में साइबर फ्रॉड की शिकार हुई हैं. अनुपम कुमारी पेशे से एक शिक्षिका हैं. अनुपम को भी साइबर फ्रॉड करने वालों ने फोन कर उनके खाते से 27 दिसंबर 2016 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सोकहारा बरौनी ब्रांच से 34 हजार 500 रुपए निकाल लिए.

अनुपम कुमारी कहती हैं, ‘27 दिसंबर 2016 को दो मोबाइल नंबर(7362821333, 9534761551) से मेरे नंबर फोन आया. फोन करने वाला अपने आपको एसबीआई का कर्मचारी बताया. आधार कार्ड का लिंक बैंक से नहीं होने का बहाना बता कर मेरे एटीएम कार्ड का पूरा डिटेल्स मांगने लगा. मुझको अपनी बातों में बहका कर मेरे खाता से 34 हजार 500 रुपए निकाल लिए. उसने मेरे अकाउंट से 6 बार ट्रांजेक्शन किया, जो पेटीएम, एयरटेल मनी और ओला कैब में ट्रांसफर किए गए.’

अनुपम कुमारी आगे कहती हैं, ‘मेरी उम्र 32 साल है. मेरे पति की कुछ महीने पहले ही हार्ट अटैक से मौत हुई है. मेरी सैलरी 10 हजार है. महीनों से ये पैसे अपने दो बेटों के लिए बचा कर रखे थे. जो दो मिनट में ही निकाल लिए गए. बैंक में पैसा रखने में भी अब डर लगने लगा है.’

मामले दर्ज करने में परेशानी

बैंकों के डेबिट और क्रेडिट कार्डों में खामियां बता कर साइबर फ्रॉड करने वाले लोग सूचना ले कर उनको रोज चूना लगा रहे हैं. जब पीड़ित मामला दर्ज कराने पहुंचते हैं तो मामला दर्ज नहीं किया जा रहा है. कभी-कभी तो पुलिस अधिकारियों की तरफ से उल्टे  दोष देकर थाने से जाने के लिए बोला जाता है. पुलिस अधिकारियों को साइबर कानून की कम जानकारी एफआईआर दर्ज करने में बाधक साबित हो रही है.

cyber2

साइबर कानून मामले के जानकार पवन दुग्गल कहते हैं, देश की राजधानी दिल्ली में जब पुलिस वालों को साइबर कानून की जानकारी नहीं होती है तो बिहार जैसे राज्य में पुलिस इस तरह के शिकार लोगों को कहां से एफआईआर दर्ज करती होगी? जरूरत है लोगों के बीच जानकारी पहुंचाने की, जो सरकार और कंज्यूमर से जुड़े मंत्रालय नहीं पहुंच पा रही है'

क्या है साइबर क्राइम

साइबर फ्रॉड में तकनीक का फायदा उठा कर जुर्म किया जाता है. कम्प्यूटर, डिजिटल इक्यूपमेंट और मोबाइल डिवाइसेज के जरिए इंटरनेट का फायदा उठाकर लोगों को गुमराह किया जाता है. लोगों को गुमराह कर साइबर फ्रॉड डाटा का गलत इस्तेमाल करते हैं. किसी वेबसाइट को हैक करना या सिस्टम डेटा को चुराना भी साइबर क्राइम में आता है. साइबर क्राइम भारत ही नहीं दुनिया के लिए परेशानी का सबब बन गया है.

नए साइबर कानून की जरूरत

pawan duggal

भारत में साइबर क्राइम को लेकर साल 2000 में सूचना तकनीक कानून लाया गया था. इस कानून को साल 2008 में संशोधन किया गया था. जिससे कानून और कमजोर हुआ.

साइबर कानून मामले के विशेज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, ‘जो कानून 2000 में पास किया गया था वह ज्यादा सख्त था. 2008 में पास किए गए संशोधित कानून में आरोपी के पकड़े जाने पर तुरंत ही जमानत मिल जाती है. जिससे होता यह है कि आरोपी अपने जुर्म का इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस खत्म कर देते हैं.’

दूसरे देशों की तुलना में भारत में डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स को हैक करना आसान है. ऐसे में लोगों को अपने कार्ड की जानकारी दूसरे से साझा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. ऐसे में जरूरत है कि लोगों को डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरुकता पर ध्यान देने की.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi