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कैग रिपोर्ट के बाद रेलवे की सफाई: खाने की क्वालिटी पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति

आईआरसीटीसी ही खाने की क्वालिटी के लिए जवाबदेह है

Updated On: Jul 22, 2017 03:45 PM IST

FP Staff

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कैग रिपोर्ट के बाद रेलवे की सफाई: खाने की क्वालिटी पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति

कैग ने शुक्रवार को पेश किए गए अपने रिपोर्ट में कहा था कि रेल में परोसा जाने वाला खाना इंसानों के खाने लायक नहीं है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दूषित खाद्य पदार्थों, रिसाइकिल किया हुआ खाद्य पदार्थ और डब्बा बंद और बोतलबंद वस्तुओं का उपयोग उस पर लिखी इस्तेमाल की अंतिम तारीख के बाद भी किया जा रहा है.

इस ऑडिट में यह भी पाया गया कि रेलवे की फूड पॉलिसी में लगातार बदलाव होने से यात्रियों को बहुत ज्यादा परेशानियां होती हैं. एक निरीक्षण से पता चला है कि स्वच्छता को बनाए रखने के लिए स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक और साफ-सुथरी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

कैग की इस रिपोर्ट के बाद रेलवे मंत्रालय ने शनिवार को अपने खाने और कैटरिंग की पॉलिसी की लेकर कई ट्वीट किए. रेल मंत्रालय ने कहा है कि रेलवे ने खानपान संबंधी सभी जिम्मेदारी अब आईआरसीटीसी संभालेगा. खानपान संबंधी शिकायतों के लिए अब वही जिम्मेदार होगा. रेलवे ने कहा कि खराब खाने की शिकायत के लिए रेलवे 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएगा.

रेल मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा है कि 27 फरवरी 2017 से शुरू की गई नई कैटरिंग पॉलिसी का उद्देश्य सभी यात्रियों को बेहतर खाना उपलब्ध कराना है. इसके तहत आईआरसीटीसी को यह अधिकार दिया गया है कि वह खाना तैयार करने और इसे बांटने के काम को एक साथ करने की कोशिश करे.

बेहतर खाना तैयार करने के लिए आईआरसीटीसी नए किचन बना रही है और पुराने रसोईघरों को बेहतर कर रहा है. आईआरसीटीसी सभी मोबाइल यूनिट्स पर कैटरिंग सर्विस की देखरेख कर रहा है. पहले जोनल रेलवे पैंट्री कार के ठेके देता था लेकिन अब यह काम भी आईआरसीटीसी करेगा. रेलवे ने यह भी कहा कि सभी मोबाइल यूनिट्स पर आईआरसीटीसी द्वारा चलाए जा रहे किचन से खाना लिया जाएगा.

रेलवे ने सफाई देते हुए यह भी कहा है कि आईआरसीटीसी प्राइवेट कैटरिंग सर्विस कंपनियों से खाना नहीं आउटसोर्स करता है. रेलवे ने यह भी कहा कि रेलवे में खानपान की सप्लाई का अधिकार और स्वामित्व सिर्फ आईआरसीटीसी के पास है और आईआरसीटीसी ही खाने की क्वालिटी के लिए जवाबदेह है.

रेलवे ने यह भी कहा है कि इस नई कैटरिंग पॉलिसी के बाद रेलवे स्टेशनों के फूड प्लाजा, फूड कोर्ट्स और फास्ट फूड यूनिटों के देखरेख की पूरी जिम्मेदारी अब आईआरसीटीसी के पास है.

रेलवे ने यह भी कहा है कि अब सभी किचन पूरी तरह से आईआरसीटीसी चलाएगा. रेलवे ने यह भी कहा है कि अब रेलवे स्टेशनों पर चलने वाले ‘जन आहार’ किचन को भी आईआरसीटीसी ही चलाएगा और जहां जरूरत होगी आईआरसीटीसी वहां इसके लिए किचन भी बनाएगा.

हालांकि रेलवे ने यह कहा है कि आईआरसीटीसी कैटरिंग संबंधी कुछ सेवाओं में सेल्फ हेल्प ग्रुप को शामिल कर सकता है.

रेल मंत्रालय ने खानपान को लेकर लगभग 30 ट्वीट किए हैं और यह कहा कि वे खाने की गुणवत्ता को लेकर गंभीर हैं और खानपान की हमेशा जांच भी होगी. वे खानपान को लेकर उनकी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है.

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