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जम्मू-कश्मीरः श्रीमद भगवत गीता और रामायण की पुस्तकों की खरीद का आदेश रद्द, ये है सच्चाई

स्कूल शिक्षा विभाग में अनुसचिव मोहम्मद याकूब ने बीते सोमवार को स्कूल शिक्षा निदेशक कश्मीर को एक लिखित पत्र भेजा था

Updated On: Oct 23, 2018 01:30 PM IST

FP Staff

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जम्मू-कश्मीरः श्रीमद भगवत गीता और रामायण की पुस्तकों की खरीद का आदेश रद्द, ये है सच्चाई
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जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों व कॉलेजों में श्रीमद भगवत गीता और रामायण की पुस्तकें उपलब्ध कराने के फैसले से सियासी विवाद पैदा होने व हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने मंगलवार को अपना आदेश वापस ले लिया. दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग में अनुसचिव मोहम्मद याकूब ने बीते सोमवार को स्कूल शिक्षा निदेशक कश्मीर को एक लिखित पत्र भेजा था.

इस पत्र में उन्होंने गत 4 अक्टूबर 2018 को जम्मू-कश्मीर राज्यपाल सत्यपाल मलिक के एक सलाहकार की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसलों का जिक्र करते हुए कहा था कि स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, निदेशक कालेज, निदेशक पुस्तकालय व संस्कृति विभाग श्री सर्वानंद प्रेमी द्वारा लिखी गई कौशुर रामायण और श्रीमद भगवत गीता के अनुवाद की पर्याप्त संख्या में प्रतियां खरीदने पर विचार करें ताकि यह पुस्तकें राज्य के सभी स्कूलों,कॉलेजों और पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई जा सकें.

संबंधित पुस्तकों को खरीदना शुरू किया जाता और उन्हें शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध कराया जाता, उससे पहले ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार की शाम को ही ट्वीट कर पूछा कि सिर्फ गीता और रामायण ही क्यों? अगर मजहबी किताबें स्कूलों, कॉलेजों और पुस्तकालयों ( मुझे नहीं लगता कि इन संस्थानों में इनकी कोई जरुरत होगी) में उपलब्ध करानी हों तो फिर चुनिंदा आधार पर ही क्यों? अन्य मजहबों की उपेक्षा क्यों?

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