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जानिए कैसे BS-VI ईंधन से कम हो सकता है प्रदूषण

BS-VI गाड़ियों में भी एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम फिट होगा. हालांकि, इसका पूरा लाभ तब मिलेगा, जब गाड़ियां भी पूरी तरह से BS-VI टेक्नोलॉजी आधारित तैयार की जाएंगी

Updated On: Nov 16, 2017 02:30 PM IST

FP Staff

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जानिए कैसे BS-VI ईंधन से कम हो सकता है प्रदूषण

दिल्ली में चल रहे स्मॉग की समस्या ने सरकार को चिंतित कर दिया है. प्रदूषण से निपटने के लिए पहले तो बीएस 3 वाहनों को हटाया गया. उसकी जगह बीेएस 4 वाहन इस वक्त देशभर में चल रहे हैं. बीएस 4 आने के बाद बीएस 3 की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई है.

प्रदूषण का स्तर और कम हो, इसके लिए सरकार अब सीधे बीएस 6 ईंधन वाले वाहन चलाने की योजना बना रही है. बीएस 6 से डीजल वाहनों से 67 प्रतिशत और पेट्रोल वाहनों से 25 प्रतिशत तक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो जाएगा.

इससे प्रदूषण कम करने में काफी मदद मिलेगी. यही वजह है कि भारत सरकार बीएस 4 के बाद सीधे बीएस 6 लाने की योजना बना रही है. अगर सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो आनेवाले सालों में भारत में बीएस 6 वाहन ही चलेंगे. इसे काफी क्लीन फ्यूल माना जाता है.

एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम लगाने से होगा फायदा 

पीएम 2.5 की वैल्यू 400 एमजीसीएम जाती है तो उसमें 120 एमजीसीएम से ज्यादा का योगदान वाहनों से होने वाले प्रदूषण कणों से होता है. बीएस-6 फ्यूल आने से पर्टिकुलेट मैटर में इनकी 20 से 40 एमजीसीएम तक ही हिस्सेदारी रहेगी.

बीएस-6 गाड़ियों में भी एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम फिट होगा. हालांकि, इसका पूरा लाभ तब मिलेगा, जब गाड़ियां भी पूरी तरह से बीएस-6 टेक्नोलॉजी आधारित तैयार की जाएंगी.

इस समय देश के कुछ ही राज्यों में बीएस 4 ईंधन की आपूर्ति की जा रही है. इसमें जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान शामिल हैं.

इसके अलावा उत्तर भारत में बीएस-4 ईंधनों की आपूर्ति की जा रही है. हालांकि इन राज्यो में भी सभी जगहों पर इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है. ऐसे में देशभर में बीएस 4 की आपूर्ति के साथ बीएस 6 की आपूर्ति एक बड़ा टास्क हो सकता है. वहीं देश के बाकी हिस्से में बीएस-3 ईंधन की आपूर्ति की जा रही है.

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