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आदित्य हत्याकांड: ओवरटेकिंग की सामान्य घटना में गोली मार देने का साहस कहां से आता है?

रॉकी यादव का केस सिर्फ एक घटना है लेकिन हालिया कुछ सालों पर नजर डालिए तो ऐसी घटनाएं हमारे समाज में तेजी से बढ़ रही हैं

Updated On: Sep 01, 2017 01:05 PM IST

Arun Tiwari Arun Tiwari
सीनियर वेब प्रॉड्यूसर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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आदित्य हत्याकांड: ओवरटेकिंग की सामान्य घटना में गोली मार देने का साहस कहां से आता है?

बिहार के चर्चित आदित्य हत्याकांड में कोर्ट ने आरोपी रॉकी यादव को दोषी करार दे दिया है. पिछले साल मई महीने में इस घटना को मीडिया ने प्रमुखता से छापा था. ओवरटेकिंग की सामान्य घटना में एक छात्र की हत्या कर दी गई थी.

रॉकी यादव को कोर्ट उनके किए की सजा दे ही रहा है लेकिन अगर बीते कुछ सालों का इतिहास खंगालिए तो पता चलेगा कि ये इस तरह की पहली घटना नहीं है. आपको बीते सालों में रोडरेज या किसी दूसरी सामान्य बात पर हत्या के कई मामले मिल जाएंगे.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली जैसे महानगर में आकस्मिक गुस्से की वजह होने वाली मौतों की संख्या डकैती और चोरी से ज्यादा है. पुलिस की इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि 2017 के शुरुआती तीन महीनों के दौरान 127 हत्याएं सिर्फ आकस्मिक गुस्से की वजह से हुई थीं.

वहीं साल 2010 में आई छपी हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली में ज्यादातर हत्या के मामले बेहद सामान्य मसलों पर सामने आते हैं.

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हमारे समाज में लोगों के बीच बढ़ता यह गुस्सा कई बार लोगों की जिंदगियां लेकर मानता हैं. बात सामान्य होती है, जिसे आसानी के साथ टाला जा सकता है लेकिन गुस्से की वजह उसकी परिणति ही कुछ और हो जाती है.

सामान्य घटनाओं पर असामान्य तरीके से रिएक्ट करने के और भी कई कारण हैं. इनमें आरोपी के अच्छे या प्रभावी बैकग्राउंड से होना भी एक कारक के तौर काम करता है. आदित्य और रॉकी के केस में भी यही हुआ था. रॉकी के पिता पर गया और उसके आस-पास के इलाकों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. रॉकी का पिता बिंदेश्वरी यादव अकूत धन-संपत्ति का मालिक है. कई बार आम युवाओं में इन बातों का असर बेहद ज्यादा होता है. वो अपने परिवार के रसूख से खुद को जोड़कर देखते हैं. वो ये बर्दाश्त नहीं कर पाते कि कोई उनकी अनदेखी कर रहा है.

दिल्ली में हुआ बहुचर्चित जेसिका लाल हत्याकांड भी कुछ इसी तर्ज पर हुआ था. तब हरियाणा के ताकतवर कांग्रेसी नेता रहे विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने मॉडल जेसिका लाल को नाइट क्लब में सामान्य सी बात पर गोली मार दी थी. इसके बाद भी जब मनु शर्मा परोल पर छूटा तो विवाद हुआ था.

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बाहुबली परिवारों की संतानों के ऐसे कई केस पहले भी आ चुके हैं. दरअसल सामान्य बातों पर देश में बढ़ती हत्याओं का सिलसिले के पीछे वजहें तो कई हैं लेकिन इसके परिणाम बेहद भयावह हैं.

करीब एक साल पहले व्हाट्सअप और सोशल मीडिया पर मोतिहारी का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था जिसमें एक स्थानीय अपराधी के दो लड़के अपने कॉलेज के एक सहपाठी को बुरी तरह से पीट रहे थे. बाद में मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ कि पिता के नाम का सहारा लेकर ये दोनों लड़के पूरे इलाके में लोगों को धमकाते फिरते हैं.

मतलब एक तरफ तो हमारे समाज में युवा आधुनिकता और नई जीवनशैली के दबाव में कानून को हाथ ले रहे हैं तो वहीं इसी तरह के मामलो के पीछे परिवार का प्रभावी होना भी सामने आता है. दोनों ही स्थितियां मनोवैज्ञानिक हैं और दोनों ही भयावह हैं.

रॉकी और मनु शर्मा जैसे अपराधियों को सजा मिल रही है लेकिन हमें समाज में नैतिक मूल्यों में भी बदलाव करने की जरूरत है. अापराधिक पृष्ठभूमि से ताल्लुख रखने वाले परिवारों में तो इसे रोकना बेहद मुश्किल है लेकिन उन घटनाओं को रोका जा सकता है जिनमें आरोपी सामान्य घरों से ताल्लुख रखते हैं.

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