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देहरादून में अतिक्रमण के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई

करीब तीन माह पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर देहरादून शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जारी 'अतिक्रमण हटाओ' अभियान के तहत यह अब तक का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान है

Updated On: Sep 16, 2018 02:49 PM IST

Bhasha

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देहरादून में अतिक्रमण के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई
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'अतिक्रमण हटाओ' टास्क फोर्स के दस्ते जब 14 सितंबर को भारी पुलिस बल और बड़ी-बड़ी मशीनों के साथ देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में पहुंचे तो उन्हें भीड़ के भारी रोष का सामना करना पड़ा . लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कुछ ही घंटों में क्षेत्र की 150 से ज्यादा दुकानों को जमींदोज कर दिया .

करीब तीन माह पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर देहरादून शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जारी 'अतिक्रमण हटाओ' अभियान के तहत यह अब तक का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान है.

राष्ट्रीय राजमार्ग-72 पर आईएमए के पास स्थित इस व्यस्त क्षेत्र में ध्वस्तीकरण के बाद अब शोरगुल मचा हुआ है. टूटी हुई दुकानों के मलबे के पास खडे़ दुकानदार, मलबे में से सामान चुनने वाले कबाड़ी, प्रशासन की कार्रवाई का नजारा देखने वाले लोगों के अलावा जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की आवाजें हवा में हलचल पैदा कर रही हैं.

शहर में जारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी और अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने इस संबंध में कहा कि प्रेमनगर क्षेत्र में 'अतिक्रमण हटाओ' टास्क फोर्स की सभी चारों जोन की टीमों को अतिक्रमण हटाने के कार्य में लगाया गया है ताकि प्रेमनगर क्षेत्र से अवैध अतिक्रमणों को तीव्र गति से हटाया जा सके.

पिछले 63 सालों से बसी दुकानों को बिना वजह ढहा दिया गया

उन्होंने बताया कि प्रेमनगर से अब तक 70 प्रतिशत अवैध अतिक्रमणों को हटाया जा चुका है और शेष अतिक्रमणों को हटाने का कार्य बदस्तूर जारी है .

हालांकि, क्षेत्र में ध्वस्त की गई दुकानों के मालिक प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के तरीके से नाराज हैं और उनका आरोप है कि पिछले 63 सालों से यहां बसी दुकानों को बिना वजह ढहा दिया गया जबकि दुकानदार अपना अतिक्रमण स्वयं तोड़ रहे थे .

प्रेमनगर व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूषण भाटिया ने कहा कि उनकी 23 साल पुरानी दो मंजिला दुकान को प्रशासन की जेसीबी मशीन ने ध्वस्त कर दिया जबकि वह 15 फीट लंबी दुकान का अतिक्रमण तोड़कर उसे सात फीट तक कर चुके थे.

भाटिया ने यह भी आरोप लगाया कि उनका दुकान में रखा करीब पचास हजार रुपए का सामान भी मलबे में दब गया और दुकान की कीमत को छोड़ भी दिया जाए तो भी उन्हें फौरी तौर पर दो लाख रुपए की क्षति हुई है .

हो गई सियासत शुरू

भाटिया जैसे ही आरोप अन्य दुकानदारों ने भी लगाए . हालांकि, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद उनकी मांग है कि उन्हें कहीं अन्यत्र बसाया जाए ताकि उनकी रोजी-रोटी चल सके .

इस कार्यवाही को लेकर सियासत भी गर्माने लगी है. बीजेपी विधायक हरबंस कपूर ने प्रेमनगर में हुई कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पुनर्वास की कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए थी जिससे आम जनता बेरोजगार और बेघर न हो.

इसी तरह कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि अतिक्रमण की आड़ में साठ साल से ज्यादा समय से रोजगार और घर बनाकर रहने वालों को उजाड़ा जा रहा है जिसके लिए बीजेपी की सरकार जिम्मेदार है .

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