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'दो तिहाई भारतीयों को किसी न किसी रूप में देनी पड़ती है रिश्वत'

भारत में भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस के बाद शीर्ष पांच में पहले स्थान पर सरकारी अधिकारी हैं

Updated On: Mar 07, 2017 05:18 PM IST

Bhasha

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'दो तिहाई भारतीयों को किसी न किसी रूप में देनी पड़ती है रिश्वत'

एक सर्वे में दावा किया गया है कि भारत में सार्वजनिक सेवाओं का लाभ लेने के लिए दो-तिहाई भारतीयों को किसी न किसी रूप में रिश्वत देनी पड़ती है. वहीं एशिया में रिश्वत के मामले में भारत शीर्ष पर है.

यह सर्वे अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक अधिकार समूह ने करवाया था. सर्वे के अनुसार भारत में 69 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें अपना काम करवाने के लिए घूस देनी पड़ी. जबकि, वियतनाम में ऐसा कहने वालों की संख्या 65 फीसदी, पाकिस्तान में 40 फीसदी और चीन में 26 फीसदी थी.

सर्वे के मुताबिक, रिश्वत देने की दर जापान में सबसे कम 0.2 फीसदी और दक्षिण कोरिया में केवल तीन फीसदी पाई गई.

बहरहाल, चीन में इस बुराई की दर बढ़ती प्रतीत होती है क्योंकि सर्वे में 73 फीसदी लोगों ने कहा कि पिछले कुछ सालों में उनके देश में रिश्वत का चलन बढ़ा है.

20 हजार से ज्यादा लोगों के एक बार देनी पड़ती है रिश्वत

सर्वे की मानें तो रिश्वत के मामले में पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, जापान, म्यांमार या बर्मा, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देश भारत से नीचे रहे और भारत का स्थान सातवां रहा.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशल की मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए क्लिक करें

वहीं एशिया की करीब 90 करोड़ की आबादी वाले 16 देशों के 20 हजार से ज्यादा लोगों ने कहा कि उन्हें पिछले एक साल में कम से कम एक बार तो रिश्वत देनी ही पड़ी.

India Corruption currency

भारत में भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस के बाद शीर्ष पांच में पहले स्थान पर सरकारी अधिकारी हैं. सर्वे के मुताबिक सरकारी अधिकारी 84 फीसदी, कारोबारी अधिकारी 79 फीसदी, स्थानीय पार्षद 78 फीसदी और सांसद 76 फीसद भ्रष्टाचार की श्रेणी में रहे.

जिन लोगों को सर्वे के दायरे में लिया गया उनमें से कम से कम 38 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने रिश्वत दी.

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के अध्यक्ष जोस उगाज ने कहा, ‘सरकारों को अपनी भ्रष्टाचार निरोधक प्रतिबद्धताओं को हकीकत का रूप देने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए. यह समय कहने का नहीं बल्कि करने का है. लाखों की संख्या में लोग लोकसेवकों को रिश्वत देने के लिए मजबूर होते हैं और इस बुराई का सबसे ज्यादा असर गरीब लोगों पर पड़ता है.’

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