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ABVP ने कहा था एंटीनेशनल, रामचंद्र गुहा ने गुजरात यूनिवर्सिटी में पढ़ाने से किया मना

यूनिवर्सिटी के फैसले के बाद एबीवीपी ने अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा था और कहा था कि हमारे संस्थानों में इंटेलेक्चुअल्स की जरूरत है, एंटीनेशनल्स की नहीं

Updated On: Nov 02, 2018 11:32 AM IST

FP Staff

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ABVP ने कहा था एंटीनेशनल, रामचंद्र गुहा ने गुजरात यूनिवर्सिटी में पढ़ाने से किया मना

मशहूर लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने गुजरात के अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा है कि मामला मेरे कंट्रोल से बाहर जा चुका है. रामचंद्र गुहा ने गुरुवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी. उनका यह बयान तब आया है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने यूनिवर्सिटी में उनकी नियुक्ति की खिलाफत की थी और अपील की थी कि यह फैसला वापस लिया जाए.

16 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी ने ऐलान किया था कि गुहा को स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में बतौर प्रोफेसर और गांधी विंटर स्कूल के डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के इस फैसले के बाद एबीवीपी ने 19 अक्टूबर को इसका विरोध किया था. एबीवीपी के अहमदाबाद सचिव प्रवीण देसाई ने कहा, हमने अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार बीएम शाह को ज्ञापन सौंपा था और कहा था कि हमारे संस्थानों में इंटेलेक्चुअल्स की जरूरत है, एंटीनेशनल्स की नहीं. इन्हें शहरी नक्सली भी कहा जा सकता है.

उन्होंने कहा कि गुहा के किताब से हमने कुछ एंटीनेशनल कोट भी रजिस्ट्रार को सौंपे थे. देसाई ने कहा कि यदि उन्हें गुजरात बुलाया जाता है तो यह एक जेएनयू की तरह राष्ट्र विरोधी भावना पनप सकती है. कुलपति को संबोधित करते हुए दिए गए इस ज्ञापन में गुहा की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की गई थी और गुहा के काम को हिंदू संस्कृति का आलोचक बताया गया था.

इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने सोमवार को गुहा से नियुक्ति को लेकर बात की थी. इस बातचीत के दौरान गुहा से नियुक्ति की तारीख को टालने को कहा गया था. पहले के फैसले के मुताबिक, गुहा को 1 फरवरी 2019 को अहमदाबाद यूनिवर्सिटी को जॉइन करना था. गुहा के करीबी ने बताया कि यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पर जबरदस्त दबाव था. लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि क्या लोकसभा चुनाव के बाद यह दबाव कम होगा.

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