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दुजाना का आखिरी कॉल: अंतिम वक्त में ये सब सोच रहा होता है एक आतंकी

अबु दुजाना के एनकाउंटर से जुड़ा एक टेप सामने आया है, जिससे ये पता चलता है कि आखिर कैसे उसने सब कुछ भूल कर जिहाद का रास्ता चुना

Subhesh Sharma Updated On: Aug 03, 2017 01:52 PM IST

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दुजाना का आखिरी कॉल: अंतिम वक्त में ये सब सोच रहा होता है एक आतंकी

1 अगस्त, 2017. ये तारीख भारतीय सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी लेकर आई. मंगलवार के दिन सुरक्षाबलों ने A++ कैटेगरी के आतंकी अबु दुजाना को एनकाउंटर में मार गिराया. दक्षिण कश्मीर के लोगों में दुजाना का खौफ था.

उसने कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया था. दुजाना के एनकाउंटर के बाद कई खुलासे हुए जैसे कि वो इश्क फरमाने का शौकीन था. वो अय्याश था, लड़कियों को परेशान करता था और किसी भी घर में घुस जाता था.

वहीं अब इस एनकाउंटर से जुड़ा एक टेप सामने आया है, जिससे ये बात पता चलती है कि आखिर कैसे दुजाना भी सब कुछ भूल कर जिहाद की ओर चल पड़ा था. इस टेप को सुनकर समझा जा सकता है कि कैसे आतंकी संगठन दुजाना जैसे भटके हुए युवाओं का ब्रेन वॉश करके उन्हें खूंखार आतंकवादी बना रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दुजाना के उस आखिरी कॉल की डिटेल्स दी गई है जो उसके और एक आर्मी अफसर के बीच हुई थी. आर्मी का एक अधिकारी दुजाना को जिंदा गिरफ्तार करना चाहता था इसलिए अधिकारी ने चारों तरफ से घेरकर आखिर में दुजाना को फोन कॉल किया था.

दुजाना और आर्मी ऑफिसर के बीच इस तरह से बातचीत हुई थी-

दुजाना- क्या हाल हैं? मैंने कहा, क्या हाल हैं.

ऑफिसर- हमारा हाल छोड़ दुजाना. तुम सरेंडर क्यों नहीं करते. तुमने इस लड़की से शादी की है. जो तुम कर रहे हो वो सही नहीं है.

टेप में ऑफिसर को दुजाना को समझाने की कोशिश करते सुना गया कि पाकिस्तानी एजेंसियां कश्मीरियों को चोट पहुंचाने के लिए तुम्हारा इस्तेमाल कर रही हैं. इस पर दुजाना ने कहा-

दुजाना- हम निकले थे शहीद होने. मैं क्या करूं. जिसको गेम खेलना है, खेलो. कभी हम आगे, कभी आप, आज आपने पकड़ लिया. आपको मुबारक हो. जिसको जो करना है कर लो. सरेंडर नहीं कर सकता. जो मेरी किस्मत में लिखा होगा, अल्लाह वही करेगा, ठीक है.

दुजाना ने माना है कि वो जिहाद के लिए गिलगित-बल्तिस्तान में अपने माता-पिता को छोड़ कर आया है. ऑफिसर ने एक कश्मीरी नागरिक के माध्यम से दुजाना से फोन पर बात की थी. एनकाउंटर से पहले नागरिक ने दुजाना से कुछ देर बात की और फिर फोन ऑफिसर को थमा दिया.

ऑफिसर ने दुजाना से अपने मां-बाप के बारे में सोचने को कहा. इस पर दुजाना ने कहा-

दुजाना- मां बाप तो उसी दिन मर गए जिस दिन मैं उन्हें छोड़ कर आया.

ऑफिसर ने कहा कि भारतीय सुरक्षाबल पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ करने वाले आतंकियों के खून से अपने हाथ गंदे नहीं करना चाहती. भगवान किसी को चोट पहुंचाना नहीं चाहता. अल्लाह सबके लिए एक है. इस पर दुजाना ने जवाब दिया-

दुजाना- अगर वो आपके और मेरे लिए एक है, तो फिर घर के अंदर आएं और मुझसे मुलाकात करें.

ऑफिसर ने दुजाना को समझाने की काफी कोशिश की और उससे कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद में शामिल न करने की भी अपील की. लेकिन इन सब का उस पर कोई असर नहीं पड़ा और उसने फोन काट दिया.

घाटी में लंबे समय से अशांति फैली हुई है. आए दिन आतंकियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ की खबरें सामने आ रही हैं. सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस दोनों मिलकर आतंकवाद को रोकने की पुरजोर कोशिश कर रही है. लेकिन फिर भी इस पर लगाम लगा पाना मुश्किल है.

इसका सबसे बड़ा कारण है युवाओं का आतंकी समूहों के संपर्क में आना. आतंकी संगठनों के संपर्क में आने वाले युवाओं का कुछ इस कदर ब्रेन वॉश किया जाता है कि वो अपने माता-पिता तक को भूल जाते हैं. जिहाद का जुनून इन पर आखिर कैसे इतना हावी हो जाता है कि इन्हें अपनी जान की भी परवाह नहीं रहती.

बुरहान वानी हो या हाल में मारा गया लश्कर का टॉप कमांडर अबु दुजाना. ये सभी युवा पढ़े लिखें हैं. यहां तक की बुरहान वानी के पिता तो प्रिंसिपल थे.

आईएसआईएस, लश्कर और हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों द्वारा युवाओं के ब्रेन वॉश करने के कई मामले हैं. आतंक की राह चुनने वाले कई युवाओं ने बाद में खुलासे किए हैं कि कैसे वो जिहाद की राह निकल पड़े. इनमें से ज्यादातर युवाओं को जब तक होश आता है, तब तक वो आतंक के दलदल में गहरे फंस चुके होते हैं. खूंखार आतंकी अबु दुजाना का भी उसी तरह से ब्रेन वॉश किया गया था.

हाल में पत्थरबाजी की घटना के बीच एनआईए को नई जानकारी भी मिली. आमतौर पर पत्थरबाजी करने वाले कश्मीरी युवकों की सोशल मीडिया एक्टिविटी की जांच करने पर पाया गया कि इसमें 28 व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल किया गया. ये सभी ग्रुप पाकिस्तान से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने बनाए हैं.

इसके कुछ मेंबर सीमा पार के ही रहने वाले हैं. इसमें जमात-उद-दावा के आतंकी शामिल हैं. पिछले एक साल में इस 28 व्हाट्सऐप ग्रुप में 48 कश्मीरी युवाओं के नंबर मिले हैं, जो हर एनकाउंटर की जगह पत्थरबाजों को एकत्रित करने का काम करते हैं. ये 48 युवा एनकाउंटर की जगह के आस-पास के लोकल और मिडिल लेवल के हुर्रियत नेताओं से बात करते हैं. उनके फेसबुक एकाउंट को भी देखकर जानकारी मिलती है कि उनका संबंध आतंकी नेताओं और पत्थरबाजों से है.

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