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लड़कियों को शक्कर-पेट्रोल समझने वाली सड़ांध

अबू आजमी का यह बयान एक व्यक्ति का बयान नहीं है, यह एक मानसिकता की सड़ांध है.

Updated On: Jan 03, 2017 08:46 PM IST

Krishna Kant

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लड़कियों को शक्कर-पेट्रोल समझने वाली सड़ांध

नववर्ष के अवसर पर बेंगलुरु शहर की सड़कें महिला सुरक्षा का सपना देख रही आंखों के लिए कब्रगाह बन गईं. महिलाओं के साथ भीड़ द्वारा सामूहिक छेड़छाड़ का शायद पहला उदाहरण पेश किया गया. पुलिस की मौजूदगी में मर्दों की भीड़ ने महिलाओं पर भद्दे कमेंट किए, छेड़छाड़ कीं, अश्लील हरकतें की.

अखबारों में मदद की गुहार लगातीं युवतियों की तस्वीरें भी छापी हैं. उस भयानक दृश्य की कल्पना करके मन सिहर उठता है कि महिलाएं सरेआम सड़कों पर रो रही हैं, मदद की गुहार लगा रही हैं, जूते-चप्पल हाथ में लेकर भाग रही हैं. पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि इस संबंध में कोई शिकायत ही दर्ज नहीं हुई.

बेंगलुरु के एमजी रोड पर हुई सामूहिक छेड़छाड़ के दौरान महिला पुलिसकर्मी से बचाव की गुहार लगाती युवती. (फोटो साभार: बेंगलुरु मिरर)

बेंगलुरु के एमजी रोड पर हुई सामूहिक छेड़छाड़ के दौरान महिला पुलिसकर्मी से बचाव की गुहार लगाती युवती. (फोटो साभार: बेंगलुरु मिरर)

इस राष्ट्रीय शर्म पर नेताओं के बेशर्मी भरे बयान भी आने शुरू हो गए हैं. सपा नेता अबू आजमी के मुताबिक, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के लिए महिलाएं ही जिम्मेदार हैं.

'अबू आजमी की बेकाबू जबान'

समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने भी कुछ समय पहले बलात्कार पर बयान दिया था कि लड़कों से गलती हो जाती है. अबू आजमी समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र के प्रमुख हैं. वे मर्द मुलायम सिंह के मुखारविंद से निकले इस 'परम सत्य' को ही आगे बढ़ाते दिख रहे हैं. आजमी का कहना है कि 'अगर मेरी बहन-बेटी सूरज डूबने के बाद गैर मर्द के साथ 31 दिसंबर मनाए और उसका भाई या पति उसके साथ नहीं है तो यह ठीक नहीं है.'

सड़कों पर शारीरिक तौर पर छेड़छाड़ करने वाले उन पुरुषों से दो कदम आगे निकलते हुए अबू आजमी ने कहा, 'अगर कहीं पेट्रोल होगा और आग आएगी तो आग लगेगी ही. शक्कर गिरी होगी तो चींटी वहां जरूर आएगी. मेरी बात से बहुत से लोग नाराज होंगे लेकिन यही सच है.'

Agar kahin petrol hoga aur aag aaegi to aag lagegi hi. Shakkar giri hogi to cheeti wahan zarur aaegi: Abu Azmi on his earlier statement pic.twitter.com/3xbXhDo99e

अबू आजमी ने टीवी चैनल टाइम्स नाउ से कहा, अगर रेप हो रहे हैं, छेड़खानी हो रही है और पुलिस इसे नहीं रोक पा रही है तो हमें इसे रोकने के बारे में सोचना चाहिए. इसके लिए जरूरी है उनके पास महिलाओं की उपलब्धता न हो. मैं जीते जी औरतों का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता. अगर लड़के गलत रास्ते पर जा रहे हैं तो लड़कियों को प्रिकॉशन लेना चाहिए. दुबई, कुवैत और सऊदी में कानून बहुत सख्त है. वहां ऐसी घटनाएं नहीं होती और रात में लड़की इस तरह घूमती भी नहीं हैं.'

आजमी मध्ययुग में जी रहे हैं

अबू आजमी महिलाओं को दिन डूबते ही घर के अंदर हांकना चाहते हैं. वे दुबई, कुवैत और सऊदी की तरह उन्हें नकाब से ढंकी गठरी के रूप में पतियों के संरक्षण में देखना चाहते हैं. वे महिलाओं को पेट्रोल और शक्कर बता रहे हैं जिनकी उपलब्धता मात्र आग लगाने या चींटे इकट्ठा करने के लिए काफी है. वे सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देने की हिमाकत कर रहे हैं और सबसे दिलचस्प यह है कि ऐसे बयान देकर वे आराम से हैं.

इसे भी देखें: अबु आज़मी के बेतुके बयान पर नोटिस

अबू आजमी को यह समझना चाहिए कि नई पीढ़ी की युवतियां उन्हें शक्कर समझने वाले ऐसे चीटों को मसल देना चाहती हैं. अबू आजमी जब यह बयान दे रहे थे तब मैं तमाम फेसबुक यूजर्स की वॉल पर था. युवतियां अपने मां बाप से लेकर सत्ता तक से सवाल कर रही हैं. 70 साल तक आजादी का स्वाद चख चुके देश को अब दुबई, कुवैत और सऊदी बनाने का सपना पूरा नहीं होगा. वे मध्ययुग में जी रहे हैं.

राज्य के गृहमंत्री भी कौन से कम हैं?

मुश्किल यह है कि 'महाजनो येन गता: स पन्था'. बड़े लोग जिस राह पर जाते हैं, साधारण जन भी उसी रास्ते पर चलते हैं. अबू आजमी मध्य युग लौटने के इच्छुक अकेले व्यक्ति नहीं हैं.

जिस कर्नाटक में यह भयानक नंगई हुई, उसी राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने भी फरमाया है कि इस घटना के लिए 'युवाओं के रहन-सहन संबंधी ‘पश्चिमी तौर-तरीके’ जिम्मेदार हैं. उनके मुताबिक 'यह सोच-विचार के अलावा कपड़े पहनने के तरीके' की वजह से हुआ.

सोच-विचार, रहन-सहन, पश्चिमी परिधान आदि बहाना बनाकर आप यौन हिंसा पर तर्क कब तक पेश करेंगे? पांच साल और तीन साल की बच्चियों के बलात्कार के पीछे कौन से पहनावे की भूमिका होती होगी? यह कड़वा सच हमें स्वीकार करना चाहिए कि हमारी संस्कृति के मूल में महिला हिंसा है, जिसे अबू आजमी जैसी मानसिकताओं ने हमेशा सही ठहराया है.

चारों ओर हो रही है निंदा

डीयू के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा, 'कर्नाटक के गृहमंत्री का बयान यौन हिंसा की संस्कृति को संरक्षण देता है. यह यौन हिंसा से बड़ा अपराध है. अगर मुख्यमंत्री पर उन्हें बर्खास्त करने का दबाव नहीं बन पाता तो यह भारत के स्त्री-आन्दोलन की बड़ी हार होगी. ऐसे बयानों को हंस कर टाल देने वाला समाज यौन हिंसा का पालन पोषण करने वाला समाज है . वह लडकियों का सड़कों पर निकलना बंद करना चाहता है जिससे कि अंधेरे तहखानों में उन्हें आसानी से शिकार बनाया जा सके.'

महिला आयोग ने मांगा मंत्री का इस्तीफा 

इस घटना की महिला आयोग ने निंदा करते हुए गृहमंत्री के बयान के लिए उनके इस्तीफे की मांग की है. आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने कहा,

‘गृहमंत्री की ओर से ऐसा बयान अस्वीकार्य है. मैं इस मंत्री से सवाल करना चाहती हूं कि क्या भारतीय पुरुष इतने गिरे हुए और कमजोर हैं कि किसी समारोह के दिन महिलाओं को पश्चिमी कपड़ों में देखकर बेकाबू हो जाते हैं.'

कुमारमंगलम ने कहा, 'ये भारतीय पुरुष महिलाओं का सम्मान करना कब सीखेंगे. मंत्री को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए.’

जेएनयू के शोधछात्र ताराशंकर ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी, 'जरा सोचिए कि ये सामूहिक हिम्मत कहां से आती होगी? कैसे सैकड़ों लड़के बिना एक दूसरे को जाने, आपस में एक अनकही सहमति बनाते हुए सैकड़ों लड़कियों को मोलेस्ट करते हैं? नशे में धुत्त होना एक बहाना था और नये साल की रात महज एक मौका, असल तो उन युवाओं के अंदर पहले से मौजूद सेक्सिस्ट, स्त्रीद्वेशी, लड़कियों को सेक्स ऑब्जेक्ट मानने वाली सोच थी. सोचो उस समय वो सार्वजानिक सड़कें कैसे एक खौफनाक स्पेस में बदल गईं. कैसे वो 'हाइली एजुकेटेड यूथ' से भरा शहर अचानक शोहदों के दड़बे में बदल गया! कुछ तो है जो देश के बहुतायत युवाओं में बहुत गहरे सड़ा हुआ है!'

इन्हें शक्कर, पेट्रोल और लड़की में फर्क नहीं पता

पत्रकार संध्या द्विवेदी ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा, 'लड़कियां सूरज ढले क्या, दिन में भी न निकलें. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. माने अगर लड़कियां सड़क पर आएंगी ही नहीं तो बलात्कार भी नहीं होंगे, छेड़छाड़ नहीं होगी. अब ऐसी बयानबाजी पर गुस्सा कम नहीं आता. ऐसे लोगों को म्यूजियम में रखवा देना चाहिए. लोग देखने आएंगे और कहेंगे देखो ये उस प्रजाति से हैं जिन्हें आज तक शक्कर, पेट्रोल और लड़की में फर्क नहीं पता.'

अबू आजमी वही व्यक्ति हैं जो कभी शादी से पहले संबंध बनाने वाली लड़कियों को फांसी देने की बात कह रहे थे. उनके इस बयान पर उनकी बहू आयशा टाकिया का कहना था कि मैं शर्मिंदा हूं. अबू आजमी को इल्म नहीं है कि जब वे एक राजनेता की हैसियत से ऐसी बयानबाजी करते हैं तो उनकी बहू के साथ पूरी पीढ़ी शर्मिंदा होती है. ऐसे बयान राष्ट्रीय शर्म की सूची में दर्ज होते हैं.

अबू आजमी का यह बयान एक व्यक्ति का बयान नहीं है, यह एक मानसिकता की सड़ांध है. इसे दूर करने में वक्त लगेगा, लेकिन इसका समय आ चुका है.

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