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सदियों पुरानी टूटी परंपरा, ज्योतिर्लिंग को पूरा ढक कर हुई भस्म आरती

सोनी ने कहा कि अब प्रत्येक दर्शनार्थी को केवल 500 मिलीलीटर RO पानी ही जलाभिषेक के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है

Bhasha Updated On: Oct 29, 2017 06:33 PM IST

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सदियों पुरानी टूटी परंपरा, ज्योतिर्लिंग को पूरा ढक कर हुई भस्म आरती

सदियों पुरानी पंपरा के विपरीत रविवार सुबह उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के ज्योतिर्लिंग को भस्म आरती के दौरान सूती कपड़े से पूरा ढंका गया. सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग को क्षरण से रोकने के लिए भस्म आरती के दौरान ढंकने का निर्देश दिया था.

शुक्रवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भगवान महाकालेश्वर में स्थित देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक के क्षरण को रोकने के लिए इसकी पूजा-अर्चना संबंधि नए निर्देश जारी किए थे. इनमें मुख्यतौर पर ज्योतिर्लिंग की सुबह होने वाली भस्म आरती के वक्त इसे सूती कपड़े से पूरा ढंकने तथा इसके जलाभिषेक के लिए प्रति दर्शनार्थी केवल 500 मिलीलीटर RO पानी का इस्तेमाल करने के निर्देश शामिल हैं.

महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रदीप सोनी ने कहा, 'हमने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए हैं. सदियों से यहां पवित्र राख से की जाने वाली भस्म आरती के दौरान ज्योतिर्लिंग को आधा कपड़े से ढंका जाता रहा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब शनिवार से भस्म आरती के दौरान ज्योतिर्लिंग को पूरा कपड़े से ढंका जा रहा है.’

सोनी ने कहा कि अब प्रत्येक दर्शनार्थी को केवल 500 मिलीलीटर RO पानी ही जलाभिषेक के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है और शाम 5 बजे के बाद ज्योतिर्लिंग की केवल शुष्क पूजा की ही अनुमति दी गई है.

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी आशीष पुजारी ने कहा कि यह सदियों पुरानी परंपरा थी, 'भस्म आरती सदियों पुरानी परंपरा है और पहली दफा सुबह होने वाली यह आरती ज्योतिर्लिंग या शिवलिंग को पूरी तरह कपड़े से ढंक कर की गई. यह उपाय शिवलिंग को क्षरण से बचाने के लिए किए जा रहे हैं.’

महाकाल मंदिर के ज्योतिर्लिंग को क्षरण से रोकने के लिए दायर की गई एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 25 अगस्त को इसकी जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी.

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