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आखिर आरुषि को किसने मारा? 9 साल के बाद भी नहीं मिला जवाब

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने इस मामले में तलवार दंपति को बाइज्जत बरी तो कर दिया लेकिन कई सवालों के जवाब अब भी नहीं मिल पाए हैं

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey Updated On: Oct 13, 2017 10:53 PM IST

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आखिर आरुषि को किसने मारा? 9 साल के बाद भी नहीं मिला जवाब

आरुषि को किसने मारा?  नौ साल का वक्त और देश की सबसे सक्षम और भरोसेमंद एजेंसी सीबीआई की दो-दो टीमों की जांच के बाद भी, देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री से पर्दा नहीं उठ सका है. इलाहाबाद हाइकोर्ट ने इस मामले में तलवार दंपति को  बरी तो कर दिया लेकिन कई सवालों के जवाब अब भी नहीं मिल पाए हैं.

नोएडा के जलवायु विहार में तलवार दंपति के घर में कातिल की एंट्री कैसे हुई? नौकर हेमराज की लाश छत पर डालने के बाद सीढ़ियों का ताला किसने लगाया?  उस ताले की चाबी कहां गई? हेमराज की लाश के पास खून से सने हाथ और जूतों के निशान किसके थे? घर में मिली शराब की बोतलों और तीन गिलासों पर किसकी उंगलियों के निशान थे? आरुषि के कमरे के बगल के कमरे में सोए तलवार दंपति ने कोई आवाज कैसे नहीं सुनी? आरुषि के लैपटॉप का इंटरनेट कई बार ऑन-ऑफ कैसे हुआ? मौत के बाद क्राइम सीन के साथ किसने छेड़-छाड़ की? आरुषि-हेमराज के इस डबल मर्डर का हथियार कहां गया? डबल मर्डर के बाद हेमराज का फोन किसने उठाया? ये कुछ ऐसे सवाल है जो इलाहबाद हाइकोर्ट के फैसले के बाद भी अपने जवाब तलाश रहे हैं.

सुलझने की बजाय उलझती चली गई गुत्थी

16 मई 2008 की सुबह जब नोएडा के जलवायु विहार के L-32 फ्लैट में आरुषि का लाश मिली थी, उस वक्त हत्या का शक तलवार दंपति के गायब नौकर हेमराज पर था. लेकिन अगले ही दिन इसी फ्लैट की छत पर हेमराज की भी लाश मिली. इसके बाद ये डबल मर्डर की मिस्ट्री उलझती ही गई.

मौत के वक्त 14 साल की रही आरुषि की हत्या अगर आज भी हमारे देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बनी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी जांच एजेंसियों और खासतौर से सीबीआई के ऊपर ही है. सीबीआई को दोनों टीमों की अलग-अलग जांच की लाइन और उसके अधिकारियों की आपसी खींचतान के चलते यह केस इतना उलझ गया कि एक ही जांच एजेंसी ने इस मामले की तफ्तीश में दो अगल-अलग थ्योरी पेश कर दी.

Dentists Rajesh Talwar (front C) and wife Nupur (back C, in shawl) are taken to a court in Ghaziabad on the outskirts of New Delhi November 25, 2013. An Indian court on Monday found the dentist couple guilty of murdering their 14-year-old daughter and a servant five years ago, in a dramatic finale to a case that transfixed the country and tapped unease on both sides of the rich-poor divide. Aarushi Talwar was found with her throat slit at the family home in Noida, an affluent town of new shopping malls and offices near Delhi, in 2008. A day later, the body of the family servant, Hemraj, was discovered. Rajesh and Nupur Talwar were convicted in a local court in Ghaziabad, near Noida, and remanded in custody ahead of sentencing on Tuesday. REUTERS/Stringer (INDIA - Tags: CRIME LAW) - GM1E9BP1NXV01

आरुषि के पिता राजेश तलवार

सीबीआई की दूसरी टीम की तफ्तीश में ऐसे कई सवालों के जवाब खोजने की कोशिश ही नहीं की गई, जो इस केस में अहम कड़ी साबित हो सकते थे. अपनी तफ्तीश में सीबीआई वैज्ञानिक साक्ष्यों की बजाय परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ही तलवार दंपति के खिलाफ दलील देती रही. इसे अदालत ने पर्याप्त नहीं माना और अभियुक्तों को बरी कर दिया.

आरुषि मर्डर केस में सबूतों और साक्ष्यों को इतनी बार तोड़ा-मरोड़ा गया कि अदालत के सामने कोई साफ तस्वीर पेश ही नहीं हो सकी. अलग-अलग जांच एजेंसियो ने मामले को इस कदर उलझा दिया आरुषि के असल हत्यारे का पता ही नहीं चल सका.

यूपी पुलिस ने पहनाया था ऑनर किंलिंग का जामा

17 मई,  2008 को हेमराज की लाश मिलने के बाद यूपी पुलिस ने मामले को ऑनर किंलिंग से जोड़ दिया. पुलिस ने अपनी जांच में शक के दायरे में तलवार दंपति को ले लिया था. 21 मई को दिल्ली पुलिस को भी इस जांच में शामिल किया गया और 23 मई को डबल मर्डर के आरोप में आरुषि के पिता को हिरासत में भी लिया गया.

यूपी पुलिस ने इसे ओपन एंड शट केस बनाते हुए इसे ऑनर किलिंग का जामा पहना दिया. अपनी थ्योरी को सही साबित करने के लिए 14 साल की बच्ची आरुषि के चरित्र पर भी पुलिस ने सवाल उठाए. यूपी पुलिस के इस खुलासे के बाद जांच जब सीबीआई के पास आई तो उम्मीद बंधी शायद इस मामले में कोई नई सच्चाई सामने आएगी.

सीबीआई ने इस मामले में एक नई थ्योरी पेश करते हुए इस डबल मर्डर को और ज्यादा उलझा दिया. सीबीआई की जांच में शक की सुई तलवार दंपति के एक और नौकर कृष्णा पर अटक गई. लेकिन तब भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए.

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सीबीआई की अंदरुनी खींचतान के बाद इसकी जांच एक नई टीम को दी गई.  जिसने यूपी पुलिस की ही थ्योरी पर काम करते हुए अदालत में बड़ी चतुराई के साथ एक ऐसी क्लोजर रिपोर्ट जमा की, जो अपने आप में तलवार दंपति के खिलाफ चार्जशीट के समान थी. अदालत ने इसे चार्जशीट मानकर ट्रायल शुरू किया और 2013 में तलवार दंपति को अपनी बेटी की हत्या का कसूरवार करार देकर उम्रकैद की सजा सुना दी. लेकिन सीबीआई की यह खोखली जांच हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान खरी नहीं उतर सकी और तलवार दंपति बरी हो गए.

इस केस में सबकुछ हुआ. संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई, मरने वाले का चरित्र हनन हुआ, मीडिया ट्रायल हुआ, मामले में नौकरों को फंसाकर अधिकारियों ने अपनी पीठ भी थपथपाई, नारको टेस्ट और लाई डिटेक्टर टेस्ट भी हुए, सीबीआई कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में तारीखें भी पड़ीं, निचली अदालत से सजा भी हुई  लेकिन नहीं हुआ तो बस इंसाफ. इंसाफ उस 14 साल की बच्ची के साथ जो आज अगर जिंदा होती 23 साल की होती.

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