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लाभ का पद मामला: आप के 20 विधायक अयोग्य घोषित, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति ने लाभ का पद मामले में आप के 20 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दी

FP Staff Updated On: Jan 21, 2018 04:36 PM IST

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लाभ का पद मामला: आप के 20 विधायक अयोग्य घोषित, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर कर लिया है जिसमें लाभ का पद मामले में आप के 20 विधायकों को अयोग्य करार देने की बात कही गई थी. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आप के 20 विधायक अयोग्य घोषित हो गए हैं. इसी के साथ दिल्ली में इन 20 सीटों पर उपचुनाव का रास्ता करीब-करीब साफ हो गया है. इससे पहले 21 आप एमएलए पर केस थे. लेकिन जरनैल सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

इससे पहले शुक्रवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होनी है, लेकिन इससे पहले राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के फैसले पर मुहर लगा दी है.

इस मामले पर आप नेता गोपाल राय की भी प्रतिक्रिया आ गई है. गोपाल राय ने कहा 'हम राष्ट्रपति से मिलने की उम्मीद कर रहे थे ताकि हमें खुद को पेश करने का मौका मिले. अब हमें यह खबर मिल गई है. आप हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी.'

चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी थी. जिसमें लाभ का पद मामले में 20 आप विधायकों को अयोग्य करार दिया गया था. अब इस पर राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है. इस मामले पर कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा 'आप को बीजेपी और चुनाव आयोग द्वारा मदद की जा रही है. यह फैसला 3 हफ्ते की देरी से लिया गया है. यदि यह फैसला 22 दिसंबर से पहले आता तो यह 20 विधायक राज्यसभा में वोट नहीं डाल सकते थे.'

अलका लांबा ने सफाई देते हुए कहा 'दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें बोलने का मौका दिए बिना, राष्ट्रपति ने इस तरह की जल्दबाजी में फैसला लिया. संवैधानिक संस्थानों का उपयोग केंद्र सरकार कर रही है. हमें संविधान पर पूरा भरोसा है. हमारे लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दरवाजे खुले हैं.'

क्या है पूरा मामला

मामला 2016 में शुरू हुआ, तब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली विधानसभा में उस बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिसमें पार्लियामेंट सेक्रेटरी के पदों को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट से बाहर रखने का फैसला किया गया था. आलोचना के बीच आप ने अपने विधायकों का यह कहकर बचाव करने की कोशिश की कि उन्होंने किसी भी तरह का लाभ नहीं लिया है और सारे अपॉइंटमेंट कानूनी हैं.

संसदीय सचिवों ने इलेक्शन कमीशन में  अपनी बात रखते हुए साफ किया कि उन्हें किसी भी तरह का आर्थिक लाभ नहीं मिला है. उन्हें कोई ऑफिस या आधिकारिक इस्तेमाल के लिए कार भी नहीं दी गई हैं. संसदीय सचिवों की नियुक्ति का बचाव करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि ये सभी मुफ्त काम कर रहे हैं.

इन 20 विधायकों पर गिरी गाज

1. प्रवीण कुमार, जंगपुरा

2. शरद कुमार चौहान, नरेला

3. आदर्श शास्त्री, द्वारका

4. मदन लाल, कस्तूरबा नगर

5. शिव चरण गोयल, मोती नगर

6. सरिता सिंह, रोहतास नगर

7. नरेश यादव, महरौली

8. जरनैल सिंह, तिलक नगर

9. राजेश गुप्ता, वजीरपुर

10. अलका लांबा, चांदनी चौक

11. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर

12. संजीव झा, बुराड़ी

13. कैलाश गहलोत, नजफगढ़

14. विजेंद्र गर्ग, राजिंदर नगर

15. राजेश ऋषि, जनकपुरी

16. अनिल कुमार वाजपेयी, गांधीनगर

17. सोमदत्त, सदर बाजार

18. सुखबीर सिंह दलाल, मुंडका

19. मनोज कुमार, कोंडली

20. अवतार सिंह, कालकाजी

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