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आप को पंजाब में मिली हार का डर दिल्ली में सताने लगा?

केजरीवाल ने पहले से ही ईवीएम वोटिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Mar 15, 2017 09:03 AM IST

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आप को पंजाब में मिली हार का डर दिल्ली में सताने लगा?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आगामी दिल्ली नगर निगम के चुनावों से पहले ईवीएम वोटिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पंजाब चुनाव में मिली करारी हार के बाद अरविंद केजरीवाल का यह बयान भविष्य की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि ईवीएम पर सवाल खड़ा कर अरविंद केजरीवाल भविष्य में घटित होने वाली किसी चुनावी अनहोनी पर औजार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.

अरविंद केजरीवाल ने एमसीडी चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग की है. अरविंद केजरीवाल ने इस बाबत चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा है. लेकिन चुनाव आयोग ने ईवीएम वोटिंग के जरिए ही दिल्ली नगर निगम का चुनाव कराने का एलान कर दिया है.

दिल्ली नगर निगम चुनाव को लेकर पार्टियों में बयानबाजी शुरू हो गई है. नए-नए वायदों के साथ राजनीतिक पार्टियां दिल्ली एमसीडी चुनाव में उतर रही हैं. पिछले कुछ सालों से राजनीतिक दलों में एक आम परिपाटी-सी बन गई है कि जब कोई चुनाव आने वाला होता है तो सरकारें और पार्टियां लोक लुभावन वायदों के साथ जनता के बीच में आती है.

अक्सर देखा गया है कि चुनावों के समय राजनीतिक पार्टियां आक्रामक तरीके से रियायतें और योजनाओं की घोषणाएं कर देती हैं, पर चुनाव के बाद उन घोषणाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता.

दिल्ली सरकार ने भी इस साल के अपने बजट में जिस तरह की घोषणाएं की हैं, उन पर आने वाले नगर निगम चुनावों की झलक साफ दिखाई दे रही है. दिल्ली सरकार ने करों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, बल्कि कुछ करों में भारी कटौती कर दी है. पिछले साल दिल्ली सरकार ने 41 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था, जबकि इस बार 48 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया है. इस बार के बजट में खास कर शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखा गया है.

आप सरकार के वायदे कहां तक पहुंचे

अरविंद केजरीवाल

फोटो: पीटीआई

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली को लेकर कई घोषनाएं की थी. दिल्ली वासियों को वाई-फाई से लेकर पूरे दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही गई थी, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी उन घोषणाओं की कोई टोह लेने वाला कोई नहीं है.

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 1.5 लाख शौचालयों के निर्माण की बात की थी, लेकिन फरवरी 2017 तक 957 शौचालय ही बन पाए है. 3,318 शौचालयअभी बन रही हैं और इस साल के अंत तक 1,760 शौचालय ही और बन पाएंगे.

महिलाओं पर हो रहे लगातार अत्याचार को देखते हुए अरविंद केजरीवाल के आप ने शहर में 10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही थी, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है.

दिल्ली की यातायात सेवा को सुविधाजनक बनाने के लिए 3000 नई डीटीसी की बसें खरीदने की बात की गई थी, लेकिन अभी तक सिर्फ 250 नई क्लस्टर बसें ही आ सकी हैं.

जिस मोहल्ला क्लीनिक को लेकर अरविंद केजरीवाल की वाहवाही हो रही है, उस मोहल्ला क्लीनिक के निर्माण के रफ्तार में भी धीमी देखी जा रही है. दिल्ली की जनता के लिए 2016 तक 1000 मोहल्ला क्लीनिक मिलने थे लेकिन 107 क्लीनिक ही बन पाए हैं.

यमुना नदी की सफाई को लेकर भी अरविंद केजीवाल ने कई घोषणाएं की थीं, पर आज तक कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं. यमुना रिवर फ्रंट और छठ घाटों को बनावकर यमुना की सफाई की बात कही जा रही है.

 

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