live
S M L

नोटबंदी पर पीएम मोदी का मजाक उड़ाना मूर्खता

नोटबंदी की क्षमता पर सवाल खड़ा करके वे या तो अपनी मूर्खता का परिचय दे रहे हैं.

Updated On: Nov 18, 2016 12:19 PM IST

Dinesh Unnikrishnan

0
नोटबंदी पर पीएम मोदी का मजाक उड़ाना मूर्खता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी के फैसले की तारीफ और आलोचना दोनों हो रही है.

8 नवंबर की रात 9 बजे जब पूरी दुनिया की नजरें जब ट्रम्प और हिलेरी की लड़ाई में व्यस्त थी. ठीक उसी वक्त भारतीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय टीवी पर 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान करके सुर्खियां बदल दीं. सरकार का यह फैसला काले धन को खत्म करने और जाली नोटों के जरिए आतंक की फंडिंग पर नकेल कसने के लिए लिया गया.

इस नोटबंदी को दो तरह से देखा जा रहा है.

पहले नजरिए से आप इस पूरी प्रक्रिया से होने वाले फायदों को खारिज कर सकते हैं. आप इसे नकद के भरोसे काम चलाने वाले आम आदमी के लिए मुसीबत बता सकते हैं.

इस नजरिए के तरफदार आपको ये तर्क दे सकते हैं.

1. काला धन एक बेलगाम जानवर है और इस पर सिर्फ नोटबंदी की प्रक्रिया से लगाम नहीं कसी जा सकता. काले धन के जमाखोर बोरे भर कर नकदी लिए नहीं बैठे हैं. उन्होंने गलत ढंग से अर्जित आय को सोना, रियल एस्टेट, बेनामी संपत्तियों और डॉलर में पहले से ही बदल रखा है. इस कारण यह मूर्खतापूर्ण सोच है कि मोदी कि इस घोषणा के बाद व्यवस्था से पूरा काला धन बाहर हो जाएगा.

वे यह कहेंगे कि काले धन कि अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है. रिजर्व बैंक के अनुसार उपलब्ध कुल कैश, जो कि करीब एक लाख बासठ हजार एक सौ छत्तीस करोड़ रुपए के मूल्य के हैं, का सिर्फ एक चंक ही काले धन के कारोबार में लगा है. नोटबंदी से कालेधन पर प्रहार नाम मात्र को ही होगा. सरकार का यह फैसला समस्या का हल कतई नहीं है.

2. काले धन को सफेद करने से रोकने के लिए सरकार के उठए कदम नाकाफी साबित हो सकते हैं. काला धन रखने वाले छोटी किश्तों में अपना काले को सफेद कर सकते हैं. इन्हें अलग-अलग बैंकों से नोट बदलवाने वाले दलाल आसानी से मिल जाएंगे. कमीशनखोरी का एक नया धंधा शुरु हो जाएगा.

3. काले धन को रोकने के लिए सरकार अगर गंभीर होती तो वह 500 और 1000 के नोट बंद करके ज्यादा बड़ी मुद्रा 200 रुपए के नोट लाती ही नहीं. काले धन वालों के लिए यह और सुविधाजनक हो जाएगा. सरकार को नए नोट लाने ही नहीं थे. उसे लोगों को सीधे प्लास्टिक मनी और ई-पेमेंट की आदत डालने पर मजबूर करना चाहिए था. सरकार का यह कदम समस्या खत्म करने के नाम पर नई मुसीबत खड़ी करने जैसा होगा.

दूसरा नजरिया है नोटबंदी के समर्थकों का. पीएम मोदी के इस कदम की तारीफ में वो यह तर्क देंगे.

1.यह बात बिलकुल सही है कि काला धन एक बेलगाम  खूंखार जानवर की तरह है. लेकिन कभी तो इस पर नकेल कसनी होगी. मालिक को धीरे-धीरे ही सही इस जानवर को अपने नियंत्रण में लाना होगा. मालिक जब चाहे तब वह बैठे, जब चाहे तब वह उठे. ठीक सर्कस के शेर की तरह. काले धन पर भी नियंत्रण करना होगा.

इस जानवर के साथ पहले के मालिकों ने या तो दोस्ती कर ली थी या फिर इससे बहुत डरे हुए थे. इसीलिए आज यह इतना खूंखार बन गया है.

देश में चल रही मुद्रा का 86 फीसद हिस्सा 500 और 1000 के नोटो का है. काला धन इन्हीं नोटो के रुप में  जमा होगा यह भी निश्चित है. अब इन नोटों के बंद होने से काले धन का कुछ हिस्सा खत्म तो हुआ है. लेकिन यह केवल शुरुआत है.

सरकार को चाहिए कि काले धन पर नकेल कसते के लिए अगले कदम के रुप में बेनामी संपत्ति और रियल स्टेट पर नकेल कसे. आयकर विभाग को और ज्यादा तेज गति से काम करने के लिए कहा जाए. यह मुश्किल जरुर है लेकिन साफ राजनीतिक मंशा हो तो इसे लागू किया जा सकता है.

RupeeSymbol825 तस्वीर : नेटवर्क 18

2. यह बात कुछ हद तक सही है कि नकद जमाखोरी करने वाले अपने नोट बैंकों से बदल सकते हैं. इसमें इनकी मदद करने वाले दलालों के लिए यह काम आसान नहीं होगा. मान लीजिए कि किसी के पास 10 करोड़ रुपए नकद हैं. इस रकम को बैंक में जमा करने के लिए उसे 2.5 लाख रुपए के 400 हिस्से करने होंगे. ऐसा करना आसान नहीं है. वो भी 30 दिसम्बर तक.

मान लीजिए कि वह ऐसा करने में सफल भी हो जाता है तो आयकर विभाग के अधिकारी भी आंख मूंदकर नही ंबैठे. उनके ऊपर भी सख्ती से नजर रखने का दबाव है.

3.  यह बात भी मानी जा सकती है कि नकली नोट छापने की मशीन दोबारा बनेगी. बाजार में नये नोट आते ही जाली नोटों का कारोबार करने वाले लोगों तक पहुंच जाएंगे. भारत में एक बार फिर जाली नोट चलाए जाएंगे यह भी निश्चित है. लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं होना चाहिए कि गंदगी को साफ न किया जाए.

जब तक यह दुनिया है तब तक बेईमान और जाली काम करने वाले बने रहेंगे. ऐसे लोग पहले भी थे, आज भी हैं  और भविष्य में भी नियमों को तोड़ने के तरीके निकालेंगे. लेकिन इनका काम मुश्किल तो किया ही जा सकता है.

भारतीय समाज हमेशा से नकद के भरोसे चलता आ रहा  है. देश में केवल कुछ ही शहरी इलाके हैं, जहां लेन-देन के लिए पूरी तरह ई-पेमेंट पर निर्भर हुआ जा सकता है. लेकिन गांव में  बसने वाले भारत के लिए रोजमर्रा की जिन्दगी बिना नकद के चलाना फिलहाल नामुमकिन है.

सरकार के इस कदम से बाजार पर कुछ सकारात्मक असर भी पड़ेगा. रातों-रात नोटबंदी होने से काला धन और जाली नोट कागज के टुकड़े में बदल गया है. इससे कुछ हद तक महंगाई पर लगाम लगेगी. असली खरीदार के लिए प्रॉपर्टी के दामों सुधरेंगे. अभी तक काले धन के चलते निवेशकों की संख्या ज्यादा थी और उपयोगकर्ताओं की काम. इसके चलते प्रॉपर्टी के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी देखी गई.

1978 के बाद काले धन की अर्थव्यवस्था पर यह सबसे बड़ा आघात है. भारत में कुल घरेलू उत्पाद का 71 फीसदी हिस्सा कालेधन के रुप में है.

किसी भी सरकार के लिए ऐसा अलोकप्रिय कदम उठाना आसान नहीं होता लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऐसे ही ठोस कदमों की उम्मीद थी. इससे उन्हें वोट बैंक की राजनीति में नुकसान भी हो सकता है. लेकिन अभी सरकार को काले धन को खत्म करने के लिए और कदम उठान  होंगे.

यह केवल शुरुआत है. नोटबंदी ने राजनीतिक फंडिंग करने वाले माफिया और प्रॉपर्टी बाजार में पैसा लगाने वाले माफिया की कमर तोड़ दी है. जब तक इस बात के ठोस सबूत न हो कि नोटबंदी के फैसले की जानकारी पहले से कुछ लोगों को अपने हित के लिए दे दी गई थी, तब तक इस पर सवाल उठाना बेवकूफी होगी.

नोटबंदी को लेकर सवाल करने वाले पूर्वाग्रह से ही ग्रस्त माने जाएंगे. आलोचक जो भी कहें अर्थव्यवस्था के लिए सरकार का यह कदम साहसी है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi