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आधार पर SC ने पूछा- 'एक देश, एक पहचान' से क्या दिक्कत है?

सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने कपित सिब्बल से पूछा कि 'एक देश, एक पहचान' के विचार से क्या दिक्कत है? आखिर हम सभी भारतीय हैं और इस पहचान पर हमें गर्व है

Updated On: Feb 08, 2018 10:46 AM IST

FP Staff

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आधार पर SC ने पूछा- 'एक देश, एक पहचान' से क्या दिक्कत है?

आधार की अनिवार्यता की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के एक सवाल के जवाब में कहा कि 'एक देश, एक पहचान' के विचार से आपको क्या दिक्कत है?

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा था कि वास्तविक मुद्दा 'एक देश, एक पहचान' के विचार से है, जिसका सुप्रीम कोर्ट को जांच करना चाहिए. उनका कहना था कि नागरिकों को आधार से सारी योजनाओं से जोड़ने के लिए मजबूर किया जाना सूचना के अधिकार के तहत सरकार को सशक्त बनाने का था. यहीं विचार आधार को अनिवार्य बनाने के लिए सबसे मजबूत था.

पांच जजों की संवैधानिक पीठ में शामिल जस्टिस अशोक भूषण आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं. नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और गोपनियता का हवाला देकर आधार की वैधता को चुनौती दी गई है. सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने कपित सिब्बल से पूछा कि 'एक देश, एक पहचान' के विचार से क्या दिक्कत है? आखिर हम सभी भारतीय हैं और इस पहचान पर हमें गर्व है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, जस्टिस भूषण के सवाल के जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा कि 'एक देश, एक पहचान' के विचार में सब कुछ गलत है. हम इस पर अदालत में बहस न ही करें तो अच्छा है. उन्होंने कहा कि मैंने कल ही एक कानूनी तर्क के तौर पर यह कहा था न कि एक राजनीतिक बयान के रूप में. भारतीय होना और इस पर गर्व करना ठीक है लेकिन इसके लिए आधार का होना अनिवार्य नहीं होना चाहिए. हमारे पास आधार नहीं रहेगा तब भी हम भारतीय ही रहेंगे.

बहस को राजनीतिक स्तर पर जाने से रोकते हुए जस्टिस एके सिकरी ने सिब्बल के तर्क पर कहा कि क्या आप यह कहना चाहते हैं कि एक देश, एक पहचान के विचार में यह मतलब नहीं है कि जिसके पास आधार नहीं होगा वह भारतीय नहीं रहेगा. जस्टिस सिकरी के तर्क को स्वीकारते हुए सिब्बल ने कहा कि मेरा मतलब था कि जिस तरह से मैं आधार नहीं हूं, उस तरह से आधार कार्ड भी मैं नहीं हूं

सिब्बल का मुख्य तर्क यह था कि जब कोई नागरिक शारीरिक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पहचान साबित करने में सक्षम है और उसे इसके खोने का डर भी कम है, क्योंकि इसे वो दोबारा पा सकता है. उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत विवरण डिजिटल दुनिया में आधार के माध्यम से जाता है और वह लीक हो जाए या चुरा लिया जाए तो उसे दोबारा हासिल करना संभव नहीं है. एक इंसान का सबसे मुल्यवान संपत्ति उसका व्यक्तिगत विवरण ही है.

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