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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आधार मेटाडेटा 6 महीने से ज्यादा नहीं होगा स्टोर

आधार एक्ट की वैधता पर सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा 'अब आधार एयर और ट्रेन से यात्रा करने पर भी अनिवार्य है. यह लिंकेज मेटाडेटा उपलब्ध कराता है जो किसी व्यक्ति को जीवनभर ट्रैक करने के लिए काफी है.'

Updated On: Sep 26, 2018 04:27 PM IST

FP Staff

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आधार मेटाडेटा 6 महीने से ज्यादा नहीं होगा स्टोर

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार की अनिवार्यता पर अपना फैसला सुनाया. पांच जजों की बेंच ने आधार पर कहा कि आधार का ऑथेंटिकेशन डेटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है. वहीं आधार एक्ट में डेटा 5 साल तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है.

इसके साथ कोर्ट ने आधार एक्ट का सेक्शन 2(d) भी पढ़ा जिसमें सरकारी अथॉरिटी को ट्रांजेक्शन का मेटाडेटा स्टोर करने के लिए कहा गया है. कोर्ट ने कहा कि केंद्र को डेटा प्रोटेक्शन पर एक मजबूत कानून की भी जरूरत है. पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन के लिए आधार की जरूरत नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार के बायोमीट्रिक डेटा की नकल नहीं की जा सकती. साथ ही कोई प्राइवेट पार्टी भी डेटा नहीं देख सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार का ऑथेंटिकेशन डेटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है. इसमें पीठ ने केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन उसने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया.

आधार एक्ट की वैधता पर सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा 'अब आधार एयर और ट्रेन से यात्रा करने पर भी अनिवार्य है. यह लिंकेज मेटाडेटा उपलब्ध कराता है जो किसी व्यक्ति को जीवनभर ट्रैक करने के लिए काफी है.'

पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया. हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल फोन का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं.

जस्टिस भूषण ने कहा कि बायोमिट्रिक डेटा में कुछ व्यक्तिगत सूचनाएं हैं और यदि कोई गड़बड़ी संभव है तो उसे रोकने की जरूरत है.

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