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SC के फैसले का हवाला देकर पति ने अफेयर को जायज ठहराया तो पत्नी ने लगा ली फांसी

आरोपी पति ने सुप्रीम कोर्ट के एडल्टरी पर सुनाए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस भी उसके खिलाफ एक्शन नहीं ले पाएगी. पति की इस बेरूखी से दुखी महिला ने शनिवार को फांसी लगा ली

Updated On: Oct 01, 2018 09:34 PM IST

FP Staff

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SC के फैसले का हवाला देकर पति ने अफेयर को जायज ठहराया तो पत्नी ने लगा ली फांसी

चेन्नई के एमजीआर नगर में एक महिला के घरेलू कलह में फांसी लगा लेने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि 24 वर्षीय इस महिला के पति ने उससे सुप्रीम कोर्ट के एडल्टरी को लेकर दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए अपने लव अफेयर (एक्सट्रा मैरिटल अफेयर) पर चुप रहने को कहा था.

पुलिस के मुताबिक, पुष्पलता ने 2 साल पहले अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर 27 साल के जॉन पॉल फ्रैंकलिन से प्रेम विवाह किया था. इस दंपति की एक संतान है.

कॉर्पोरेशन पार्क में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले फ्रैंकलिन को जब पता चला कि पुष्पलता को टीबी है, तो उसने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी. जब उसने पत्नी को इलाज के लिए पैसे देने से इनकार कर दिया, तो पुष्पलता ने फ्रैंकलिन के एक दोस्त से बात की, जिसने उसे फ्रैंकलिन की किसी और महिला के साथ बढ़ती नजदीकियों के बारे में बताया.

इनकी जानकारी होने पर पुष्पलता ने अपने पति को धमकी दी कि अगर वो उस महिला से अपने संबंध खत्म नहीं करता तो वो पुलिस में इसकी शिकायत करेगी. इस पर फ्रैंकलिन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस भी उसके खिलाफ एक्शन नहीं ले पाएगी. पति की इस बेरूखी से दुखी महिला ने शनिवार को फांसी लगा ली. पुलिस फ्रैंकलिन को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 150 साल पुराने एडल्टरी कानून को असंवैधानिक करार दिया था. विवाह से बाहर संबंध को अपराध बनाने वाली धारा 497 के खिलाफ लगी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि एडल्टरी को शादी से अलग होने का आधार बनाया जा सकता है लेकिन इसे अपराध नहीं माना जा सकता.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ में जस्टिस ए.एम खानविलकर, जस्टिस डी.वाय चंद्रचूड़, जस्टिस रोहिंगटन नरीमन और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल थी. इस निर्णय पर सभी जज एकमत हुए थे.

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