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सेना की छावनी में तब्दील हुई कश्मीर घाटी, महिला सुसाइड बॉम्बर का खतरा

पुलिस को इस बात की मजबूत इनपुट हैं कि एक 18 साल की गैर-कश्मीरी लड़की एक सुसाइड बॉम्बर के तौर पर कश्मीर में रिपब्लिक डे परेड में या उसके आसपास हमला कर सकती है, इसलिए घाटी छावनी में बदली नजर आ रही है

Sameer Yasir Updated On: Jan 25, 2018 06:31 PM IST

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सेना की छावनी में तब्दील हुई कश्मीर घाटी, महिला सुसाइड बॉम्बर का खतरा

गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले जम्मू और कश्मीर में कश्मीर घाटी छावनी में तब्दील हो गई है. सुरक्षा बलों ने किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए सैकड़ों की तादाद में चेकप्वॉइंट लगा दिए हैं. सख्त सुरक्षा इंतजाम आतंकियों की धमकियों के मद्देनजर किए गए हैं. आतंकियों ने राज्य कर्मचारियों और स्कूली लड़कियों को गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों से दूर रहने की चेतावनी दी है.

पूरा देश एक ओर 69वें रिपब्लिक डे को धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी सुरक्षा इंतजाम और हुर्रियत के बंद के आह्वान से कश्मीर डरा और सहमा हुआ है. कश्मीर घाटी के मार्केट पिछले दो दिनों से ही बंद हैं और दिन ढलने के साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट सड़कों से नदारद हो जाते हैं. एक दिन पहले ही शाम को कश्मीर के शोपियां जिले में एक टीनेजर शाकिर मीर की हत्या से हालात और बदतर हो गए हैं.

पुलिस का कहना है कि यह लड़का शोपियां के चायगुंड गांव में आतंकी गतिविधियों के विरोध में चलाए जा रहे अभियान में गड़बड़ी पैदा करने वाली भीड़ का हिस्सा था. इस अभियान में दो आतंकी मारे गए और यह लड़का क्रॉस-फायर में मारा गया. सुरक्षा बलों के इस बयान को पीड़ित का परिवार खारिज कर रहा है. परिवार वालों के आरोप हैं कि सुरक्षाबलों ने जानबूझकर उसे निशाना बनाया. इसके अलावा दो युवा लड़कियों को भी गोलियां लगीं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

पूरे घाटी में डर का माहौल

कश्मीर में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संदिग्ध आतंकियों का एक समूह दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में एक गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल को धमकाता दिखाई दे रहा है. वीडियो में अधिकारियों के सामने लड़कियों को नाचने के लिए मजबूर करने के खिलाफ ये आतंकी प्रिंसिपल को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं. आतंकी कह रहे हैं कि जो भी इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेता नजर आएगा उसे सबक सिखाया जाएगा और उनके घरों को जला दिया जाएगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

अशांत दक्षिण कश्मीर के सूत्रों ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि दर्जनों गावों में आतंकी चिट्ठियां फेंककर या मौखिक चेतावनी देकर गांववालों को धमका रहे हैं कि वे कार्यक्रमों में हिस्सा न लें. इस महीने सुरक्षाबलों पर हमलों को बढ़ाकर आतंकियों ने माहौल को और तनावग्रस्त बना दिया है. रिपब्लिक डे कार्यक्रमों की तैयारियों के बीच सुरक्षा बलों पर एक दिन में तीन ग्रेनेड हमले किए गए. इसके अलावा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण श्रीनगर-जम्मू हाइवे पर पंपोर के नजदीक एक आईईडी को निष्क्रिय कर दिया.

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हालांकि, इस तरह के राष्ट्रीय उत्सवों पर हमेशा ही आतंकी हमलों का खतरा रहता है, लेकिन कश्मीर के आईजी पुलिस, मुनीर खान के दफ्तर से जारी किए गए एक सर्कुलर से इस बार हालात की गंभीरता को समझा जा सकता है. सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों और कश्मीर की सिक्योरिटी विंग के प्रमुख को यह सर्कुलर भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि इस बात के मजबूत इनपुट हैं कि एक 18 साल की गैर-कश्मीरी लड़की एक सुसाइड बॉम्बर के तौर पर कश्मीर में रिपब्लिक डे परेड में या उसके आसपास हमला कर सकती है.

बुधवार को जारी किए गए संदेश में कहा गया है कि सभी को निर्देश दिया जाता है कि सभी महिलाओं की गहनतापूर्वक जांच की जाए और राष्ट्रविरोधी तत्वों के मंसूबों को नाकाम करने में अधिकतम सतर्कता बरती जाए. पत्र में कहा गया है कि संदिग्ध महिला घाटी में दाखिल हो चुकी है.

फ्लॉप शो से बचने के लिए सरकार कर रही दमखम की नुमाइश

फ्लॉप-शो से बचने के लिए सरकार ने सभी कर्मचारियों को रिपब्लिक डे कार्यक्रमों में शामिल होने का निर्देश दिया है. मुख्य कार्यक्रम श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित होगा. यहां पर पहली बार यह कार्यक्रम हो रहा है क्योंकि मुख्य स्थल बख्शी स्टेडियम में रिनोवेशन का काम चल रहा है. इसी तरह के कार्यक्रम सभी जिला मुख्यालयों पर भी होंगे जहां डिप्टी कमिश्नर राष्ट्रध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे.

Jammu And Kashmir Security- Reuters Image

चूंकि, हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, ऐसे में कश्मीर के कुछ हिस्सों में कुछ स्कूलों ने सरकारी आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है. राज्य कर्मचारी भी आतंकी हमलों की धमकियों के बीच सरकार के उन्हें जबरदस्ती आयोजनों में शामिल होने के निर्देश दिए जाने से नाराज हैं. अनंतनाग जिले में पांच निजी स्कूलों को सरकार ने नोटिस भेजा है. इन स्कूलों ने रिपब्लिक डे आयोजनों में अपने बच्चों को पार्टिसिपेट करने के लिए भेजने से इनकार कर दिया था.

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इलेक्ट्रिकल सामान बेचने वाले कारोबारी शाहजी मुजफ्फर ने कहा कि हम अपने बच्चों की जिंदगियां जोखिम में क्यों डालें? भारत ने हमारे लिए किया ही क्या है जो हमारे बच्चे असलियत में रिपब्लिक डे आयोजनों में शामिल हों. रोजाना हत्याओं से लेकर आर्थिक रूप से पाबंदियां लगाने तक, नई दिल्ली कभी भी कश्मीर के साथ ईमानदार नहीं रही है. 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे दिन हमें कश्मीरी लोगों पर ढाए गए जुल्मों की याद दिलाते हैं.

हालांकि, जो लोग तनावग्रस्त इलाकों में रह रहे हैं, लेकिन आधिकारिक आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं, उनके लिए इस दिन के किसी घटना के बगैर बीत जाने की उम्मीद में घरों में बंद होकर रहने का है. इस बार सर्दियों में गर्मी और सूरज की रोशनी ज्यादा रही है, ऐसे में लोग थोड़ी बहुत आउटिंग की योजनाएं बना रहे हैं. घाटी के शहरी इलाकों के आसपास रहने वाले युवा इस दिन क्रिकेट या ताश खेलकर खुद को व्यस्त रखेंगे.

श्रीनगर के चानापोरा इलाके में रहने वाले वकील जावेद बाबा ने कहा कि चूंकि, यह छुट्टी का दिन है, ऐसे में हम दलवान गांव की एक टीम के साथ मैच खेलेंगे. लेकिन, ऐसा तभी हो पाएगा जब सुरक्षा बल हमें वहां तक जाने की इजाजत दें. नहीं तो रिपब्लिक डे ऐसे ही बेकार चला जाएगा.

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