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देश के आठ सूबों में एक भी बूचड़खाना रजिस्टर्ड नहीं

पेटा के प्रेस रिलीज में कहा गया है कि देश में अवैध या गैर लाइसेंसी बूचड़खानों की संख्या 30,000 से ज्यादा है

Updated On: Apr 16, 2017 06:02 PM IST

Bhasha

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देश के आठ सूबों में एक भी बूचड़खाना रजिस्टर्ड नहीं

उत्तरप्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है. इस बीच आरटीआई से पता चला है कि देश में केवल 1,707 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत रजिस्टर्ड हैं.

तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बूचड़खाने रजिस्टर्ड हैं. जबकि अरणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना रजिस्टर्ड नहीं है.

मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को बताया कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उन्हें ये आंकड़े फूड लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम से मिली जानकारी के आधार पर दिए.

कहां कहां के बूचड़खाने रजिस्टर्ड नहीं ?

उन्होंने कहा, ‘ सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मुहैया कराए गए इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में कितनी बड़ी तादाद में अवैध बूचड़खाने चल रहे हैं.’

गौड़ की आरटीआई अर्जी पर भेजे जवाब में एफएसएसएआई के एक अफसर ने बताया कि अरणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा, नगर हवेली, दमन और दीव, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में एक भी बूचड़खाना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत रजिस्टर्ड नहीं है.

आरटीआई की जानकारी में यह भी पता चला कि आठों राज्यों में ऐसा एक भी बूचड़खाना नहीं है, जिसने केंद्रीय या राज्यस्तरीय लाइसेंस ले रखा हो.

एफएसएसएआई ने आरटीआई के तहत बताया कि तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत रजिस्टर्ड हैं.

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यानी देश के कुल 55 फीसद रजिस्टर्ड बूचड़खाने इन्हीं तीन सूबों में चल रहे हैं.

उत्तरप्रदेश में 58 बूचड़खाने रजिस्टर्ड हैं. जहां अवैध बूचड़खाने के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्रवाई चर्चा में है.

आंध्रप्रदेश में 1, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 9, असम में 51, बिहार में पांच, छत्तीसगढ़ में 111, दिल्ली में 14, गोवा में 4, गुजरात में 4, हरियाणा में 18, हिमाचल प्रदेश में 82, जम्मू-कश्मीर में 23, झारखंड में 11, कर्नाटक में 30, केरल में 50, लक्षद्वीप में 65, मणिपुर में चार और मेघालय में एक बूचड़खाने को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत  किया गया है.

ओडिशा में पांच, पुडुचेरी में दो, पंजाब में 112, राजस्थान में 84, उत्तराखंड में 22 और पश्चिम बंगाल में पांच बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत बूचड़खाने हैं.

162 बूचड़खानों को प्रदेशस्तरीय लाइसेंस मिले

एफएसएसएआई ने आरटीआई के तहत यह भी बताया कि देश भर में 162 बूचड़खानों को प्रदेशस्तरीय लाइसेंस मिले हैं. जबकि 117 बूचड़खानों को केंद्रीय लाइसेंस मिले हैं.

इस बीच पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया की विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश में अवैध या गैर लाइसेंसी बूचड़खानों की संख्या 30,000 से ज्यादा है. हालांकि, कई लाइसेंसशुदा बूचड़खानों में भी पशुओं को बेहद क्रूरतापूर्वक जान से मारा जाता है.

पेटा इंडिया ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे बूचड़खानों को बंद कराएं जिनके पास उपयुक्त अथॉरिटीस के लाइसेंस नहीं हैं. और जो कानून का गलत तरीकों का इस्तेमाल करती हैं.

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