S M L

पीड़ितों की मदद के लिए क्या करेंगे, सिर्फ 22 फीसदी लोग बोले- हम पुलिस को बुलाएंगे

10 में 8 लोगों को अच्छे सॉमैरिटिन कानून 2016 के बारे में पता तक नहीं है

Updated On: Nov 27, 2018 11:15 AM IST

FP Staff

0
पीड़ितों की मदद के लिए क्या करेंगे, सिर्फ 22 फीसदी लोग बोले- हम पुलिस को बुलाएंगे

किसी दुर्घटना या हादसे में घायलों और पीड़ितों की मदद करना सबसे जरूरी होता है. हर जिम्मेदार नागरिक का फर्ज है कि वो पीड़ित को सबसे पहले मदद पहुंचाए. इस बारे में गुड सॉमैरिटिन 2016 का कानून भी है. ये कानून किसी हादसे में घायल को फर्स्ट ऐड देने या अस्पताल पहुंचाने के लिए लोगों को जागरुक करता है. ऐसे किसी मदद पहुंचाने वाले शख्स को पुलिस पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित नहीं कर सकती. लेकिन असलियत ये है कि इस कानून की जानकारी लोगों के पास है ही नहीं. अभी भी 10 में से 8 लोग इस कानून से अनजान हैं.

एक सर्वे ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं. सर्वे से पता चला कि किसी हादसे में मदद करने में हम कितने पीछे हैं. लोग कानून के बारे में जागरूक नहीं हैं और मदद पहुंचाने वाले लोगों को कानूनन सुरक्षा मुहैया करवाने के बजाए पुलिस अभी भी ऐसे मामलों में उन्हें हिरासत में ले रही है. सर्वे में पता चला कि किसी हादसे में मदद करने वाले करीब 59 फीसद लोगों ने कहा कि मदद के एवज में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सेव-लाइफ फाउंडेशन द्वारा कई शहरों में कंडक्ट कराए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि 10 में 8 लोगों को अच्छे सॉमैरिटिन कानून 2016 के बारे में पता तक नहीं है. ये कानून पुलिस व अन्य एजेंसियों द्वारा की जाने वाली बदसलूकी के डर के बिना मुसीबत में पड़े व्यक्ति की मदद करने में कानूनी सुरक्षा प्रदान कराता है.

सर्वे में कहा गया है कि साउथ इंडिया मेट्रो शहरों में इस कानून के बारे में सबसे कम लोग जानते हैं. चेन्नई में 93 फीसद, जब कि बेंगलुरु और हैदराबाद में 89 प्रतिशत लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं. जब कि इंदौर में सबसे अधिक 29 प्रतिशत लोग इसके बारे में जानते हैं. देश की राजधानी दिल्ली में भी सिर्फ 21 फीसद लोग इस कानून के बारे में जानते हैं. जब कि मुंबई में 22 और जयपुर में 28 फीसद जनता को इसके बारे में पता है.

सर्वे करने वाली संस्था ने बताया कि सिर्फ 29 फीसदी लोगों ने किसी हादसे में घायल शख्स की मदद के लिए उसे अस्पताल पहुंचाने की इच्छा जताई, सिर्फ 28 फीसदी लोगों ने एंबुलेंस बुलाने की बात मानी और सिर्फ 22 फीसदी लोगों ने कहा कि ऐसी किसी स्थिति आने पर वो पुलिस को कॉल करेंगे.

हालांकि सर्वे में पाया गया है कि लोगों में पीड़ितों की खुद से मदद करने की इच्छा बढ़ी है. जहां 2013 में सिर्फ 26 फीसद लोग ऐसा सोचते थे, वहीं अब 2018 में 88 फीसद लोग अपनी इच्छा से पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं. अच्छे सॉमैरिटिन कानून के मुताबिक, सभी अस्पतालों और पुलिस थानों के एंट्रेंस पर गुड सॉमैरिटिन चार्ट लगा होना चाहिए. ताकि घायलों की मदद कर उन्हें अस्पताल लाने वाले लोगों को अपने अधिकारों के बारे में पता हो.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi