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तमाम कोशिशों के बाद भी कम नहीं हुआ भ्रष्टाचार, रिश्वत देने वाले 10% बढ़े

इस सर्वे में देश के कुल 1,60,000 लोगों ने भाग लिया

Updated On: Oct 12, 2018 03:17 PM IST

FP Staff

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तमाम कोशिशों के बाद भी कम नहीं हुआ भ्रष्टाचार, रिश्वत देने वाले 10% बढ़े

सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने के चाहे कितने ही दावे करे, लेकिन बीते एक साल में आमलोगों द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से घूस देने के मामले में कोई कमी नहीं दर्ज की गई है. ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इंडिया और लोकल सर्कल्स द्वारा किए एक सर्वे के अनुसार बीते एक साल में 56 प्रतिशत लोगों ने घूस देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है. इस सर्वे में देश के कुल 1,60,000 लोगों ने भाग लिया. वहीं बीते साल 45% लोगों द्वारा घूस देने का मामला सामने आया था.

न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन की उपलब्धता के मामले में 58 % लोगों ने यह माना कि उनके शहर में ऐसी कोई हेल्पलाइन मौजूद नहीं है. वहीं 33% लोगों ने इस संदर्भ में कोई जानकारी न होने की बात कही.

घूस देने के माध्यमों पर हुए सर्वे में यह बात सामने आई कि 39% घूस कैश में दिए जाते हैं, 25% एजेंट के जरिए और 1% अन्य किसी तरीके से. वहीं सबसे अधिक घूस पुलिस अधिकारी, बिजली बोर्ड, ट्रांसपोर्ट ऑफिस, टैक्स ऑफिस को देने की बात सामने आई है.

सर्वे के अनुसार 36% लोगों का मानना है कि सरकारी अधिकारी घूस लेने के बाद ही काम पूरा करते हैं. घूस नहीं देने पर वह काम अटका रह जाता है. वहीं 39% लोगों का मानना है कि ऐसा नहीं है. जबकि पिछले साल तक 43% लोगों का यह मानना था.

सीसीटीवी कैमरे लगे सरकारी दफ्तरों में भी घूस का चलन

सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि सर्वे लेने वाले लोगों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए घूस देने की बात बताई है. इससे यह बात सामने आई कि 13% लोगों ने सीसीटीवी कैमरे लगे सरकारी दफ्तरों में घूस दिए हैं.

वहीं 63% लोगों का यह मानना है कि भ्रष्टाचार कानून में हाल फिलहाल हुए संशोधन से सरकारी अधिकारियों द्वारा लोगों को शोषित करने का मामला बढ़ जाएगा.

30 वर्षीय भ्रष्टाचार विरोधी कानून के कुछ प्रावधानों में हुए संशोधन के बाद रिश्वत लेने वाले को कम से कम तीन साल के कारावास की सजा दी जाती है. यह सजा बढ़कर सात साल भी हो सकती है. जबकि रिश्वत देने वालों को सात साल का कारावास या जुर्माना या दोनों के साथ दंडित किया जाएगा.

भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिश्वत देने वाला कोई भी शख्स घरेलू कानून में शामिल नहीं होगा. हालांकि, वैसे लोग जिन्हें रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया है उसे सात दिनों के भीतर कानून प्रवर्तन प्राधिकरण या जांच एजेंसी को यह मामला रिपोर्ट करना होगा.

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