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राजस्थान में गायब हुईं 31 पहाड़ियां, सुप्रीम कोर्ट बोला 'क्या हनुमान हो गए हैं लोग'

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का एक कारण इन पहाड़ियों का गायब होना भी है

Updated On: Oct 23, 2018 08:10 PM IST

Bhasha

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राजस्थान में गायब हुईं 31 पहाड़ियां, सुप्रीम कोर्ट बोला 'क्या हनुमान हो गए हैं लोग'
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अरावली क्षेत्र में 31 पहाड़ियों के गायब हो जाने पर मंगलवार को आश्चर्य व्यक्त किया. इसी के साथ कोर्ट ने राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर 115.34 हेक्टर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन बंद करने का आदेश दिया है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि राजस्थान को अरावली में खनन गतिविधियों से करीब पांच हजार करोड़ रुपए की रायल्टी मिलती है. लेकिन वह दिल्ली में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में नहीं डाल सकता. क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की एक वजह इन पहाड़ियों का गायब होना भी हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट बोला क्या हनुमान हो गए हैं लोग

जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने राजस्थान सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट का जिक्र किया और कहा कि इससे संकेत मिलता है कि राज्य में अरावली रेंज में 115.34 हेक्टेयर इलाके में गैरकानूनी खनन की गतिविधियां चल रही हैं. पीठ ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा लिए गए 128 नमूनों में से 31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं.

जस्टिस लोकूर ने राजस्थान के वकील से कहा, ‘31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं. यदि देश में पहाड़ियां गायब होंगी तो फिर क्या होगा? क्या लोग ‘हनुमान’ हो गए हैं जो पहाड़ियां ले जा रहे हैं?’ पीठ ने कहा, ‘राजस्थान में 15-20 प्रतिशत पहाड़ियां गायब हो गई हैं. यह आपके यहां की सच्चाई है. आप किसे अंधेरे में रखना चाहते हैं. राज्य अरावली पहाड़ियों को गैरकानूनी खनन से बचाने में विफल हो गया है.’

29 अक्टूबर को कोर्ट करेगा विचार

पीठ ने 48 घंटे के भीतर 115.34 हेक्टर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन रोकने का आदेश देते हुए राज्य के मुख्य सचिव को इस पर अमल के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट इस मामले में अब 29 अक्टूबर को आगे विचार करेगा.

पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार ने इस मामले को बहुत ही हल्के में लिया है और शीर्ष अदालत उसकी स्थिति रिपोर्ट से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है. क्योंकि इसमें से अधिकांश वन सर्वेक्षण विभाग की तथाकथित अक्षमता के बारे में है.

इस मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार के वकील से जानना चाहा कि उसने अरावली इलाके में गैरकानूनी खनन की गतिविधियां रोकने के लिए क्या कदम उठाए. इस पर वकील ने कहा कि हमने कारण बताओ नोटिस जारी करने के अलावा इस संबंध में कई प्राथमिकी भी दर्ज की हैं.

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