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आपको वो सीरियाई बच्चा एलन कुर्दी याद है? अब 'द बॉय ऑन द बीच' नाम से आई है किताब

हिंसा में डूबी और शरणार्थियों से पटी पड़ी दुनिया में तीमा कुर्दी के परिवार के दुख कि ये कहानी कितना असर डाल पाएगी?

Updated On: Aug 23, 2018 05:38 PM IST

FP Staff

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आपको वो सीरियाई बच्चा एलन कुर्दी याद है? अब 'द बॉय ऑन द बीच' नाम से आई है किताब

2 सितंबर 2015 को दुनिया भर में एक तस्वीर ने तहलका मचा दिया था. तुर्की के समुद्री तट पर एक सीरियाई बच्चे का शव बहता हुआ पहुंचा था, जिसने सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध का सबसे भयावह चेहरा दुनिया के सामने रख दिया था. एलन कुर्दी नाम के तीन साल बच्चे की ये फोटो सीरिया में चल रही तबाही का चेहरा बन गया. एलन कुर्दी उन करोड़ों लोगों में से एक था, जो सीरिया के भयानक गृह युद्ध से जान बचाने के लिए देश छोड़कर भाग रहे थे.

इस फोटो ने दुनिया भर में लोगों का ध्यान सीरिया क्राइसिस की ओर खींचा. लेकिन ये फोटो शेयर हुई, चर्चा हुई और फिर लोग भूल गए लेकिन अब एलन कुर्दी की याद में और बर्बाद सीरिया के बर्बाद शरणार्थियों के नाम पर एक नई किताब आ रही है. नाम है- द बॉय ऑन द बीच.

इस किताब को खुद एलन की आंटी तीमा कुर्दी ने लिखा है. कुर्दी ने इस किताब अपने परिवार की अपूरणीय निजी क्षति की कहानी बताते हुए सीरिया की बर्बादी और इमिग्रेशन क्राइसिस पर बात की है. ये किताब कुर्दी परिवार सदस्यों के उस दर्दनाक मौत के तीसरे साल पर पब्लिश हो रही है.

कनाडा में रहने वाली तीमा कुर्दी ने इस संस्मरण में उस वक्त को याद किया है जब वो इंतजार कर रही थीं कि उनके छोटे भाई अब्दुल्ला कुर्दी यानी एलन कुर्दी के पिता जल्द ये खबर दें कि उन्होंने सकुशल अपने परिवार के साथ सकुशल समंदर पार कर लिया है लेकिन अगली खबर उन्हें खबरों से मिली थी, जिसमें उन्होंने अपने तीन साल के भतीजे के शव को देखा. उन्हें इस सदमे और गुस्से से उबरने में काफी वक्त लगा.

एलन कुर्दी का परिवार उस वक्त सीरिया के गृहयुद्ध से भागकर ग्रीस जा रहा था लेकिन समंदर में स्मगलरों ने हमला किया और उनकी नाव बह गई, इसमें एलन के साथ उसका भाई गालिब और मां की डूबने से मौत हो गई.

तीमा कुर्दी ने इस किताब में अपने परिवार के इस हृदयविदारक कहानी से जोड़कर सीरिया के अच्छे दिनों के बारूद और खून में डूब जाने की कहानी सुनाई है. उन्होंने वर्तमान हालातों की भी बात की है. उन्होंने इस मुद्दे पर भी बात की है कि कैसे हिंसा से पीड़ित करोड़ों लोग शरणार्थी बन गए हैं लेकिन दुनिया भर में उनकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा. जो देश शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे खोलते भी थे, उन्होंने भी अब हालात मुश्किल कर दिए हैं.

हिंसा में डूबी और शरणार्थियों से पटी पड़ी दुनिया में तीमा कुर्दी के परिवार के दुख कि ये कहानी कितना असर डाल पाएगी?

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